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आठ साल में भारत में खिलौनों के आयात में 52 फीसदी की गिरावट आई

नई दिल्ली
भारतीय खिलौनों की दुनियाभर में धूम मच रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फाइनेंशियल ईयर 2015 से 2023 के बीच भारत से खिलौनों के निर्यात में 239 फीसदी तेजी आई है। इस दौरान आयात में 52 फीसदी गिरावट आई है। इसके साथ ही खिलौनों को ग्लोबल मार्केट में चीन का दबदबा कम हो रहा है और भारत नेट एक्सपोर्टर बनकर उभरा है। दुनिया की कई बड़ी खिलौना कंपनियां अब चीन के बजाय भारत से खिलौने खरीद रही है। मार्केट रिसर्च फर्म IMARC की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की टॉय इंडस्ट्री की वैल्यू पिछले साल 1.7 अरब डॉलर थी जिसके 2032 तक 4.4 अरब डॉलर पहुंचने की उम्मीद है। मोदी सरकार ने देसी खिलौनों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं जिनकी बदौलत भारत आज इस इंडस्ट्री में पावरहाउस बन रहा है।

 एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में खिलौनों की बिक्री के लिए बीआईएस अप्रूवल को अनिवार्य बनाने, देसी खिलौनों को बढ़ावा देने, दुनियाभर की कंपनियों की चाइना-प्लस-वन पॉलिसी और बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को बढ़ाकर 70 फीसदी किए जाने से देश में खिलौना उद्योग ने उड़ान भरी है। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि Hasbro, Mattel, Spin Master और Early Learning Centre जैसे ग्लोबल ब्रांड्स भारत से खिलौने खरीद रहे हैं। इसी तरह Dream Plast, Microplast और Incas चीन से भारत में अपना फोकस शिफ्ट कर रही हैं। बीआईएस की अनिवार्यता लागू होने से पहले भारत में 80 फीसदी खिलौने चीन से आते थे लेकिन अब चीन से खिलौनों के आयात में काफी कमी आई है।

दुनिया में बढ़ रहा दबदबा

टायर बनाने वाली चेन्नई की कंपनी एमआरएफ के पास भी एक टॉय ब्रांड है जिसका नाम Funskool है। कंपनी के सीईओ आर जसवंत ने कहा कि चीन के खिलौनों को बीआईएस से मान्यता नहीं मिली है। चीन से होने वाले आयात की जगह अब भारतीय प्रॉडक्ट्स ने ले ली है। दस साल पहले शायद ही कोई कंपनी भारत से खिलौने खरीद रही थी। लेकिन अब कई कंपनियों ने भारत में अपना बेस बनाया है। Funskool कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को सप्लाई करती है जिनमें Hasbro, Spin Master, Early Learning Centre, Flair और Drumond Park Games शामिल हैं। इस कंपनी के 60 फीसदी खिलौने एक्पोर्ट होते हैं। Funskool दुनिया के 33 देशों को एक्सपोर्ट करती है जिनमें गल्फ देश, यूरोप और अमेरिका शामिल है।

आरपी एसोसिएट्स के मालिक पवन गुप्ता ने कहा कि भारत में खिलौनों का उत्पादन बढ़ गया है और कई कंपनियों ने भारत में अपना बेस बनाया है। पहले चीन से खिलौने खरीद रही कई कंपनियां अब दूसरे देशों में शिफ्ट हो रही हैं। इनमें भारत भी शामिल है। इस लिस्ट में Microplast, Dream Plast और Incas जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। Hasbro और Mattel जैसी कंपनियां बड़े पैमाने पर भारत से खरीद कर रही हैं। भारत सरकार ने एक जनवरी, 2021 से उन खिलौनों के आयात पर रोक लगा दी थी जिन्हें बीआईएस से सर्टिफिकेट नहीं मिला है। साथ ही सरकार ने फरवरी 2020 में खिलौनों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 20 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी कर दी थी जिसे मार्च 2023 में बढ़ाकर 70 फीसदी कर दिया गया था।

गुजरात बन रहा हब

टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज को सपोर्ट करने के लिए बीआईएस नियमों में और ढील देने की जरूरत है। एसोसिएशन का कहना है कि देश में 6,000 से अधिक खिलौना बनाने वाली यूनिट्स हैं जिनमें से केवल 1,500 के पास ही बीआईएस लाइसेंस है। एसोसिएशन के प्रेजिडेंट अजय अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने पिछले दो साल में एमएसएमई सेक्टर में कई तरह की छूट दी हैं। देश में कई स्टार्टअप कंपनियां इस सेक्टर में आगे आ रही हैं। देश में गुजरात टॉय मैन्यूफैक्चरिंग का हब बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले मन की बात कार्यक्रम में देश के खिलौना उद्योग की जमकर तारीफ की थी।

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