<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
उत्तर प्रदेश

सुप्रीम कोर्ट की मेरठ पर फटकार से लखनऊ की खुली पोल, शहर में 30 हजार अवैध भवन

लखनऊ
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सोमवार को लोकेश कुमार की याचिका की सुनवाई करते हुए मेरठ में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण पर चिंता जताने साथ ही अथॉरिटी को फटकार भी लगाई है।

यह खबर राजधानी में लखनऊ विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद की आंखें खोलने वाली है। साथ ही ताबड़तोड़ अवैध निर्माण करने वालों को डराने वाली भी है, क्योंकि भविष्य में यदि ऐसा आदेश लखनऊ के लिए हुआ तो क्या होगा? जवाब है 30 हजार से अधिक इमारतें और 241 आवासीय कॉलोनियां अवैध बनी हैं।

अवैध आवासीय व व्यावसायिक निर्माण रोकने के लिए मेरठ का प्रकरण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जबकि लखनऊ में ही ऐसा ही कदम उठाया जा चुका है। दिसंबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के तत्कालीन मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की खंडपीठ ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अशोक कुमार की याचिका समेत चार अन्य याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए बहुमंजिला इमारतों के अवैध निर्माण के मामले में एलडीए से जवाब तलब किया था।

हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में पूरे शहर की बदतर स्थिति विस्तार से बताई गई थी। राजधानी की तमाम बहुमंजिला इमारतें अवैध तरीके से बनाई गई हैं। इनमें से कुछ में स्वीकृति से ज्यादा मंजिलें बना दी गईं तो कई में अवैध निर्माण किया गया।

एलडीए ने कुछ की पहचान तो की है, लेकिन बड़े भवनों को ध्वस्त नहीं किया गया। अवैध निर्माण में अधिकारियों की मिलीभगत है, लेकिन इनके खिलाफ अभी तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। उस समय शहर में करीब 12500 अवैध निर्माण होने का दावा किया गया था, इनमें अपार्टमेंट, कांप्लेक्स, रो हाउसेस, प्लाटिंग सोसाइटी शामिल हैं।

241 अवैध आवासीय कॉलोनियां चिन्हित
शासन-प्रशासन ने इन पर अंकुश लगाने के लिए आदेश दिए, मगर हुआ कुछ नहीं। होटल लेवाना सुइट्स अग्निकांड के बाद इनकी रफ्तार और बढ़ गई। इसके लिए प्रवर्तन के इंजीनियर व अफसर जिम्मेदार हैं। आवासीय भूखंडों पर सबसे ज्यादा होटल गोमती नगर, शहीद पथ के किनारे व गोमतीनगर विस्तार में बने हैं। एलडीए की सीलिंग के बावजूद ये इमारतें गुपचुप तरीके से बनकर तन गईं। इन पर कभी एलडीए का बुलडोजर नहीं चल सका। इस पर प्रभावी आदेश नहीं हो सका।

इधर चार साल में अवैध भवन बनने की रफ्तार बढ़ गई यही वजह है कि अवैध भवनों का ग्राफ करीब 30 हजार तक पहुंच चुका है। लगभग ढाई हजार से अधिक नोटिस अवैध निर्माण करने वालों को दिए गए हैं। ऐसे ही 241 अवैध आवासीय कॉलोनियां चिन्हित हैं।

राजधानी में अवैध निर्माण का ताजा प्रकरण अलीगंज के अवैध व्यावसायिक कांप्लेक्स में आग लगने के बाद सामने आई है। घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गूगल स्ट्रीट व्यू तकनीक का उपयोग करके सिर्फ अलीगंज क्षेत्र में 51 अवैध निर्माण खोजा था।

उसी समय एलडीए ने शहर में 101 अवैध भवनों को गिराने की कार्यवाही जल्द शुरू करने का दावा किया लेकिन, अब तक यह शुरू नहीं हो सकी है। वहीं, एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार स्वीकार कर चुके हैं कि राजधानी में सिर्फ छह प्रतिशत के पास ही वैध नक्शे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button