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SC कॉलेजियम ने Supreme Court के तीन न्यायाधीशों के तबादले की सिफारिश की

नई दिल्ली
 प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने केंद्र को विभिन्न उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों के स्थानांतरण की सिफारिश की है। इन न्यायाधीशों ने अपने तबादले का अनुरोध किया था।

 कॉलेजियम की बैठक हुई, जिसमें न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायामूर्ति अनिरुद्ध बोस भी शामिल थे।

कॉलेजियम ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति मौसमी भट्टाचार्य के किसी अन्य उच्च न्यायालय में स्थानांतरण के अनुरोध को स्वीकार कर लिया।

कॉलेजियम ने कहा, '' एक पत्र द्वारा न्यायमूर्ति मौसमी भट्टाचार्य ने व्यक्तिगत कारणों से कलकत्ता उच्च न्यायालय से किसी अन्य उच्च न्यायालय में स्थानांतरण की मांग की है। कॉलेजियम ने अनुरोध को स्वीकार कर लिया है और न्याय के बेहतर प्रशासन के हित में न्यायमूर्ति भट्टाचार्य को तेलंगाना उच्च न्यायालय स्थानांतरित किये जाने की सिफारिश की जाती है।''

इसने न्यायमूर्ति अनु शिवरमन के अनुरोध को भी स्वीकार कर लिया, जिन्होंने केरल राज्य से बाहर स्थानांतरण की मांग की है।

इसमें कहा गया है कि कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति अनु शिवरमन को कर्नाटक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की सिफारिश की है।

एक अन्य फैसले में, कॉलेजियम ने कहा कि उसे  न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल से इस आधार पर स्थानांतरण की मांग करते हुए एक पत्र मिला कि उनके पुत्र मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय में वकालत कर रहे हैं।

अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक प्रस्ताव में कॉलेजियम ने कहा, ''कॉलेजियम ने अनुरोध स्वीकार कर लिया है और यह सिफारिश की जाती है कि न्याय के बेहतर प्रशासन के हित में न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल को तेलंगाना उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जाए।''

 

जेएनयू के पूर्व छात्र खालिद ने ली उच्चतम न्यायालय से अपनी जमानत याचिका वापस

नई दिल्ली
 दिल्ली दंगों (फरवरी 2020) की साजिश रचने के आरोपी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद ने उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी जमानत याचिका  वापस ले ली। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल ने याचिकाकर्ता के अनुरोध पर याचिका वापस लेने अनुमति दी।

न्यायमूर्ति त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष खालिद का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इस अनुरोध के साथ याचिका वापस लेने की गुहार लगाई कि वह बदली हुई परिस्थितियों में स्थानीय अदालत के समक्ष जमानत के लिए अपनी (खालिद) किस्मत आजमाएंगे। सिब्बल ने पीठ के समक्ष दलील देते हुए कहा, मैं कानूनी सवालों (यूएपीए के प्रावधानों को चुनौती देने वाले) पर बहस करना चाहता हूं, लेकिन बदली हुई परिस्थितियों के कारण अपनी जमानत याचिका वापस लेना चाहता हूं।" इससे पहले शीर्ष अदालत में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई कई बार विभिन्न कारणों से टाल दी गई थी। याचिकाकर्ता खालिद सितंबर 2020 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।

खालिद ने अक्टूबर 2022 में दिल्ली उच्च न्यायालय से जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उसकी याचिका पर अदालत ने दिल्ली दिल्ली पुलिस को मई 2023 में नोटिस जारी किया था। मार्च 2022 में कड़कड़डूमा की जिला अदालत ने खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। दिल्ली पुलिस ने खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया था। उसे दंगों की साजिश रचने, गैरकानूनी सभा करने के अलावा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) जैसे संगीन आरोप के तहत गिरफ्तार किया गया था।

 

 

 

 

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