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मध्यप्रदेश

बैतूल प्रदूषण मामले में बड़ा एक्शन, कंपनी पर 10 लाख की पेनल्टी

भोपाल

बैतूल जिले की मुलताई तहसील में ग्राम अम्भोरी में औद्योगिक गतिविधियों के लिए पर्यावरण सुरक्षा के नियमों को ताक पर रखकर विस्फोट किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि विकास के नाम पर पर्यावरण और ग्रामीणों की जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में पूर्व में बनाई गई जांच कमेटी की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

बिना ट्रीटमेंट के बहाया जा रहा था जहरीला पानी
कंपनी विस्फोटक मिश्रण तैयार करने के बाद निकलने वाले जहरीले लाल रंग के दूषित पानी को बिना किसी ट्रीटमेंट के खुले मैदान में बहा रही थी। पानी डिस्चार्ज का कोई रिकॉर्ड तक मौजूद नहीं था। परिसर में सेप्टिक टैंक, सोक पिट और धूल नियंत्रण के लिए जरूरी वाटर स्प्रिंकलर सिस्टम तक नहीं मिला।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद कंपनी को 10 लाख रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा जमा करना पड़ा। एनजीटी ने आदेश दिया कि यह रकम सिर्फ प्रभावित क्षेत्र के रेस्टोरेशन और पर्यावरण सुधार कार्यों पर ही खर्च की जाएगी।

निगरानी समिति का गठन
ट्रिब्यूनल ने बैतूल कलेक्टर की अध्यक्षता में संयुक्त निगरानी समिति बनाकर कंपनी को कड़ी चेतावनी दी है कि आगामी मानसून में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करना अनिवार्य किया गया। साथ ही मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को औचक निरीक्षण और सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। अब कंपनी को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली लागू करनी होगी और भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही मिली तो और कठोर कार्रवाई की जाएगी।

 

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