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मध्यप्रदेश

इंदौर ने जगाई हजारों आंखों की रोशनी, 16 साल में 19 हजार कॉर्निया दान कर बनाया रिकॉर्ड

इंदौर
 अंगदान के क्षेत्र में देश में पहचान बना चुका इंदौर अब नेत्रदान में भी मिसाल कायम कर रहा है। शहरवासियों की पहल से पिछले 16 वर्षों में करीब 19 हजार कार्निया एकत्र किए गए हैं। इनमें से कई कार्निया मध्य प्रदेश के अलावा देश के दूसरे शहरों के जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे हैं। इनके माध्यम से दृष्टिहीनता से जूझ रहे लोग फिर से दुनिया और अपने प्रियजनों को देख पा रहे हैं। नेत्रदान की इस मुहिम को आगे बढ़ाने में मुस्कान ग्रुप परमार्थिक ट्रस्ट और एमके इंटरनेशनल आई बैंक की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

आठ लोगों से शुरू हुआ कारवां
इंदौर में करीब 32 वर्ष पहले आठ लोगों ने द्वारकापुरी क्षेत्र की एक गरीब परिवार की कन्या के विवाह में सहयोग के लिए पहल की थी। धीरे-धीरे यह प्रयास व्यापक सामाजिक सेवा अभियान में बदल गया और इसी से मुस्कान ग्रुप की नींव मजबूत हुई। वर्ष 2002 में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधीर महाशब्दे और डॉ. सुहास बांडे ने इंदौर में नेत्रदान को बढ़ावा देने के प्रयास शुरू किए।

16 साल में डोनेट कराए 19000 कॉर्निया
मुस्कान ग्रुप के सदस्य जीतू बागानी, संदीपन आर्य और अन्य सदस्यों ने वर्ष 2002 में कालानी नगर निवासी एक व्यक्ति के निधन के बाद उनका कॉर्निया दान करवाया। यही पहल आगे चलकर नियमित अभियान में बदल गई। ग्रुप के सहयोग से 2010 से 2026 तक करीब 19 हजार कॉर्निया एकत्र किए जा चुके हैं। इसमें सामान्य मृत्यु के साथ ब्रेन डेड अंगदानियों के कॉर्निया भी शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में 2237 और वर्ष 2025 में 2748 कार्निया एकत्र किए गए। इससे स्पष्ट है कि शहर में नेत्रदान के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर का आई बैंक भी बना
इंदौर में वर्ष 2010 में एमके इंटरनेशनल आई बैंक की शुरुआत हुई। इसके संस्थापक संपत झंवर ने नेत्रदान को व्यवस्थित स्वरूप देने और जरूरतमंदों तक कार्निया पहुंचाने के उद्देश्य से इसकी स्थापना की। आई बैंक का शुभारंभ तत्कालीन राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने इंदौर में किया था। यहां एकत्र कार्निया को केवल इंदौर या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि आवश्यकता के अनुसार देश के विभिन्न शहरों में भी भेजा जाता है। इस तरह इंदौर में किया गया नेत्रदान दूसरे शहरों के लोगों के जीवन में भी रोशनी लौटा रहा है।

 

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