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उत्तर प्रदेश

जब 145 करोड़ जनशक्ति का भारत बोलता है तो 500 वर्ष की विकट समस्या का भी समाधान होता हैः मुख्यमंत्री

जालोर (राजस्थान) में श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर के 375 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय महायज्ञ एवं विशाल धर्मसभा में शामिल हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति का किया आह्वान- बच्चों को रोने और नाराज होने दें, लेकिन स्मार्टफोन कतई न दें

जालोर/लखनऊ,

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मातृशक्ति का आह्वान किया कि छोटी आयु के बच्चों को रोने-नाराज होने दें, कुछ देर में वे ठीक हो जाएंगे, लेकिन स्मार्टफोन कतई न दें। स्मार्ट फोन का अधिकाधिक प्रयोग समय की हानि के साथ आंखों को नुकसान पहुंचा रहा है। यह सोचने की सामर्थ्य को कम और बुद्धि को कुंठित कर रहा है। लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। स्मार्टफोन के तमाम गेम नकारात्मक दिशा की ओर ले जा रहे हैं। बच्चा जितना समय स्मार्टफोन पर खर्च कर रहा है, उतना समय यदि अच्छी पुस्तकों, योग, व्यायाम पर लगाएगा तो जीवन सुंदर-व्यवस्थित होगा। स्मार्टफोन का लगातार प्रयोग नशे जैसा ही खतरनाक है।

राजस्थान दौरे के दूसरे दिन सोमवार को गोरक्षपीठाधीश्वर व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जालोर के श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर (सिरे मंदिर) के 375 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय महायज्ञ एवं विशाल धर्मसभा में शामिल हुए।

युवा पीढ़ी को दी सीख- परिवार के लिए समय निकालिए, बातचीत कीजिए
धर्मसभा को संबोधित करते हुए सीएम ने युवा पीढ़ी को सीख दी कि जितना आवश्यक है, उतना ही स्मार्टफोन प्रयोग कीजिए। परिवार के लिए समय निकालिए, बातचीत कीजिए। भोजन, पूजा के समय फोन न उठाइए, बाद में कॉलबैक कीजिए। स्मार्टफोन एक समय बाद डिप्रेशन की बीमारी पैदा करने वाला है। छोटी-छोटी बातों के कारण आत्महत्याओं की प्रवृत्ति बढ़ी है। कभी विफलता मिली है तो कारण ढूंढ़कर उसे सफलता में बदलना ही जीवन है। विफलता से घबराना नहीं, बल्कि चुनौतियों का मुकाबला करना है। कोई भाग्य नहीं ले सकता, सब कुछ ईश्वरीय कृपा से ही मिलता है। लोभ-लालच से मुक्त रहकर देश, समाज के लिए सोचिए।

नशे के सौदागरों को परिवार, समाज, नगर, कस्बे, गांव में घुसने न देना
सीएम ने कहा कि देश के दुश्मन और नशे के सौदागर युवा पीढ़ी को नशे के आगोश में ले जाना चाहते हैं। नशे के कारोबारियों को सफल नहीं होने देना है। किसी देश के भविष्य को देखना है तो युवा पीढ़ी को देखें। यह सही दिशा में है तो देश नई ऊंचाई तक पहुंचता है। सीएम ने अपील की कि नशे के सौदागरों को परिवार, समाज, नगर, कस्बे या गांव, कहीं नहीं घुसने देना है।

मनुष्य हड़पने की बजाय जरूरतमंद तक पहुंचाने का भाव रखे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया में 200 से अधिक देश हैं, लेकिन भारत जैसा कोई नहीं। भारत दुनिया में अलग क्यों है, इसके लिए त्योहारों, परंपराओं, ऋषियों-मुनियों, विद्वानों, सैनिकों, किसानों, नौजवानों, बहन-बेटियों तथा माताओं के योगदान की विशिष्टता को समझना होगा। सीएम ने सिरे मंदिर के आसपास बंदरों के चौराहे का जिक्र करते हुए कहा कि कल जब हम लोग यहां रुके तो ढेर बंदर आ गए। हमने एक बंदर को रोटी दी तो वह खाने लगा, लेकिन जब तक उसने पहली रोटी खा नहीं ली, तब तक दूसरी रोटी नहीं ली। मनुष्यों को यह शालीनता सीखनी चाहिए। मनुष्य हड़पने व संचय की बजाय जरूरतमंद तक पहुंचाने का भाव रखे। लोभ संवरण साधना है और इसे जीवन का हिस्सा बनाना परम साधना है।

