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राजनीति

परिवार सत्ता में, फिर भी सवाल! उपेंद्र कुशवाहा पर जीतन राम मांझी के बयान के मायने क्या हैं?

नई दिल्ली 
राज्यसभा सीट को लेकर एनडीए (NDA) में जुबानी जंग तेज हो गई है। दरअसल, बिहार कोटे से राज्यसभा की 5 सीटें 9 अप्रैल 2026 को खाली हो रही हैं। वहीं, एनडीए (NDA) गठबंधन के सहयोगी दल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने अपनी पार्टी के लिए एक सीट की मांग की, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने उनकी मांग को अनुचित बताया। वहीं, अब उपेंद्र कुशवाहा पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्हें मेरी मांग पर ऐतराज नहीं जताना चाहिए था।

कुशवाहा को चुप रहना चाहिए- Jitan Ram Manjhi
जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने कहा कि कुशवाहा एक परिपक्व राजनेता है। उन्हें मेरी मांग पर ऐतराज नहीं जताना चाहिए था, उन्हें चुप रहना चाहिए। वह खुद राज्यसभा जा चुके हैं। उनकी पत्नी विधायक है, जबकि बेटा बिहार सरकार में मंत्री है। इसलिए उन्हें दूसरों की मांग पर बोलने का हक नहीं है। उनको लाभ मिल गया है। वहीं, मांझी का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक नाराजगी नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर उठता सवाल है।

बता दें कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) बिहार में एक दलित-केंद्रित क्षेत्रीय पार्टी है, जिसकी स्थापना जीतन राम मांझी ने 2015 में जनता दल (यूनाइटेड) से अलग होने के बाद की थी। मांझी, एक प्रमुख महादलित नेता, 2014 से 2015 तक थोड़े समय के लिए बिहार के मुख्यमंत्री रहे और तब से उन्होंने HAM (S) को हाशिए पर पड़े समुदायों की एक प्रमुख आवाज के रूप में स्थापित किया है। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले, HAM(S) बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ गठबंधन में शामिल हो गई। 2024 के लोकसभा चुनावों में केंद्र में NDA की जीत के बाद, मांझी को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया। 

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