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छत्तीसगड़

एमसीबी: जिला प्रशासन की त्वरित संवेदनशीलता, दिव्यांग रामकृपाल को मिली मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल

एमसीबी
आज मानवीय संवेदना, त्वरित कार्रवाई और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का एक प्रेरक उदाहरण सामने आया। जनपद भरतपुर के ग्राम कुदरा निवासी दिव्यांग रामकृपाल अगरिया (पिता हीरालाल अगरिया) के लिए यह दिन नई उम्मीद और खुशियों की सौगात लेकर आया।
रामकृपाल अगरिया, जो लंबे समय से आवागमन की समस्या से जूझ रहे थे, अपनी समस्या लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। उनकी स्थिति को समझते हुए डिप्टी कलेक्टर श्रीमती इंदिरा मिश्रा ने तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए मामले पर संज्ञान लिया। उन्होंने मौके पर ही समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि हितग्राही को बिना विलंब मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई जाए।

प्रशासनिक सक्रियता से सुगम हुई राह
डिप्टी कलेक्टर के निर्देश के बाद विभागीय अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए आवश्यक औपचारिकताओं को तेजी से पूर्ण किया और कुछ ही समय में रामकृपाल को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्रदान कर दी गई। इस त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ जनहित के कार्यों में देरी की कोई गुंजाइश नहीं रहती।

रामकृपाल के चेहरे पर लौटी मुस्कान
ट्राई साइकिल की चाबी हाथ में मिलते ही रामकृपाल के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। अब वे अपने दैनिक कार्यों और आजीविका के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगे। उनकी यह मुस्कान वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए एक भावुक क्षण बन गई।
रामकृपाल अगरिया ने भावुक होकर कहा “मैंने सोचा नहीं था कि इतनी जल्दी मेरी समस्या का समाधान हो जाएगा। जिला प्रशासन और इंदिरा मिश्रा मैडम का मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। इस ट्राईसाइकिल से अब मेरी जिंदगी आसान हो जाएगी और मैं अपने काम खुद कर पाऊंगा।“

संवेदनशील प्रशासन का सशक्त उदाहरण
जिला प्रशासन की इस त्वरित एवं मानवीय कार्यप्रणाली ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि मंशा स्पष्ट हो और व्यवस्था संवेदनशील हो, तो शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने में देर नहीं लगती। यह पहल न केवल एक दिव्यांग व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली साबित हुई है, बल्कि आमजन के बीच प्रशासन के प्रति विश्वास को भी और मजबूत करती है।

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