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राजनीति

AAP से टीवीके तक: नए राजनीतिक दलों की पहली ही चुनाव में चौंकाने वाली एंट्री

नई दिल्ली

तमिल फिल्मों के सुपरस्टार विजय ने अपनी सियासी पारी के आगाज से न सिर्फ सबको हैरान कर दिया, बल्कि उनकी पार्टी तमिलागा वेट्री कषगम (टीवीके) अपने गठन के दो साल के भीतर ही देश के उन चंद सियासी 'स्टार्टअप' में शामिल हो गई जो अपने पहले ही चुनाव में सत्ता तक पहुंचने में सफल रहे। टीवीके अब आम आदमी पार्टी, असम गण परिषद और तेलुगु देशम पार्टी जैसी पार्टियों की जमात में शामिल हो गयी है जो अपने पहले चुनाव में ही सत्तासीन हो गए।

AAP ने भी किया था कमाल
आम आदमी पार्टी ने 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी सियासी पारी की शुरुआत की थी और 70 सदस्यीय विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीती थीं और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई थी। असम गण परिषद 1985 में अपने गठन के तुरंत बाद सत्ता पर काबिज हुई थी। तेदेपा ने अपने गठन के एक साल बाद 1983 में आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में 201 सीटें जीतकर भारी बहुमत के साथ जीत हासिल की थी।

सभी को नहीं मिली सफलता
कुछ राजनीतिक दल अपने आगाज के साथ ही कामयाबी के शिखर पर पहुंच गए, लेकिन कई ऐसे दल भी रहे जिन्होंने अस्तित्व में आने के बाद अपने पहले चुनाव में शानदार दस्तक दी, लेकिन सत्ता में आने के लिए इंतजार करना पड़ा। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की 'जन सुराज पार्टी' चौतरफा चर्चा के बावजूद सफलता हासिल नहीं कर सकी। इसी तरह अभिनेता कमल हासन की पार्टी मक्कल निधि मय्यम 2021 को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली।

शुरुआत से ही चर्चा में रही टीवीके
टीवीके ने शुरू से ही जोरदार चर्चा पैदा की और अतीत में फिल्मी सितारों द्वारा बनाए गए कई राजनीतिक 'स्टार्टअप' के दक्षिण में अच्छे प्रदर्शन की तर्ज पर तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में इससे काफी उम्मीदें थीं। टीवीके ने तमिलनाडु के दो मुख्य दलों द्रमुक और अन्नाद्रमुक को पछाड़कर सब को हतप्रभ कर दिया।

बिहार और यूपी में आईं नई पार्टियां
बिहार और उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई राजनीतिक दल सियासी 'स्टार्टअप' के रूप में सामने आए, जिनमें कुछ नाकाम हुए और कुछ सीमित दायरे में कायम हैं। बिहार में पुष्पम प्रिया चौधरी की 'प्लूरल्स पार्टी' भी एक ऐसा दल है जो चर्चा के बावजूद कुछ सफलता हासिल नहीं कर सकी।

जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा बिहार में सीमित दायरे में अपना अस्तित्व बनाए हुए हैं। उत्तर प्रदेश में निषाद पार्टी, पीस पार्टी, अपना दल (सोनेलाल) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) जैसी कुछ ऐसे ही दल हैं।

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