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उत्तर प्रदेश

HC का अहम फैसला: अब ससुर से भी मेंटेनेंस ले सकती हैं बहुएं, जानिए क्या है शर्त

इलाहाबाद
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम और बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि हिन्दू विधवा महिलाएं अपने ससुर से भी गुजारा भत्ता की मांग कर सकती हैं। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह टिप्पणी की है कि पति का अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने का दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी बना रहता है। ऐसे में कोई भी विधवा अपने ससुर से भी भरण-पोषण की मांग कर सकती है। यानी हाई कोर्ट की शर्तों के अनुसार पति के गुजर जाने के बाद ही कोई विधवा अपने ससुर से भरण-पोषण भत्ता देने का दावा कर सकती है।

जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की पीठ ने अपने फैसले में कहा, "यह बात पूरी तरह से स्थापित है कि पति का अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने का दायित्व होता है। यह स्थिति उन मामलों से सामने आई है, जहाँ पति-पत्नी अलग हो गए हैं और पत्नी ने भरण-पोषण की मांग की है, चाहे वह आपराधिक मामलों के तहत हो या हिंदू कानून में भरण-पोषण के प्रावधानों के तहत। इतना ही नहीं, पत्नी का भरण-पोषण करने का पति का यह दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी कानूनन बना रहता है, जिससे विधवा को अपने ससुर से भरण-पोषण की मांग करने का अधिकार मिल जाता है।"

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने अपने आदेश में हालांकि किसी विशेष कानूनी प्रावधान का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन स्पष्ट किया कि 'हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956' की धारा 19 और 21 एक हिंदू विधवा को कुछ शर्तों के तहत अपने ससुर/उनकी संपत्ति से भरण-पोषण की मांग करने की इजाजत देती हैं।

मामला क्या?
दरअसल, हाई कोर्ट एक पति द्वारा दायर उस अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी पत्नी पर झूठी गवाही देने का मुकदमा चलाने की अनुमति मांगने वाले उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी ने भरण-पोषण की मांग करते हुए अपने लिखित बयानों में झूठे बयान दिए हैं। पति ने दावा किया कि उसकी पत्नी ने खुद को झूठे तौर पर एक गृहिणी के रूप में पेश किया, और यह बात छिपाई कि वह एक कामकाजी महिला है। उसने आगे आरोप लगाया कि उसके पास एक बैंक में 20 लाख रुपये से अधिक की कुल राशि वाली फिक्स्ड डिपॉज़िट रसीदें (FDRs) थीं, लेकिन उसने अपने हलफनामे में इस जानकारी को छिपा लिया।

विवाह के बाद बेटी का भरण पोषण करना बाप का दायित्व नहीं
याचिकाकर्ता ने पीठ को यह भी बताया गया कि वर्तमान में, FDR में लगभग 4 लाख रुपये जमा हैं और बाकी राशि उसने निकाल ली है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने शुरुआत में ही टिप्पणी की कि फैमिली कोर्ट का निष्कर्ष स्पष्ट है कि आवेदक-अपीलकर्ता/पति ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि प्रतिवादी-पत्नी कहीं कार्यरत है। पीठ ने कहा कि यह साबित करने का पूरा दायित्व पति पर ही था कि उसकी पत्नी कहीं नौकरी कर रही है; पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि पत्नी द्वारा यह कहने पर कि वह कहीं कार्यरत नहीं है, उसे किसी नकारात्मक बात को साबित करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पत्नी की वित्तीय संपत्तियों के संबंध में, कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि FDRs उसे उसके पिता द्वारा दी गई थीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एक पिता का अपनी बेटी के विवाह के बाद उसके भरण-पोषण का कोई दायित्व नहीं होता, सिवाय उस स्थिति के जब वह विधवा हो गई हो।

ससुर से गुजारा मांगने की क्या शर्तें?
इसके बाद हाई कोर्ट ने कहा, "हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम की धारा 19 के अनुसार, एक विधवा बहू अपने ससुर से गुजारा भत्ता तब तक मांग सकती है, जब तक कि वह अपनी खुद की कमाई या अपनी खुद की संपत्ति से अपना गुजारा करने में असमर्थ हो। इसमें कहा गया है कि विधवा अपने ससुर से तभी संपर्क कर सकती है, जब वह अपने मृत पति की संपत्ति से, अपने माता-पिता की संपत्ति से, या अपने बच्चों और उनकी संपत्ति से गुजारा भत्ता पाने में पूरी तरह से असमर्थ हो।" कोर्ट ने ये भी कहा कि गुजारा भत्ता देने की यह जिम्मेदारी तब लागू नहीं होती, जब ससुर के पास अपनी हिस्सेदारी वाली या पुश्तैनी संपत्ति से (जो उसके कब्ज़े में हो) भुगतान करने के साधन न हों; विशेष रूप से ऐसी संपत्ति से, जिसमें से बहू को पहले ही कोई हिस्सा मिल चुका हो। कोर्ट ने ये भी कहा कि बहू के पुनर्विवाह करने पर यह जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है।

 

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