<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
देश

झारखंड की मशहूर पतरातू घाटी को मिलेगा नया रंग, दीवारों पर उकेरी जाएगी सोहराय पेंटिंग

रामगढ़
रांची से पतरातू-रामगढ़ की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध पीठौरिया-पतरातू घाटी को प्रकृति की गोद में बैठे इस मनमोहक स्थल को और आकर्षक बनाने की कवायद एक बार फिर शुरू होने जा रही है।

झारखंड सरकार से जुड़ी कंपनियों और संबंधित विभागों द्वारा बरसात के बाद घाटी की सुंदरता बढ़ाने के लिए विशेष पहल की जाएगी।

इसमें सबसे खास होगा सोहराय पेंटिंग का प्रयोग, जिससे घाटी रंग-बिरंगी हो जाएगी और पर्यटक झारखंडी कला-संस्कृति से रूबरू हो सकेंगे।

बताते चलें कि घाटी अपनी घुमावदार सड़कों, ऊंची पहाड़ियों, घने हरे-भरे जंगलों, पतरातू डैम, झरनों और बंदरों की टोलियों के लिए जानी जाती है।

यहां बड़े-बड़े होटल और रिसॉर्ट पर्यटकों को सुविधा देने के साथ खूबसूरती का हिस्सा हैं। पर्व-त्योहारों के दौरान यहां पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और राज्य सरकार को राजस्व का लाभ होता है।

पर्यटक यहां सुकून तलाशने और प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने आते हैं। हाल के वर्षों में स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों पर भी यहां ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी, जो इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है।

राज्य सरकार से जुड़ी कंपनियों के अनुसार जल्द ही घाटी में एक बार फिर सोहराय पेंटिंग के माध्यम से झारखंड की पारंपरिक कलाकृतियों को उकेरा जाएगा।

सोहराय झारखंड की प्राचीन आदिवासी कला है, जो मुख्य रूप से हजारीबाग क्षेत्र की महिलाओं द्वारा धान कटाई के बाद मवेशियों के त्योहार के समय मिट्टी की दीवारों पर प्राकृतिक रंगों से बनाई जाती है। इसमें जानवरों, पौधों, ज्यामितीय आकृतियों और प्रकृति से जुड़े प्रतीकों को दर्शाया जाता है।

2020 में मिल चुका है जीआई टैग
इस कला को 2020 में जीआई टैग भी मिल चुका है। रांची एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों, सरकारी भवनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पहले से ही सोहराय पेंटिंग्स सजाई जा चुकी हैं, जिससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान मजबूत हुई है।

घाटी की साफ-सफाई के साथ-साथ सोहराय पेंटिंग लगाने का उद्देश्य पर्यटकों को सुंदर माहौल देना और झारखंडी पहचान से परिचित कराना है। बरसात के बाद जब हरियाली चरम पर होती है, तब यह पहल घाटी को और अधिक आकर्षक बनाएगी।

स्थानीय कलाकारों और महिलाओं को भी रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। सोहराय पेंटिंग न केवल दीवारों को सजाएगी बल्कि पर्यटकों को झारखंड की समृद्ध आदिवासी विरासत की झलक भी देगी।

पीठौरिया-पतरातू घाटी को अक्सर झारखंड का स्वर्ग कहा जाता है। यहां की जलेबी जैसी घुमावदार सड़कें ड्राइविंग का मजा देती हैं, जबकि पहाड़ियों से घिरा पतरातू डैम और आसपास के झरने प्रकृति प्रेमियों को लुभाते हैं।

बंदरों की टोली सेल्फी पॉइंट पर अक्सर नजर आती है, जो पर्यटकों के लिए अतिरिक्त आकर्षण बन जाती है। सरकार की यह पहल पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति को संरक्षित करने का भी माध्यम बनेगी।

बरसात के बाद घाटी का प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है। ऐसे समय में सौंदर्यीकरण अभियान शुरू करना स्वागतयोग्य कदम है। सरकार को झरनों, व्यू प्वाइंट, सड़क किनारे सुरक्षा और साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था कर पर्यटकों का अनुभव और यादगार बनाना चाहिए

पतरातू घाटी देशभर के पर्यटकों को आकर्षित करती है। रंग-बिरंगी सोहराय पेंटिंग और बेहतर पर्यटन सुविधाओं से यहां आने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी। इससे होटल, रिसॉर्ट, दुकानदारों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
विनय सिंह ,चेंबर ऑफ कॉमर्स रामगढ़

घाटी की सुंदरता बढ़ाने के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर भी समान ध्यान देना जरूरी है। सोहराय कला हमारी पहचान है, इसलिए इसे घाटी की दीवारों और सार्वजनिक स्थलों पर उकेरकर झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिल सकती है।

मंजीत सिंह ,सीसीएल अधिकारी

पीठौरिया–पतरातू घाटी झारखंड की प्राकृतिक धरोहर है। सोहराय पेंटिंग से घाटी को सजाने की पहल सराहनीय है। इससे स्थानीय कलाकारों को रोजगार मिलेगा और पर्यटकों को हमारी संस्कृति से परिचित होने का अवसर मिलेगा। सरकार को नियमित रखरखाव भी सुनिश्चित करना चाहिए
प्रवीण राजगढ़िया,श्री अग्रसेन स्कूल

    इस तरह की सौंदर्यीकरण योजनाओं से न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि राज्य की कला और प्रकृति दोनों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। घाटी पहले से ही लोकप्रिय है, लेकिन सोहराय कला के रंगों से सजी यह जगह पर्यटकों के लिए और भी यादगार अनुभव प्रदान करेगी। बरसात के बाद शुरू होने वाले इन कार्यों से पीठौरिया घाटी झारखंड पर्यटन का एक और चमकता सितारा बनने की ओर अग्रसर है

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button