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खेल-जगत

फेक कंटेंट पर सख्त हुए गौतम गंभीर, किनके खिलाफ पहुंचे कोर्ट? जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली
इंडियन क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट से गुहार लगाई है। उन्होंने अपने नाम और तस्वीरों का अनधिकृत इस्तेमाल कर अपना प्रचार करने वालों के साथ-साथ एआई वीडियो और डीपफेक के जरिए फर्जी सूचनाएं फैलाने वालों से हर्जाने की भी मांग की है। गंभीर ने अदालत से ऐसे ऑनलाइन कंटेंट को हटाने का निर्देश देने की भी गुहार लगाई है। उन्होंने कुल 16 व्यक्तियों या संस्थानों को पार्टी बनाया है।

गौतम गंभीर से पहले अनिल कपूर, अमिताभ बच्चन, सुनील गावस्कर जैसी हस्तियां भी पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटा चुकी हैं। इन हस्तियों ने अपनी आवाज, वीडियों या तस्वीर के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ अदालत का रुख किया था और पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की थी।

दो बार के विश्व कप विजेता गौतम गंभीर ने दिल्ली हाई कोर्ट में सिविल वाद दाखिल किया है। उसमें उन्होंने अपने नाम, वीडियो, तस्वीरों का इस्तेमाल कर प्रचार करने वालों या इनका इस्तेमाल कर दुष्प्रचार करने वालों से 2.5 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की है। साथ में ये भी गुहार लगाई है कि उनकी उनकी पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाया जाए।

वाद में कॉपीराइट ऐक्ट 1957, ट्रेड मार्क्स ऐक्ट 1999 और कमर्शन कोर्ट्स ऐक्ट 2015 के प्रावधानों का जिक्र करते हुए हाई कोर्ट से गुहार की गई है। इसके साथ ही उन्होंने अमिताभ बच्चन बनाम रजत नागी, अनिल कपूर बनाम सिंपली लाइफ इंडिया और सुनील गावस्कर बनाम क्रिकेट तक एवं अन्य मामले में हाई कोर्ट के दिए ऐतिहासिक आदेश का भी हवाला दिया है।

एआई जैसी तकनीक से फर्जी वीडियो बना प्रचारित करने का आरोप
गौतम गंभीर की लीगल टीम की तरफ से कहा गया है कि इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और फेसबुक पर तमाम ऐसे अकाउंट्स हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फेस-स्वैपिंग, वॉइस क्लोनिंग टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करके गौतम गंभीर के असली से दिखने वाले वीडियो बना रहे हैं। उन फर्जी वीडियो में गंभीर के कथित बयानों को दिखाते, सुनाते हैं जो असल में उन्होंने कभी कहा ही नहीं होता है। ऐसे ही एक वीडियो में फर्जी तरीके से उनके कोच पद से इस्तीफा देने के ऐलान की बात रखी गई थी जिसने 29 लाख व्यूज बटोरे। इसके अलावा उन्होंने ईकॉमर्स प्लेफॉर्म्स को भी पक्ष बनाया है। गंभीर का दावा है कि ये ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म उन पोस्टर्स या सामानों को बिकने दे रहे ही हैं जिन पर अनधिकृत रूप से उनका यानी गौतम गंभीर के नाम का इस्तेमाल किया गया है।

गौतम गंभीर ने किन लोगों के खिलाफ किया है मुकदमा
जानकी फ्रेम्स, भूपेंद्र पैंटोला, लिजेंड्स रिवोलूशन, गुस्ताख एडिट्स, क्रिकेट मीमर 45, जेम्स ऑफ क्रिकेट, क्रिकएथ, सन्नी उपाध्याय, @imRavY_, ऐमजॉन, फ्लिपकार्ट, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक, एक्स कॉर्प, गूगल/यूट्यूब, मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी और डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशंस।

क्या होता है पर्सनैलिटी राइट?
पर्सनैलिटी राइट किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व की रक्षा से जुड़े हैं। भारतीय संविधान में अलग से इस तरह के किसी अधिकार की व्यवस्था नहीं है बल्कि यह अनुच्छेद 21 के तहत मिले निजता के अधिकार के तहत ही आता है। पर्सनैलिटी राइट्स में दो तरह के अधिकार शामिल होते हैं- राइट ऑफ पब्लिशिटी और राइट टु प्राइवेसी। राइट ऑफ पब्लिशिटी किसी व्यक्ति को अपनी तस्वीर, आवाज, वीडियो या उससे जुड़ी किसी भी चीज का बिना उसकी इजाजत या करार के बिना व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने से रक्षा का अधिकार है।

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