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स्वस्थ-जगत

मोबाइल बंद करें, दिमाग को राहत दें: टेंशन कम, मेमोरी बढ़े

 नई दिल्ली

आज की भागती-दौड़ती दुनिया में हमारा दिमाग हर समय फोन, टीवी, कंप्यूटर और आसपास के शोर से भरा रहता है. लेकिन वैज्ञानिकों ने अब एक बहुत सरल और मुफ्त तरीका खोज निकाला है जो दिमाग को नया जीवन दे सकता है. बस डिवाइस बंद कर दो और दो घंटे पूरी तरह शांति में बैठ जाओ। 

न्यूरोसाइंटिस्ट्स कहते हैं कि पूरी शांति दिमाग की सेल्स को रिजनरेट करती है. यह प्रोसेस दिमाग को इतना मजबूत बनाती है कि याद्दाश्त बेहतर होती है. रोजमर्रा की भावनाएं भी संतुलित रहती हैं. आधुनिक जीवन में हर समय डिजिटल चैटर और शोर रहता है. इससे हमारा नर्वस सिस्टम थक जाता है क्योंकि दिमाग लगातार सेंसरी इनफॉर्मेशन प्रोसेस करता रहता है। 

लेकिन जब हम डिवाइस बंद करके पूरी तरह शांति चुनते हैं तो दिमाग को आराम मिलता है. शांति में शरीर की सारी ऊर्जा दिमाग के अंदर हिप्पोकैंपस नाम के हिस्से की तरफ जाती है. हिप्पोकैंपस वह जगह है जहां नई ब्रेन सेल्स बनती हैं. शांति इन नई सेल्स को पोषण देती है ताकि वे जीवित रहें और पुराने नर्व नेटवर्क में जुड़ जाएं। 

ड्यूक यूनिवर्सिटी का रिसर्च क्या कहता है?
ड्यूक यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने हाल ही में एक बड़ा अध्ययन किया. उन्होंने पाया कि रोजाना सिर्फ दो घंटे की पूरी शांति दिमाग में गहरे बदलाव लाती है. इस दौरान दिमाग अपनी सारी ऊर्जा हिप्पोकैंपस में लगाता है. वहां तेजी से नई ब्रेन सेल्स बनने लगते हैं. शोर की वजह से ये नई सेल्स मर जाती हैं लेकिन शांति में वे सुरक्षित रहती हैं। 

दिमाग का हिस्सा बन जाती हैं. यह प्रोसेस न्यूरोजेनेसिस कहलाता है. न्यूरोजेनेसिस लंबी याद्दाश्त को मजबूत करता है और रोज की भावनाओं को नियंत्रित रखता है। 

जब हम बैकग्राउंड म्यूजिक या नॉइज सुनते रहते हैं तो दिमाग को सिर्फ टेम्पररी उत्तेजना मिलती है लेकिन असली फायदा नहीं होता. शांति इन नई ब्रेन सेल्स को बचाती है. उन्हें स्थाई रूप से जोड़ती है. इससे दिमाग में सेलुलर डैमेज की मरम्मत होती है. शांति एक नेचुरल रीसेट बटन की तरह काम करती है. इससे कॉग्निटिव हेल्थ यानी सोचने-समझने की क्षमता सुधरती है. मानसिक ताकत बढ़ती है। 

कैसे अपनाएं पूरी शांति का तरीका?
यह तरीका बहुत आसान है. रोजाना दो घंटे फोन, टीवी और कंप्यूटर बंद रखो. कमरे में अकेले बैठो जहां कोई आवाज न हो. शुरू में थोड़ा मुश्किल लग सकता है लेकिन धीरे-धीरे दिमाग खुद शांति का आदी हो जाएगा. इससे दिमाग की सेल्स रिजनरेट होंगी, मेमोरी बढे़गी और रोजमर्रा का तनाव कम होगा। 
वैज्ञानिक कहते हैं कि यह छोटा बदलाव लंबे समय तक दिमाग को स्वस्थ और मजबूत रख सकता है. आजकल हर कोई व्यस्त है लेकिन शांति का यह साधारण तरीका बिना किसी खर्च के दिमाग को नया जीवन दे सकता है। 

न्यूरोसाइंटिस्ट्स का मानना है कि शांति सिर्फ आराम नहीं बल्कि दिमाग की बायोलॉजिकल मरम्मत है. अगर हम इसे अपनी आदत बना लें तो हमारा दिमाग ज्यादा स्वस्थ, ज्यादा याद रखने वाला और ज्यादा खुश रहेगा। 

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