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देश

अब दौड़ेगी स्वदेशी बुलेट ट्रेन B-28! E-10 की देरी के बीच सरकार का बड़ा ऐलान, जानें रूट और रफ्तार

नई दिल्ली

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने तस्वीर साफ कर दी है कि अगले साल से हाई स्पीड रेल पटरी पर जरूर दौड़ेगी. जब तक जापान से E10 सीरीज की शिंकानसेन ट्रेन मिलने में देरी के कारण भारत 2027 से अपनी देसी बुलेट ट्रेन B-28 हाई स्पीड ट्रैक पर दौड़ाएगा. सूत्रों के अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना को लेकर भारत और जापान के बीच बातचीत अच्छी प्रगति पर है. जापान ने परियोजना के लिए नई पीढ़ी की E10 सीरीज हाई स्पीड ट्रेन देने पर सहमति जताई है, लेकिन E10 सीरीज ट्रेन अभी डेवलपमेंट के स्टेज में है. ये ट्रेनें 2030 के शुरुआती वर्षों में भारत को मिलने के आसार हैं। 

    B-28 का निर्माण कार्य बेंगलुरु में बीईएमएल कर रहा
    8 कोच की इस ट्रेन में 560 यात्रियों के बैठने की क्षमता
    250 से 280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार इस बुलेट ट्रेन की

भारत में बुलेट ट्रेन कब चलेगी
बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार ने सूरत से बिलिमोरा तक इसका पहला सेक्शन 15 अगस्त 2027 में शुरू करने की योजना बनाई है. चूंकि E10 सीरीज ट्रेन 2030 के बाद उपलब्ध होगी, इसलिए भारत और जापान ने शुरुआती संचालन भारतीय हाई स्पीड ट्रेन से शुरू करने पर मुहर लगाई है. इसका उद्देश्य है कि परियोजना को बिना देरी के जल्द से जल्द यात्रियों के लिए शुरू किया जा सके. दोनों देशों की तैयारी है कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना का संचालन जल्द शुरू हो और यात्रियों को इसका लाभ मिले। 

मेड इन इंडिया बुलेट ट्रेन क्या है
रिपोर्ट के अनुसार, भारत खुद की डिजाइन की गई मेड इन इंडिया बुलेट ट्रेन का इस्तेमाल करेगा. जापान 2030 से पहले भारत को E10 शिन्कान्सेन ट्रेनें उपलब्ध नहीं करा सकता, ऐसे में यह फैसला लिया गया है. जापान अभी तक E10 ट्रेनों, सिग्नलिंग सिस्टम और ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (OCC) सिस्टम के लिए फाइनल ऑफर नहीं दे पाया है, क्योंकि यह ट्रेन अभी भी जापान में डिजाइनिंग के चरण में है। 

जापान की बुलेट ट्रेन की स्पीड
जापान में पुरानी E5 सीरीज की ट्रेनों को धीरे-धीरे हटाया जा रहा है. ताइवान और दक्षिण कोरिया के अनुभवों और फिजिबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर भारत ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के पहले सेक्शन को 15 अगस्त 2027 तक शुरू करने का ऐलान किया है. अगर भारत जापान की E10 ट्रेन का इंतजार करेगा तो प्रोजेक्ट 2034 तक खिंच सकता है. लिहाजा हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट को अभी भारत में तैयार ट्रेनों से ही समय पर चलाने का फैसला दोनों देशों ने लिया है. जापान की बुलेट ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं। 

मेक इन इंडिया के B-28 कोच
मेक इन इंडिया के तहत रेलवे देश में ही हाई स्पीड ट्रेन B-28 के कोच बना रहा है. इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) के साथ मिलकर 280 किमी प्रति घंटे की स्पीड वाली स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन सेट डिजाइन और सेट तैयार हो रहे हैं. इससे देश में भविष्य के हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए जरूरी टूलिंग, टेस्टिंग और प्रोडक्शन का की राह खुलेगी. भारतीय कंपनियां हाई स्पीड रेल के जरूरी पुर्जे, निर्माण के उपकरण और स्लैब ट्रैक सिस्टम भी बना रही हैं. बेंगलुरु में आदित्य नाम के स्पेशल कॉम्प्लेक्स में B-28 कोच बनाए जा रहे हैं. IIT संस्थानों की रिसर्च, ट्रेनिंग और जापानी इंजीनियरिंग के जरिये भारत की हाई स्पीड रेल आत्मनिर्भर हो रही है। 

सिग्नलिंग सिस्टम में बदलाव 
भारत की अपनी बुलेट ट्रेन अब यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ETCS) के इंटरनेशनल सिग्नलिंग सिस्टम पर चलेगी. ऐसा सिस्टम दक्षिण कोरिया, यूरोपीय देशों, ताइवान, चीन में भी इस्तेमाल होता है. रैपिड रेल यानी नमो भारत ट्रेन भी भी इसी सिस्टम पर चलती है। 

इंडिया शिन्कान्सेन पर सवाल 
दरअसल, जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और पूर्व न्याय मंत्री ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए थे. उन्होंने दावा किया कि भारत के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई. उन्होंने कहा था कि सिग्नलिंग सिस्टम से जापान को बाहर कर देना 'इंडिया शिन्कान्सेन' की नाकामी को दिखाता है. लेकिन सच्चाई ये है कि 508 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट में सिविल कंस्ट्रक्शन का काम भारत पहले से खुद कर रहा था. अब जापान से ट्रेन और सिग्नलिंग न लेकर भारत अपने दम पर स्वदेशी बुलेट ट्रेन तकनीक से इसे 2027 तक ट्रैक पर लाने की तैयारी में है। 

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