<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
छत्तीसगड़

छत्तीसगढ़: अरपा भैंसाझार परियोजना में मुआवजा वितरण पर विवाद, 11 एसडीएम पर लगे गंभीर आरोप

बिलासपुर.

अरपा भैंसाझार परियोजना में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। परियोजना के दस्तावेजों की विस्तृत जांच में तत्कालीन 11 एसडीएम द्वारा नियमों के विपरीत मुआवजा वितरण किए जाने का मामला सामने आया है।

प्रारंभिक जांच में लगभग 27 करोड़ रुपये की गड़बड़ी उजागर होने के बाद अब संभागायुक्त ने मामले की दोबारा जांच के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की है। जांच समिति में संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर और राजस्व विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई ईडी द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर की गई है। दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि परियोजना से प्रभावित 104 गांवों में से 75 गांवों में भूमि अर्जन और मुआवजा वितरण के दौरान कई मामलों में नियमों की अनदेखी की गई। आरोप है कि भूमि के प्रकार, पात्रता और मूल्यांकन में त्रुटियां करते हुए कई लोगों को गलत तरीके से अधिक मुआवजा दिया गया। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, तत्कालीन एसडीएम स्तर के अधिकारियों द्वारा स्वीकृत कई प्रकरणों में वित्तीय अनियमितताएं हुईं।

प्रारंभिक कार्रवाई के तहत अब तक केवल एक अधिकारी को निलंबित किया गया है, जबकि अन्य अधिकारियों को राहत मिलने पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों के नाम सामने आने के बावजूद सीमित कार्रवाई को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। नई गठित समिति को मुआवजा वितरण, भूमि अर्जन की प्रक्रिया, फसलों के मूल्यांकन, प्रभावित किसानों की पात्रता, रिकॉर्ड में किए गए संशोधन, बाउंड्री निर्धारण तथा राजस्व अभिलेखों में हुई प्रविष्टियों की बिंदुवार जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही।

अरपा भैंसाझार परियोजना बिलासपुर जिले की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में शामिल है। ऐसे में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद पूरे मामले पर प्रशासनिक और राजनीतिक नजरें टिक गई हैं। अब सभी की निगाहें चार सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पर हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि अनियमितताओं के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है, और दोषियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button