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मध्यप्रदेश

पदोन्नति आरक्षण केस में हाईकोर्ट की सुनवाई आज, दिल्ली से वकील बुलाने का मौका भी संभव

जबलपुर 

मध्यप्रदेश सरकार के लोक सेवा पदोन्नति नियमों के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट में मंगलवार (12 अगस्त) को सुनवाई होना है। इस दौरान राज्य सरकार कोर्ट में जवाब पेश करेगी।

कोर्ट में पिछली सुनवाई के दौरान सरकार अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख पाई थी और जवाब पेश करने के लिए कोर्ट से समय मांगा गया था। दिल्ली से सीनियर एडवोकेट के जरिए सरकार अपना पक्ष रख सकती है, ऐसी कवायद भी चल रही है।

इससे पहले कोर्ट ने 7 जुलाई को कोर्ट ने मुख्य सचिव सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। साथ ही आदेश दिया था कि इस मामले में स्थिति स्पष्ट होने तक कोई भी पदोन्नति नहीं दी जा सकेगी।

इसके चलते 31 जुलाई तक पदोन्नति दिए जाने के राज्य सरकार के तमाम प्रयास नाकाम हो गए हैं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि अगली सुनवाई तक किसी को नई नीति के तहत पदोन्नति नहीं दी जाएगी।

मामले में भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि हाईकोर्ट पहले ही वर्ष 2002 के प्रमोशन नियमों को आरबी राय केस में रद्द कर चुका है।

इसके बावजूद राज्य सरकार ने नए सिरे से वही नीति लागू कर दी जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और वहां यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी है।

17 जून को कैबिनेट ने दी थी मंजूरी नए पदोन्नति नियमों को मोहन यादव कैबिनेट ने 17 जून को मंजूरी दी थी और इसके बाद सरकार ने 19 जून 2025 को नए नियम बनाकर अधिसूचना जारी कर उसे लागू कर दिया है लेकिन न तो सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका वापस ली और न ही पुराने नियम से पदोन्नत हुए कर्मचारियों को पदावनत किया।

इसी कारण जब इन नियमों के विरोध में हाई कोर्ट याचिका दायर की गई तो कोर्ट ने नए और पुराने नियम के अंतर को स्पष्ट करने के साथ इस बात पर सरकार से जवाब मांग लिया कि सरकार की ओर से दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस क्यों नहीं ली गई। जब नियम तैयार हो रहे थे, तब भी यह विषय उठा था लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

अब इस मामले में सरकार द्वारा दिए जाने वाले जवाब से तय होगा कि पदोन्नति का रास्ता खुलेगा या पदोन्नति अटकी रहेगी। बताया जाता है कि सरकार कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखने के लिए मंगलवार को पूर्व अतिरिक्त सालिसिटर जनरल सीएस वैद्यनाथन को बुला सकती है।

 

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