मध्यप्रदेश

कांग्रेस की ‘यादवेंद्र’ चुनौती से निपटने भाजपा के यदुवंशियों ने संभाला मोर्चा

भोपाल

केंद्रीय मंत्री एवं गुना लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ राव यादवेंद्र यादव के कांग्रेस से उतरते ही भाजपा ने इस क्षेत्र के यदुवंशियों को साधने का काम आज से ही शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने बुधवार को गुना से राव यादवेंद्र यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है।

यादव के उम्मीदवार बनते ही इस क्षेत्र के यादवों को साधने गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, मंत्री कृष्णा गौर सहित यादव समाज के कई जनप्रतिनिधि और भाजपा नेता गुना संसदीय क्षेत्र के ईसागढ़ पहुंचे हैं। ईसागढ़ में यादव समाज का सम्मेलन मंडी परिसर में आयोजित हो  रहा है। अखिल भारत वर्षीय यादव महासभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष आरएन यादव इस सम्मेलन की अगुवाई कर रहे हैं। उन्होंने लोकसभा क्षेत्र के सभी यादवों को इस सम्मेलन में बुलाने का प्रयास किया है। इस आयोजन के अलावा मुख्यमंत्री यहां पर भाजपा उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में जनसंवाद कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। यहां पर वे लोगों से सीधी बातचीत करेंगे और भाजपा के लिए वोट मांगेंगे।

खजुराहो लोकसभा सीट पर होगी सभा
गुना लोकसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा खजुराहो संसदीय क्षेत्र में जाएंगे। यहां से प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ही चुनाव मैदान में हैं। दोनों नेता छतरपुर जिले के चंदला विधानसभा में सभा करेंगे। इसके बाद दोनों नेता यहां पार्टी कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ग्राम बसारी भी जाएंगे।

पूर्व विधायक राव देशराज सिंह के बेटे हैं यादवेंद्र
गुना से कांग्रेस उम्मीदवार यादवेंद्र सिंह यादव मुंगावली से विधायक रहे चुके राव देशराज सिंह के बेटे हैं। बीच में यादवेंद्र सिंह के साथ ही उनकी मां बाई साहब यादव और भाई अजय यादव ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था।  एक माह पहले उनकी मां और छोटे भाई ने भाजपा ज्वाइन कर ली थी, लेकिन यादवेंद्र सिंह यादव कांग्रेस से ही जुड़े रहे। यादवेंद्र सिंह जिला पंचायत के सदस्य हैं उनकी पत्नी भी जिला पंचायत की सदस्य है।

इधर, कांग्रेस में अरुण यादव को खंडवा से लड़ाने पर संशय मुरैना- ग्वालियर में भी नहीं सुलझ रहा पेंच
लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस को ग्वालियर, मुरैना के साथ ही खंडवा सीट पर जिताऊ उम्मीदवार  के साथ ही जातिगत समीकरण बैठाने में खासी मशक्कत करना पड़ रही है। इसलिए ये तीनों सीट अब तक फंसी हुई हैं, इन तीनों पर एक राय नहीं हो पा रही है। अब कांग्रेस के अधिकांश बड़े नेता चाहते हैं कि खंडवा से अरुण यादव को टिकट दिया जाए। जबकि मीनाक्षी नटराजन सहित अन्य नेताओं की ही तरह अरुण यादव भी चुनाव लड़ने से बचना चाहते हैं। अरुण यादव को खंडवा से लोकसभा चुनाव लड़ाए जाने पर विचार हो रहा है। यादव यहां से दो चुनाव हार चुके हैं, इसके चलते ही पार्टी ने इस सीट पर सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के निधन के बाद उपचुनाव में उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया था। अब पार्टी को यहां से मजबूत नेता चुनाव लड़ने के लिए नहीं मिल रहा है। हालांकि पहले यह तय हो गया था कि गुना से अरुण यादव चुनाव लड़ेगे तो खंडवा से नरेंद्र पटेल को उम्मीदवार बनाया जाए, लेकिन अब दिल्ली में समीकरण बदल रहे हैं।  इसी तरह मुरैना और ग्वालियर सीट पर फंसा पेंच का हल नहीं निकल सका है। मुरैना से पंकज उपाध्याय को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी टिकट दिलाना चाहते हैं।

 

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