<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
देश

Rupee Fall पर बोले अरविंद पनगढ़िया- रुपये को गिरने देने से घबराने की जरूरत नहीं

नई दिल्‍ली

पिछले कुछ समय से रुपये में तेज गिरावट आई है, जिसे लेकर कुछ एक्‍सपर्ट्स का दावा है कि रुपया 100 लेवल के पार जा सकता है. यह भी खबर आई है कि आरबीआई रुपये को 100 लेवल पर जाने से बचाने के लिए कई प्रयास कर रहा है। 

इस बीच, वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने RBI से आग्रह किया है कि 100 लेवल पर जाने से बचाने की कोशिश ना करें. इसे अपनी नीतिगत प्रतिक्रिया निर्धारित न करने दें. 100 सिर्फ एक नंबर है जैसे 99 और 101. उनका तर्क है कि मौजूदा तेल संकट के जवाब में करेंसी का कमजोर होना ही उचित उपाय है। 

इकोनॉमिस्‍ट ने कहा कि तेल की कमी चाहे अस्थायी साबित हो या लंबे समय तक चलने वाली, रुपये में गिरावट होने देना ही सबसे व्यावहारिक उपाय होगा. उन्होंने कहा कि अगर तेल की कमी शॉर्टटर्म (3 महीने से एक वर्ष तक) रहती है, तो रुपया अभी गिरावट पर रहेगा, लेकिन तेल आयात बिल कम होने और विदेशी पूंजी द्वारा 'सस्ते' रुपये का लाभ उठाने के लिए भारतीय निवेश की तलाश करने के बाद इसमें काफी सुधार होगा। 

रुपये को बचाने की कोशिश बेकार 
उन्होंने तर्क दिया कि अगर रुकावट लंबे समय तक चलता है, तो भंडार में कमी या महंगे डॉलर-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से रुपये को बचाने के प्रयास विफल हो जाएंगे. पनगढ़िया ने कहा कि तेल की कमी लंबे समय तक चलने वाली है. ऐसे में गिरावट के अलावा किसी भी अन्य उपाय का सहारा लेना व्यर्थ होगा. रुपये को बचाने के प्रयास से भंडार तब तक कम होता रहेगा जब तक कि वह पूरी तरह समाप्त न हो जाए। 

100 रुपये प्रति डॉलर के ऊपर जाना ही होगा
इकोनॉमिस्‍ट ने कहा कि डॉलर बांडों को जारी करना और हाई इंटरेस्‍ट वाले NRI डिपॉजिट को भी अस्‍थायी समाधान बताकर खारिज कर दिया. उन्‍होंने कहा कि 100 रुपये प्रति डॉलर का लेवल पार करना ही होगा. पनगढ़िया ने 2013 के मुद्रा संकट से इसकी तुलना की, जब भारत को हाई महंगाई और व्यापक आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ा था। 

उन्होंने कहा कि यह 2013 नहीं है. साल 2013 में महंगाई दो अंकों में थी. अब ऐसा नहीं है. इसलिए, अर्थव्यवस्था अवमूल्यन के साथ आने वाले कुछ महंगाई दबाव को अवशोषित करने के लिए अच्छी स्थिति में है. उन्होंने डॉलर बांडों और उच्च ब्याज वाले एनआरआई जमाओं को 'महंगे साधन' बताया है, जो बड़े पैमाने पर लाभ को धनी प्रवासी भारतीयों तक पहुंचाते हैं। 

अभी कहां है रुपया? 
गौरतलब है कि ये बयान रुपये के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 96.95 पर पहुंचने और बुधवार को रिकॉर्ड निचले स्तर 96.86 पर बंद होने के एक दिन बाद आई है. भू-राजनीतिक तनाव में कमी और केंद्रीय बैंक के संभावित हस्तक्षेप के संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद गुरुवार को मुद्रा में 49 पैसे की उछाल आई और यह 96.37 पर बंद हुई। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button