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देश

आयुर्वेद शिक्षा में बदलाव, आधुनिक शोध से जुड़ेगी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति

 पटना
 आयुर्वेद शिक्षा को नई दिशा देने के लिए देश में पांच आयुर्वेद महाविद्यालयों को आयुर्वेद गुरुकुल के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही एमबीबीएस पाठ्यक्रम में आयुर्वेद का मौलिक ज्ञान भी शामिल करने की तैयारी है, ताकि आधुनिक चिकित्सा पद्धति के विद्यार्थी आयुर्वेद की मूल अवधारणाओं से परिचित हो सकें। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआइएसएम) की चेयरपर्सन डॉ. मनीषा कोटेकर ने कहीं।

वह रविवार को ज्ञान भवन में राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं अस्पताल, पटना के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद महाविद्यालयों को निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित करने के साथ शिक्षा और चिकित्सा में वैज्ञानिकता एवं गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षण माड्यूल में आयुर्वेद को शामिल करने की दिशा में भी पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के वर्तमान 14 विषयों को आवश्यकता और वैज्ञानिक आधार के अनुसार भविष्य में और विस्तार दिया जाएगा।

आयुर्वेद शिक्षा को शोध और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को केवल पारंपरिक चिकित्सा पद्धति तक सीमित न रखकर इसके वैज्ञानिक पक्ष को भी मजबूती से सामने लाने की जरूरत है।

इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ एनसीआइएसएम की चेयरपर्सन डॉ. मनीषा कोटेकर, बिहार स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव डॉ. एसएम त्यागराजन, अपर सचिव शंभू शरण, कार्यपालक निदेशक आलोक कुमार, महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. कुमारी उमा पांडेय, अधीक्षक डॉ. शिवादित्य ठाकुर, आयुर्वेद निदेशक डॉ. वरुण कुमार, आयोजन समिति के सचिव डॉ. अरविंद चौरसिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर पर डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. आशुतोष कुमार, डॉ. रोहित रंजन, डॉ. सुशील कुमार झा, डॉ. रमन रंजन, डॉ. एसएस गुप्ता, डॉ. दीपाली सुंदरी वर्मा, डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह भी मौजूद रहे।

अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर
बिहार स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव डॉ. एसएम त्यागराजन ने आयुर्वेद के शिक्षक, विद्यार्थी और चिकित्सक की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के विकास के लिए बेहतर शिक्षा के साथ गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देना जरूरी है।

डाक विभाग के निदेशक ने आयुर्वेद चिकित्सा के महत्व और इसकी व्यापक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। शताब्दी समारोह के अवसर पर डाक विभाग की ओर से विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया।

हर दिन मरीजों को इलाज और जांच की सुविधा
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. शिवादित्य ठाकुर ने कहा कि अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। मरीजों को आवश्यक जांच और दवाएं उपलब्ध कराने के साथ बेहतर उपचार देने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मरीज यहां परेशानी के साथ आते हैं, लेकिन स्वस्थ होने के भरोसे के साथ लौटते हैं और बड़ी संख्या में मरीजों को उपचार से लाभ भी मिल रहा है।

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. कुमारी उमा पांडेय ने स्वागत भाषण में शताब्दी समारोह के उद्देश्य और संस्थान की गौरवशाली यात्रा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन रूपम त्रिविक्रम ने, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रभात कुमार द्विवेदी ने किया।

100 से अधिक पूर्व प्राचार्य और विद्वान सम्मानित
शताब्दी समारोह के दौरान आयुर्वेद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 100 से अधिक पूर्व प्राचार्यों, मूर्धन्य विद्वानों और विशिष्ट पूर्ववर्ती छात्रों को सम्मानित किया गया। समारोह के दूसरे सत्र में पूर्ववर्ती छात्र मिलन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश से आए 600 से अधिक पूर्ववर्ती छात्रों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्ववर्ती छात्र संघ के अध्यक्ष डॉ. देवव्रत नारायण सिंह ने किया। महासचिव डॉ. अरुण कुमार सिंह ने संघ की गतिविधियों और कार्यों की जानकारी दी
नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश और मारीशस के विशेषज्ञों ने की शोध पर चर्चा

समारोह में वैज्ञानिक सत्र के तहत गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश और मारीशस के चिकित्सकों ने भाग लिया।

विशेषज्ञों ने आयुर्वेद के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध को बढ़ावा देने, विभिन्न देशों के बीच ज्ञान और अनुभव साझा करने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आयुर्वेद चिकित्सा को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।

शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों के साथ पूर्ववर्ती छात्रों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इससे शताब्दी समारोह का समापन यादगार माहौल में हुआ।

देश-विदेश से पहुंचे पूर्ववर्ती छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए और संस्थान से जुड़ी पुरानी यादों को ताजा किया। इस दौरान महाविद्यालय के पूर्व छात्रों के योगदान और उनकी उपलब्धियों पर भी चर्चा हुई।

 

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