<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
धर्म/ज्योतिष

घर के मुख्य द्वार की चरमराहट भी हो सकती है वास्तु दोष, जानें कारण और उपाय

वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार (Main Door) को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है.  यह केवल हमारे घर में आने-जाने का रास्ता नहीं है, बल्कि सुख, समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी का प्रवेश द्वार भी है.  लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि आपके घर का मुख्य दरवाजा खुलते या बंद होते समय अजीब सी चरमराने या चर-चर की आवाज करता है?

यदि हां, तो इसे केवल एक तकनीकी समस्या या कब्जों (hinges) का सूखापन समझकर नजरअंदाज न करें.  वास्तु विज्ञान के अनुसार, मुख्य दरवाजे से आने वाली यह कर्कश आवाज एक गंभीर वास्तु दोष है, जो आपकी तरक्की की राह में रोड़ा अटका सकती है.  आइए जानते हैं इसके पीछे का वास्तु कनेक्शन और इसे दूर करने के बेहद आसान उपाय.

दरवाजे से आने वाली आवाज का वास्तु कनेक्शन
वास्तु शास्त्र के अनुसार, मुख्य द्वार से आने वाली कोई भी कर्कश या तीखी आवाज घर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) के प्रवेश का संकेत देती है.  इसके कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

राहु दोष की दस्तक: दरवाजे से आने वाली कर्कश आवाज कुंडली में राहु-केतु के अशुभ प्रभाव को बढ़ाती है. इससे घर में अचानक कोई दुर्घटना होने की आशंका रहती है या कानूनी खर्चे बढ़ सकते हैं.

धन की हानि (कंगाली का संकेत): माना जाता है कि जिस घर का मुख्य दरवाजा आवाज करता है, वहां पैसा आता तो है पर पानी की तरह बह जाता है.  बरकत रुक जाती है और यह दोष धीरे-धीरे घर में दरिद्रता लाने का कारण बनता है.

मानसिक तनाव और गृह क्लेश: सुबह-शाम दरवाजे की यह आवाज सीधे हमारे अवचेतन मन पर बुरा असर डालती है.  इससे घर के सदस्यों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन आता है, जिससे बिना बात के आपसी झगड़े और मानसिक तनाव का माहौल बना रहता है.

तुरंत करें ये अचूक वास्तु उपाय
अगर आपके घर के दरवाजे से भी ऐसी आवाज आती है, तो सबसे पहले उसमें तेल या मोबिल ऑयल डालकर उसकी आवाज को तुरंत ठीक करें.  इसके बाद नीचे दिए गए वास्तु उपाय अपनाएं:

1. हल्दी का छिड़काव और स्वस्तिक निर्माण
आवाज ठीक करने के बाद दरवाजे की चौखट को साफ पानी से पोंछ लें. इसके बाद गंगाजल या साफ पानी में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर चौखट पर छिड़कें.  हल्दी भगवान विष्णु और समृद्धि का प्रतीक है.  इसके साथ ही मुख्य द्वार पर कुमकुम या हल्दी से स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं, इससे कोई भी नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती.

2. देहरी (चौखट) का महत्व और चांदी का तार
घर की मुख्य देहरी को हर दिन साफ रखें.  वास्तु के अनुसार, अगर संभव हो तो मुख्य द्वार की देहरी (threshold) के नीचे चांदी का एक छोटा सा सीधा तार दबा दें. चांदी शीतलता और समृद्धि का प्रतीक है, जो घर की सकारात्मक ऊर्जा को बाहर जाने से रोकती है और राहु के दोष को शांत करती है.

3. संध्या दीपक (चौमुखी दीया)
शाम के समय (सूर्यास्त के दौरान) मुख्य द्वार के दाहिनी (Right) ओर घी या तिल के तेल का दीपक जरूर जलाएं. यदि संभव हो तो चौमुखी (चार मुख वाला) दीपक जलाएं. यह प्रकाश शुभ माना जाता है.

इन बातों का भी रखें विशेष ध्यान
नेमप्लेट का सही चुनाव: मुख्य द्वार पर हमेशा साफ, सुंदर अक्षरों वाली नेमप्लेट लगाएं.  लकड़ी या तांबे (Copper) की नेमप्लेट सबसे शुभ मानी जाती है. यह परिवार के यश और कीर्ति को बढ़ाती है.

दरवाजे के खुलने की दिशा: वास्तु के अनुसार, घर का मुख्य दरवाजा हमेशा अंदर की तरफ और घड़ी की सुई की दिशा में (Clockwise) खुलना चाहिए. बाहर की तरफ खुलने वाला दरवाजा खुशियों को बाहर धकेलता है.

जूते-चप्पलों का ढेर हटाएँ: जूते-चप्पलों का ढेर या टूटा-फूटा सामान कभी भी मुख्य द्वार के ठीक सामने या पीछे न रखें. यह सीधे तौर पर देवी लक्ष्मी के रास्ते में रुकावट लाता है और राहु-केतु के कुप्रभाव को बढ़ाता है.

तोरण लगाएं: मुख्य द्वार पर ताजे आम या अशोक के पत्तों का तोरण (बंदनवार) लगाना बेहद शुभ होता है.  यह घर में आने वाली हर नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मकता में बदल देता है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button