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सावधान दिल्ली-एनसीआर! आपकी सोचने-समझने की क्षमता पर मंडरा रहा है एक खतरनाक खतरा

लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी के साथ बढ़ती पर्यावरणीय समस्याएं कई तरह की बीमारियां बढ़ाती जा रही हैं। कम उम्र में ही दिल की बीमारी-हार्ट अटैक का खतरा हो या बढ़ते डायबिटीज और कैंसर के मामले, ये सभी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता का कारण बने हुए हैं।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि हाल के वर्षों में याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता को कमजोर करने वाली बीमारियों जैसे अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। आमतौर पर ये समस्याएं उम्रदराज लोगों, विशेषकर 60 साल के बाद वालों में अधिक देखी जाती रही हैं। हालांकि कई रिपोर्ट्स अलर्ट करते हैं कि अब 50 की उम्र में भी लोगों में अल्जाइमर के लक्षण देखे जा रहे हैं।

कहीं आपकी भी  याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता कमजोर न हो जाए? दिल्ली जैसे शहरों में रहने वाले लोगों में इसका खतरा और भी देखा जा रहा है, आखिर इसके पीछे की वजह क्या है? आइए जान लेते हैं।

वायु प्रदूषण के कारण अल्जाइमर रोग का खतरा
अध्ययनकर्ताओं की एक टीम ने अलर्ट किया है कि जो लोग वायु प्रदूषण के अधिक संपर्क में रहते हैं, उनमें अल्जाइमर रोग होने का खतरा भी अधिक हो सकता है।

अल्जाइमर एक गंभीर मस्तिष्क विकार है जो याददाश्त, सोचने की क्षमता और व्यवहार के तरीके को प्रभावित करती है। ऐसे लोगों में डिमेंशिया होने का जोखिम भी अधिक देखा जाता रहा है। यह मस्तिष्क कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी है, जिससे सोचने-समझने में कठिनाई, दैनिक कार्यों में असमर्थता और व्यवहार में बदलाव जैसे गुस्सा या उलझन जैसे लक्षण होते हैं।

यूएस में 27.8 मिलियन (2.78 करोड़) से अधिक लोगों पर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से सीधे तौर पर अल्जाइमर रोग का खतरा बढ़ सकता है।
 
    हाइपरटेंशन और स्ट्रोक जैसी पुरानी बीमारियों की तुलना में वायु प्रदूषण के संपर्क को इस बीमारी के लिए ज्यादा खतरनाक माना गया है।
     जिन लोगों को पहले से ब्रेन स्ट्रोक की समस्या रही है, ऐसे लोगों में  एयर पॉल्यूशन का असर और भी गंभीर हो सकता है।
    भारत में बढ़ता वायु प्रदूषण, विशेषतौर पर दिल्ली जैसे शहरों में देखा जा रहा प्रदूषण का खतरा इस बीमारी की चिंता को और बढ़ाने वाला हो सकता है।

अध्ययन में क्या पता चला?
प्लस वन मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में प्रकाशित रिपोर्ट से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग के खतरे कम को करने के लिए वायु प्रदूषण से बचाव जरूरी है।

जॉर्जिया स्थित एमोरी यूनिवर्सिटी की टीम ने कहा कि एयर क्वालिटी में सुधार डिमेंशिया को रोकने का एक जरूरी तरीका हो सकता है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने साल 2000-2018 के दौरान 65 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों को शामिल किया।
 
    शोधकर्ताओं ने कहा, इस दौरान लगभग 30 लाख अल्जाइमर रोग के मामलों की पहचान की गई।
    लेखकों ने कहा कि पीएम 2.5 के अधिक संपर्क वाली आबादी में अल्जाइर रोग और डिमेंशिया का खतरा ज्यादा देखा गया।
    पीएम 2.5 जैसे प्रदूषकों के प्रति 3.8 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की बढ़ोतरी से दिमाग की बीमारियों का खतरा और भी बढ़ता देखा गया है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायु प्रदूषण (पीएम2.5) के अधिक संपर्क में रहने से हाइपरटेंशन, डिप्रेशन और स्ट्रोक होने का खतरा भी समय के साथ बढ़ता जाता है। ऐसे लोगों में मेंटल हेल्थ की समस्या जैसे स्ट्रेस और डिप्रेशन होने का जोखिम भी ज्यादा देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों ने कहा, ब्रेन की सेहत पर प्रदूषक तत्वों का गहरा असर होता है। अगर व्यापक उपाय अपनाकर प्रदूषण को कम कर लिया जाए तो इससे कई तरह की बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

 

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