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उत्तर प्रदेश

अयोध्या में राम मंदिर के 15 किमी दायरे में मांस बिक्री पर रोक, नॉन-वेज डिलीवरी पर भी लगी पाबंदी

अयोध्या
 यूपी की राम नगरी अयोध्या में अब 15 किलोमीटर के दायरे में मांसाहारी भोजन बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. धार्मिक मर्यादाओं के पालन को सख्ती से लागू करते हुए जिला प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया है. 

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रशासन ने राम मंदिर के 15 किलोमीटर के दायरे में गैर-शाकाहारी भोजन की होम डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. यह निर्णय ‘पंचकोसी परिक्रमा’ क्षेत्र में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के जरिए नॉन-वेज भोजन की आपूर्ति को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद लिया गया है.

15 किमी दायरे में नॉन-वेज डिलीवरी पर रोक 
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, हाल के महीनों में यह सामने आया था कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां प्रतिबंधित क्षेत्र में भी पर्यटकों और स्थानीय लोगों तक नॉन-वेज भोजन पहुंचा रही थीं. इसके अलावा कुछ होटल और होमस्टे द्वारा मेहमानों को न सिर्फ मांसाहारी भोजन बल्कि शराब परोसने की शिकायतें भी मिली थीं. इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने सभी संबंधित प्रतिष्ठानों को सख्त चेतावनी जारी की है.

मई 2025 में अयोध्या नगर निगम ने अयोध्या और फैजाबाद को जोड़ने वाले 14 किलोमीटर लंबे राम पथ पर मांस और शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था. हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते नौ महीनों में शराब बिक्री पर रोक का प्रभावी ढंग से पालन नहीं हो पाया. राम पथ पर अब भी दो दर्जन से अधिक शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं.

इस देरी पर प्रतिक्रिया देते हुए नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि राम पथ और फैजाबाद क्षेत्र में मांस की दुकानों को हटा दिया गया है, लेकिन शराब की दुकानों पर कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन की अनुमति आवश्यक होती है. इसी वजह से शराब बिक्री पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पाई है.

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि अयोध्या में यह फैसला बहुत अच्छा है. पहले से भी तीर्थ स्थलों पर इस तरह की पाबंदी लगाई गई है, जिसमें हरिद्वार, तिरुपति भी शामिल है. यहां पर मांस और शराब की बिक्री बंद है. अयोध्या वैसा ही पवित्र शहर है, इसलिए यहां पर शाकाहारी लोग रहें, यही उचित है.

पर्यटन नहीं, धार्मिक नगरी है अयोध्या
विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि अयोध्या एक पवित्र धार्मिक नगरी है और विश्व की सांस्कृतिक राजधानी है. मुझे लगता है कि इस धार्मिक नगरी में लोग पर्यटन की दृष्टि से नहीं आते हैं, बल्कि धार्मिकता की दृष्टि से आते हैं. अयोध्या में अनेक मठ मंदिर हैं. सभी मठ-मंदिरों में श्रद्धालु बड़े श्रद्धा भाव से दर्शन करते हैं. इस भाव और श्रद्धा को जब दुख पहुंचाया जाता है, तो बहुत गलत बात है.

उन्होंने कहा कि प्रशासन ने जो यह कदम उठाया है, इस कदम का हम स्वागत करते हैं. अयोध्या को मांस और मदिरा रहित करना चाहिए. इसका निर्णय पूर्व में ही लेना चाहिए, लेकिन पूर्व की सरकारें नहीं ले पाई. अयोध्या को धार्मिकता के आधार पर ही देखना चाहिए, ना कि पर्यटन की दृष्टि से देखना चाहिए. हम सब पहले भी मांग करते थे कि धार्मिक नगरी में इस तरह के कार्य को बंद किया जाए.

बिक्री वालों को डालें जेल के अंदर
संत विष्णु दास ने बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की नगरी अयोध्या में मांस पर प्रतिबंध लगाया गया है, यह बहुत अच्छी बात है. यहां पर जितने भी श्रद्धालु प्रभु राम और बजरंगबली के दर्शन कर रहे हैं, ऐसी स्थिति में जो रोक लगाया गया है, यह बहुत अच्छा फैसला है. साथ ही सभी तीर्थ स्थलों में मांस की बिक्री बंद होनी चाहिए. अगर कोई ऐसा करता हुआ पाया गया, तो उसको जेल की सलाखों के पीछे बंद कर देना चाहिए.

अयोध्या मर्यादा और संस्कृति की नगरी संत देवेशाचार्य ने बताया कि यह बहुत अच्छी बात है. अयोध्या के अंदर मांस पर प्रतिबंध करना बहुत अच्छी पहल है. अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की नगरी है. यहां पर संपूर्ण विश्व से श्रद्धालु आते हैं, उनको इस तरीके का दृश्य देखने को मिलता था, तो उनके हृदय को भी पीड़ा होती थी. यह मर्यादा की नगरी है, संस्कृति की नगरी है. अब यहां पर प्रतिबंध लगाया गया है, तो शासन-प्रशासन को बहुत बड़ा साधुवाद है, क्योंकि हम लोग बहुत दिनों से इसके लिए प्रयास भी करते थे.

पंचकोसी परिक्रमा क्षेत्र में ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म्स पर शिकंजा

इस बीच सहायक खाद्य आयुक्त मानिक चंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन माध्यम से नॉन-वेज फूड डिलीवरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं. उन्होंने कहा, 'शिकायतों के बाद ऑनलाइन नॉन-वेज फूड डिलीवरी पर प्रतिबंध लगाया गया है.

सभी होटल, दुकानदारों और डिलीवरी कंपनियों को इसकी सूचना दे दी गई है. नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जाएगी.' प्रशासन का कहना है कि अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए इस तरह के कदम जरूरी हैं. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.

 

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