छत्तीसगड़

नदियों के पुनरूद्धार एवं पुनर्जीवित करने संबंधी राज्य स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर. 
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित राज्य की प्रमुख नदियों के पुनरूद्धार एवं पुनर्जीवित करने गठित राज्य स्तरीय समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में प्रवाहित हो रही नदियों के पुर्नजीवन हेतु किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। नदियों का संरक्षण से जन स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में बैठक में जिलों के कलेक्टरों से नदियों के कैचमेंट एरिया में बनायी गई विविध जल संरक्षण एवं संचयन की कार्य योजनाओं को लेकर चर्चा हुई। 

मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि हाईकोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार नदियों के पुनर्जीवित एवं पुनरूद्धार के कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों से नदियों के कैचमेंट एरिया में ऐसे जनउपयोगी कार्यों को लिया जाए जो भविष्य में नदियों के आस-पास रहने वाले लोगों की जरूरतों के अनुरूप हो। मुख्य सचिव ने नदियों के कैचमेंट एरिया में किए जाने वाले कार्यों से स्थानीय सरपंचों एवं जनप्रतिनिधियों को आवश्यक रूप से जोड़ने के लिए कहा। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि जिले से उद्गम होने वाली नदियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी रखी जाए। जिससे नदियों के बारे में छात्रों को जानकारी मिले। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं का भ्रमण नदियों के उद्गम स्थल पर कराया जाए और नदियों की जानकारी के संबंध में छात्रों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाए। कलेक्टर ने नदियों के उद्गम स्थलों पर मेला उत्सव जैसे आयोजनों को करने के लिए भी कहा। बैठक में कलेक्टर रायगढ़, कोरबा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, सरगुजा, कोरिया, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, गरियाबंद और धमतरी के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिले में स्थित नदियों की वास्तविक स्थिति और संचालित कार्ययोजनाओं एवं परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कलेक्टरों को नदियों के संरक्षण, संवर्धन के लिए जिला स्तरीय समितियों के संबंध में जानकारी दी।

मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को नदियों के कैचमेंट एरिया में वृक्षारोपण, जल ग्रहण, वाटर रिचार्ज और आवश्यकतानुसार जल संरचनाओं के निर्माण के लिए वीबीजीरामजी, कैम्पा, नरेगा, डीएमएफ सहित अन्य मदो से विविध कार्ययोजना बनाने कहा है। नदियों के महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन से जोड़ने के लिए भी कार्ययोजना तैयार कर कार्यवाही करने कहा है। इसी तरह से नदियों में किसी भी तरह के अपशिष्ट नहीं डाले जाना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए है। बैठक में प्रोफेसर डॉ. एम.के. वर्मा ने नदी जल संरक्षण के संबंध में विस्तार से तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। इसी तरह से एनआईटी के प्रोफेसर जल विज्ञानी इश्तियाक अहमद ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नदी जल संरक्षण और पर्यावरण सहित महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव सुआर. शंगीता सहित वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन, खनिज, छत्तीसगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं केन्द्रीय भू-जल बोर्ड के अधिकारी शामिल हुए।

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