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स्वस्थ-जगत

सोनाली चिकन: ब्रायलर और देसी मुर्गे के बीच का नया हेल्दी विकल्प

 आज के समय में चिकन की काफी डिमांड है क्योंकि नॉनवेजिटेरियन लोगों के लिए वो एक प्रोटीन का अच्छा सोर्स है. मार्केट में चिकन की बढ़ती कीमतों और ब्रायलर चिकन के बारे में सोशल मीडिया पर आए दिन आ रही खबरों के कारण अक्सर लोग कुछ नए ऑपशंस की तलाश में रहते हैं. यदि आप नॉनवेज के शौकीन हैं तो बाजार में इन दिनों एक ऐसे चिकन की चर्चा है जिसका नाम सुनते ही लोग काफी शॉक होते हैं. हम बात कर रहे हैं 'सोनाली चिकन' की. इसके नाम के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है.

यदि आप भी चिकन खाने के शौकीन हैं और हेल्थ के साथ समझौता किए बिना बजट में बेस्ट स्वाद चाहते हैं तो सोनाली चिकन आपके लिए सबसे सही चॉइस हो सकता है. इसका कारण है कि यह चिकन न केवल दिखने में बल्कि स्वाद में भी पूरी तरह देसी मुर्गे जैसा होता है लेकिन इसकी कीमत काफी कम होती है. तो आइए जानते हैं ये चिकन की कौन सी ब्रीड है और देसी चिकन की तुलना में कितनी फायदेमंद है.

क्या है सोनाली चिकन ब्रीड?
इस अनोखी ब्रीड के मुर्गों के पंख सुनहरे-पीले और चमकीले होते हैं जो देखने में बिल्कुल सोने की तरह चमकते हैं. इसी गोल्डन वाइब के कारण इसका नाम सोनाली रखा गया है.

सोनाली चिकन कोई साधारण ब्रीड नहीं है बल्कि यह रोड आइलैंड रेड (RIR) और फायौमी (Fayoumi) मुर्गों का एक स्पेशल क्रॉस-ब्रीड है. इस ब्रीड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से नेचुरल और देसी चिकन की तरह फील देता है. जहां एक तरफ नॉर्मल ब्रायलर चिकन के पेट और स्किन के पास काफी ज्यादा फैट जमा होता है वहीं सोनाली चिकन में एब्डोमिनल फैट (पेट की चर्बी) न के बराबर होता है.

फैट न होने के कारण इसके मांस को लीन और हाई-क्वालिटी का माना जाता है. कम फैट होने के कारण जिम जाने वाले और अपनी फिटनेस को लेकर अलर्ट रहने वाले लोग इसे काफी पसंद करते हैं.

सोनाली चिकन के न्यूट्रिशन
रोड आइलैंड रेड + फेयूमी के क्रॉस ब्रीड सोनाली चिकन की 100 ग्राम मात्रा में कपरीब 165-175 कैलोरीज होती हैं. इसके अलावा 20-23 ग्राम प्रोटीन, 7-9 ग्राम कुल फैट, सैचुरेट फैट-2-2.5 ग्राम, कोलेस्ट्रॉल 70-80 मिग्रा, आयरन 1.2-1.5 मिग्रा, कैल्शियम 10-15 मिग्रा, विटामिन बी12- 0.3-0.5 मिग्रा होता है.

सोनाली मुर्गी के अंडे में प्रति अंडा (50g) 70-75 कैलोरी, 6-7 ग्राम प्रोटीन, फैट 5 ग्राम होता है. यदि मुर्गी को कीड़े-मकोड़े खिलाए जाएं तो अंडों में प्रोटीन और बढ़ जाता है. 3 महीने में मांस के लिए और 4 महीने बाद अंडे देना शुरू करती है.

क्या कहती है रिसर्च?
पबमेड सेंट्रल (PMC) में पब्लिश्ड रिसर्च के अनुसार, सोनाली चिकन का मीट ब्रायलर के मुकाबले इंसानी शरीर के लिए ज्यादा बेहतर पाया गया है. रिसर्च में देखा गया कि सोनाली चिकन खाने से ब्लड में कुल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स लेवल को कंट्रोल रखने में काफी मदद मिलती है जिससे हार्ट हेल्थ बेहतर रहती है और हार्ट की बीमारियों का जोखिम भी कम होता है.

सोनाली चिकन में खतरनाक लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाले फैक्टर्स बहुत कम होते हैं. डॉक्टरों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि कम फैट और बेहतर लिपिड प्रोफाइल की वजह से यह चिकन दिल की बीमारियों और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए ब्रायलर के मुकाबले एक सेफ चॉइस है.

कैसे तैयार होती है ये ब्रीड?
रिपोर्ट के मुताबिक, सोनाली चिकन सिर्फ खाने वालों के लिए ही नहीं बल्कि इसे पालने वाले किसानों के लिए भी फायदे का सौदा साबित हो रहा है. यह ब्रीड भारत और बांग्लादेश के गर्म और ट्रॉपिकल क्लाइमेट में बहुत आसानी से सरवाइव कर लेती है.

ब्रायलर मुर्गों की तुलना में इन्हें बहुत ज्यादा केयर, महंगी दवाओं या स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती. हालांकि, इनका ग्रोथ रेट ब्रायलर से थोड़ा धीमी होता है और इन्हें तैयार होने में करीब 60 दिन का समय लगता है. लेकिन मार्केट में इनकी अच्छी और स्टेबल कीमत मिलने के कारण किसानों का नेट प्रॉफिट मार्जिन काफी ज्यादा रहता है.

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