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देश

केंद्र सरकार की नई पहल,शहरों के रोजगार और अर्थव्यवस्था का तैयार होगा विस्तृत रिपोर्ट कार्ड

रांची

तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य के बीच केंद्र सरकार बड़े शहरों के समग्र विकास के लिए ठोस डेटा आधारित नीति तैयार करेगी। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने देश के उन 47 शहरों के लिए सिटी लेवल स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट (नगर-स्तरीय सांख्यिकी रिपोर्ट) तैयार करने का प्रस्ताव रखा है, जिसकी आबादी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 10 लाख से अधिक है। इसमें झारखंड के दो शहर रांची और धनबाद का चयन हुआ है, जिसके आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से विशेष शहरी नीति निर्माण योजना बनानी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहरों में हो रहे संरचनात्मक बदलावों को समझना और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करना है।

क्यों आवश्यकता पड़ी
केंद्र का मानना है कि देश के कई शहर आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन के रूप में उभर रहे हैं। संरचनात्मक बदलाव के बावजूद शहर स्तर पर आधिकारिक आंकड़ों की उपलब्धता सीमित है, जिससे साक्ष्य-आधारित शहरी नीति निर्माण और नियोजन में बाधा उत्पन्न होती है। साथ ही अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर जो भी आर्थिक आंकड़े जारी होते थे, वे मुख्य रूप से देश या राज्य स्तर के होते थे। शहरों के भीतर रोजगार की क्या स्थिति है या वहां का व्यापार कैसा चल रहा है, इसका कोई सटीक सरकारी डेटा उपलब्ध नहीं था। इसी कमी को दूर करने के लिए केंद्रीय मंत्रालय के अधीन ‘एनएसओ’ ने यह नई पहल शुरू की है। इसमें रांची और धनबाद जैसे शहरों को स्वतंत्र इकाई मानकर उनका डेटा अलग से संकलित किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर आम लोगों से भी सुझाव मांगे गए हैं। इच्छुक व्यक्ति 15 मई तक अपने सुझाव दे सकते हैं।

पड़ोसी राज्यों में यूपी के सात शहर, बिहार के केवल एक
चयनित 47 शहरों में महाराष्ट्र के सर्वाधिक 10 शहर शामिल हैं। झारखंड के दो शहर के अलावा उत्तर प्रदेश के 7 शहर, पश्चिम बंगाल एवं छत्तीसगढ़ के 2-2 और बिहार के एक शहर का चयन किया गया है।

दो भागों में तैयार होगी रिपोर्ट
पहली रिपोर्ट में दस लाख से अधिक आबादी वाले संबंधित शहरों का विस्तृत रोजगार प्रोफाइल होगा। इसमें 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों को शामिल करते हुए कुल छह प्रमुख संकेतकों (इंडिकेटरों) का विश्लेषण किया जाएगा। इनमें श्रम बल सहभागिता दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात, बेरोजगारी दर, रोजगार की स्थिति और विभिन्न उद्योगों में रोजगार का वितरण शामिल होगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि शहरों में रोजगार के अवसर किस क्षेत्र में अधिक हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।

दूसरी रिपोर्ट असंगठित क्षेत्र के उद्यमों पर केंद्रित होगी। इसमें उन आर्थिक गतिविधियों (रेहड़ी-पटरी व्यवसाय, निर्माण मजदूर और छोटे घरेलू उद्योग) को शामिल किया जाएगा, जो सरकारी विनियमन या कराधान के दायरे से बाहर हैं। इसमें कुल 13 संकेतकों के आधार पर विश्लेषण होगा। इसमें प्रतिष्ठानों की संख्या, स्वामित्व और साझेदारी आधारित प्रतिष्ठानों का प्रतिशत, किराए पर काम कर रहे कर्मचारी वाले प्रतिष्ठानों का अनुपात, महिला स्वामित्व वाले उद्यमों की हिस्सेदारी और व्यापार में इंटरनेट के उपयोग का प्रतिशत आदि प्रमुख हैं। इससे असंगठित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और उसकी चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी।

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