विरोध को भी अपने में समाहित करने का सामर्थ्य रखता है भारत
सीएम योगी ने कहा कि ऋषि-मुनि जहां साधना करते थे, उस पूरे क्षेत्र का प्रभाव इतना आध्यात्मिक होता था कि शेर और गाय एक ही घाट पर पानी पीते थे। सीएम ने शिव परिवार का जिक्र किया। कहा कि मां पार्वती दुर्गा की प्रतीक हैं, उनकी सवारी शेर और भोलेनाथ की सवारी बैल है। गणपति की सवारी चूहा, भोलेनाथ के गले में नाग और कार्तिकेय की सवारी मोर है, फिर भी सब साथ मिलकर जीवन चक्र को संचालित कर रहे हैं। जहां विरोध को भी अपने में समाहित करने का सामर्थ्य हो और समतामूलक समाज को एकता के सूत्र में आगे बढ़ाने की ताकत हो,  वही भारत है। भारत ने दुनिया को जीने की कला सिखाई। ऋषि-मुनियों की साधना, वीर-वीरांगनाओं के बलिदान, अन्नदाता किसानों के परिश्रम, कारीगरों की उद्यमिता, हस्तशिल्पियों के कार्य व श्रमिकों के पसीने से भारत का निर्माण हुआ है। समाज का हर तबका जुड़कर योगदान देता है तो देश ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ बनता है।

धर्म जोड़ता है और जातिवाद व्यवस्था को कमजोर करता है
सीएम योगी ने मत्स्यनाथ पीठ, फतेहपुर में बाबा अमृतनाथ पीठ आदि का जिक्र किया और कहा कि मंच पर बैठे सभी योगेश्वर गुरु परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इन पीठों के द्वारा समाज व समिष्टि के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, लोक कल्याण के लिए अनेक कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं। भक्ति, साधना व सामर्थ्य के माध्यम से लोककल्याण का बड़ा अभियान चल रहा है। हम भी इस परंपरा को बढ़ाने में अपनी ओर से प्रयास प्रारंभ करें। भारत छोड़कर किसी भी देश में ऋषि-मुनियों की परंपरा से जुड़ने का अवसर नहीं मिलेगा। हमारे पास लंबी विरासत-परंपरा है। सनातन धर्मावलंबी आश्रम व संतों-योगेश्वरों के साथ संवाद-संबंध जोड़कर परंपरा से रच-बस जाता है। उसे यहां परिवार, अपनत्व, अभिभावक का भाव दिखता है। ईश्वर के अवतार की भूमि भी सिर्फ भारत ही बनती है। धर्म जोड़ने का माध्यम है, लेकिन जातिवाद व्यवस्था को कमजोर करता है। गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि नाथ संप्रदाय की परंपरा हर काल खंड में धराधाम पर विराजमान है। संत, योगी, योगेश्वर सदैव अजर-अमर हैं। इनकी कृपा भक्तों व आस्थावान श्रद्धालुओं पर बरसती है। हम भी प्रयास करें क्योंकि देश, समाज, धर्म के लिए किया गया योगदान कभी व्यर्थ नहीं जाता। समाज को बांटने का पाप करने वाले को समझाएं और उसे दूर करने का प्रयास करें।

वीरों-वीरांगनाओं के बलिदान से बना है यह देश
सीएम ने वीरमदेव, कीर्ति चौहान आदि वीरों को याद करते हुए कहा कि यह देश वीरों व वीरांगनाओं के बलिदान से बना है। चित्तौड़गढ़ में रानी पद्मिनी ने हजारों वीरांगनाओं के साथ जौहर किया था। जालोर में भी अलाउद्दीन खिलजी और उसके बाद भी यह परंपरा देखने को मिली। सीएम ने सिरे मंदिर की बारीक कारीगरी, दुर्लभ कला, शिलालेखों का जिक्र करते हुए महाराजा मान सिंह के योगदान की भी चर्चा की।

