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मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में मानसून का 89.3% कोटा पूरा, 21 सितंबर तक बारिश के आसार

भोपाल 

मध्य प्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम पड़ाव में है। सीजन खत्म होने में महज 11 दिन बाकी हैं और प्रदेश में अब तक 33.2 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का 89.3 प्रतिशत है। यानी करीब 4.1 इंच पानी की कमी अभी बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार दिन प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद महीने के आखिरी सप्ताह में किसी मजबूत मौसम प्रणाली के सक्रिय होने पर कुछ जिलों में तेज बारिश हो सकती है। इससे प्रदेश बारिश के सामान्य आंकड़े के करीब पहुंच सकता है ।हालांकि, सभी जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य तक पहुंचना आसान नहीं होगा। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश की कमी बनी है। इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर में अभी सामान्य बारिश का 80 प्रतिशत पानी भी नहीं गिरा है। इन जिलों में सामान्य आंकड़ा पूरा करने के लिए मानसून के बचे दिनों में लगातार बारिश की जरूरत होगी। वहीं, मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य से दोगुने से अधिक पानी गिर चुका है।

37 जिलों में अभी सामान्य से कम बारिश
प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज हो चुकी है। इसके उलट बाकी 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है।प्रदेश की सामान्य मानसूनी बारिश 37.3 इंच है। इस लिहाज से सामान्य आंकड़ा पूरा करने के लिए अब करीब 4.1 इंच बारिश की जरूरत है।

मऊगंज और निवाड़ी में दोगुने से ज्यादा पानी
दूसरी ओर, प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश सामान्य आंकड़े से काफी आगे निकल चुकी है। मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य कोटे की तुलना में दोगुनी बारिश हो चुकी है। यानी जहां कुछ जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं इन जिलों में सामान्य से काफी ज्यादा पानी गिर चुका है।

इन जिलों में सामान्य या ज्यादा बारिश
प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है।

इसके अलावा प्रदेश के 37 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। अब मानसून के अंतिम 11 दिन इन जिलों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो कई जिलों का बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच सकता है।

22 सितंबर तक होगी हल्की बारिश
मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, अगले चार दिन यानी 22 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर बना रह सकता है। पश्चिमी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय होने से कुछ जिलों में बारिश हो रही है। वहीं, 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। इसके असर से प्रदेश में मौसम में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है।

जून की कमी अब तक पूरी नहीं हुई
इस मानसून में सबसे बड़ी कमी जून में रही। जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून में दो बार ब्रेक आया और कई दिन बारिश थमी रही। जुलाई और अगस्त में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो गया, लेकिन जून की कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। सितंबर में बारिश होने के बावजूद पूरे मानसून में अब तक करीब 7 प्रतिशत की कमी बनी हुई है।

22 सितंबर तक हल्की बारिश का दौर मौसम विभाग ने अगले चार दिन यानी, 22 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, इस समय पश्चिमी हिस्से में एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम (चक्रवात) एक्टिव है। इस वजह से पश्चिमी हिस्से के जिलों में बारिश का दौर बना हुआ है।

19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा–उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। इस सिस्टम से एमपी के मौसम में एक और बदलाव का आधार बन सकती है।

जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई।

आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और फिर अगस्त का भी कोटा फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह है कि अब तक भी प्रदेश में 7 प्रतिशत कम पानी गिरा है।

प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।

भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था।

इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।

 

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