राजनीति

चुनावी राज्यों में बेकाबू कोरोना

रैलियों में प्रोटोकॉल की उड़ी धज्जियां उड़ीं

नई दिल्ली,(RIN)। देश में कोरोना पुन: तेजी से पैर पसारने लगा है। कोरोना की दूसरी लहर चल रही है और रोज आने वाले नए केस पहले पीक के करीब आ चुके हैं। देश के अलग-अलग शहरों में लॉकडाउन, नाइट कफ्र्यू जैसे ऑप्शन इस्तेमाल किए जा रहे हैं, लेकिन जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, उनमें कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां खुद नेता उड़ा रहे हैं। चुनावी राज्यों में सिर्फ केरल ही एकमात्र राज्य है, जहां कोरोना के केस कम हुए हैं। बंगाल में 1 मार्च तक औसतन 171 नए केस आ रहे थे, लेकिन 1 अप्रैल को यह संख्या बढ़कर 1274 हो चुकी है। तमिलनाडु में 1 मार्च तक औसतन 474 कोरोना केस आ रहे थे, लेकिन 1 अप्रैल को यह आंकड़ा 2817 पर पहुंच चुका है। असम में 1 मार्च को केसों की औसत संख्या 15 थी, लेकिन 1 अप्रैल में वहां भी 50 मरीज मिले। पश्चिम बंगाल में 1 अप्रैल को हुए दूसरे फेज के चुनाव के बाद 20 से ज्यादा ऑब्जर्वर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। इलेक्शन कमीशन के सूत्रों ने बताया कि पॉजिटिव पाए गए 20 लोगों में से कुछ की रिपोर्ट ड्यूटी जॉइन करने से पहले ही आ गई थी। इनमें से अधिकतर वोटिंग प्रोसेस का हिस्सा थे और अब आइसोलेशन में हैं। देश के बाकी हिस्सों की तरह पश्चिम बंगाल में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शनिवार को यहां 1,736 नए केस दर्ज किए गए। राज्य में लगातार तीसरे दिन 1 हजार से ज्यादा केस मिले हैं। पश्चिम बंगाल में साउथ 24 परगना में पीएम मोदी की एक सभा का नजारा है ये। भीड़ में दूर-दूर तक कोई मास्क पहना नजर नहीं आ रहा है। भीड़ में दूर-दूर तक कोई मास्क पहना नजर नहीं आ रहा है। चुनाव की शुरुआत के बाद से बंगाल में 50 से ज्यादा बड़ी रैलियां और रोड शो हो चुके हैं। आगे के चरणों के चुनाव में इससे भी ज्यादा जनसभाएं होनी हैं। अभी तक प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक किसी की भी रैली में भीड़ कोविड नियमों का पालन करती नहीं दिखी है। डॉक्टर केस में इजाफे को इसकी बड़ी वजह बनाते हैं।

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