पहले की सरकारों ने बांटा, मोदी जी ने देश को जोड़ा
सीएम योगी ने कहा कि भारतवासी समृद्ध विरासत के वारिस हैं, इसलिए इसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी हमारी होनी चाहिए। दुनिया में सर्वाधिक कामकाजी (56-60 फीसदी) लोग भारत में हैं, जो परिश्रम, पुरुषार्थ करते हैं। इनकी ताकत ही भारत की ताकत है। भारत पीएम मोदी के नेतृत्व में दुनिया की बड़ी ताकत बनने की ओर अग्रसर हुआ है। नेतृत्व पर निर्भर करता है कि ताकत का इस्तेमाल किस रूप में करता है। पहले की सरकारों ने बांटने पर विश्वास किया था तो हम जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम पर बंटे थे। कश्मीर व नक्सलवाद की समस्या, भाषाई विवाद, जातीय संघर्ष, अराजकता का तांडव था। शासन की सुविधाओं का लाभ गरीबों, दलितों, वंचितों, अतिपिछड़ों को नहीं मिलता था। मोदी जी ने देश को एक स्वर में जोड़ने का काम किया। कश्मीर, नक्सलवाद की समस्या का समाधान निकाला और गरीबों को बिना भेदभाव सुविधाएं और अधिकार दिलाए। ट्रेन, रोड, मेडिकल कॉलेज, एयरपोर्ट, मेट्रो, इंजीनियरिंग कॉलेज, आईआईएम, एम्स आदि संस्थाएं दीं।

पिछली सरकारें आस्था को अंधविश्वास मानती थीं, लेकिन मोदी जी ने कहा कि आस्था के बिना कोई समाज नहीं बढ़ सकता
सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकारें आस्था को अंधविश्वास मानती थीं, लेकिन मोदी जी ने कहा कि सनातन धर्म की आस्था भारत की आस्था है। आस्था के बिना कोई समाज आगे नहीं बढ़ सकता। इसके लिए उन्होंने कार्य भी प्रारंभ किया। राम मंदिर का निर्माण 1947, 1948, 19 49 या 19 50 में भी हो सकता था, लेकिन नहीं हुआ। हम अभिवादन में राम-राम कहते हैं, लेकिन पिछली सरकारें कहती थीं कि राम-कृष्ण हुए ही नहीं। जिसने राम को नकारा, उन्हें प्रभु ने भी ठुकरा दिया। अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो गया। जब 145 करोड़ जनशक्ति का भारत बोलता है तो 500 वर्ष की विकट समस्या का भी समाधान होता है। जब एकजुट होकर सोचेंगे, बोलेंगे और सामूहिक प्रयास करेंगे तो राम मंदिर जैसी सफलता प्राप्त होगी। काशी में काशी विश्वनाथ धाम बन गया। मथुरा-वृंदावन में भी ऐसी व्यवस्था चल रही है। बस करने की इच्छाशक्ति और मन में भाव होना चाहिए।

हम एकजुट होकर मुकाबला करते तो कोई भी आक्रांता भारत के सामने ठहर नहीं सकता
सीएम योगी ने कहा कि भारत की आस्था केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना का प्रज्ज्वलित दीप भी है। आस्था बनी रहेगी तो राष्ट्रीयता को भी ऊर्जा प्राप्त होती रहेगी। आस्था भारत को जोड़ती है। आस्था को बनाए रखने के लिए हमें उन कमियों को दूर करना होगा, जो हिंदू समाज को अतीत में गुलामी की ओर लेकर गईं थीं। जातिवाद, छुआछूत, दहेज प्रथा, बाल विवाह, नशे से दूर रहते हुए हमें देश और धर्म के हित में कार्य करना है। आक्रांता केवल लूटते ही नहीं थे। वे हमारी आस्था व माता-बहनों की इज्जत से खिलवाड़ और मठ-मंदिरों को नुकसान पहुंचाते थे। देश ने सैकड़ों वर्षों तक आक्रांताओं को झेला है। आक्रांता इतने मजबूत नहीं थे कि भारत पर हावी हो जाएं। हम विभाजित थे इसलिए वे हम पर हावी हो रहे थे। हम एकजुट होकर मुकाबला करते तो कोई भी आक्रांता भारत के सामने ठहर नहीं सकता था।

कार्यक्रम में महंत पीर गंगानाथ, तिजारा के विधायक महंत बालक नाथ, महंत नरहरि नाथ, महंत संध्यानाथ, महंत गिरिवर नाथ, महंत काशीनाथ, महंत रूपनाथ, महंत पंचमनाथ, महंत सुंदराई नाथ, महंत नारायण नाथ, महंत मंगलाई नाथ, महंत विक्रमनाथ, महंत अतराई नाथ, महंत योगी कमलनाथ आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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