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मध्यप्रदेश

फेमस रतलामी सेंव को प्रमोट करने की पहल, उद्योग विभाग कर रहा निर्माताओं का सर्वे

रतलाम
 मालवा की झन्नाटेदार स्वाद और लज्जत रतलामी सेंव को देश-विदेश में विपणन के अवसर उपलब्ध कराने के लिए अब एक जिला एक उत्पाद योजना में निर्माताओं को आगे लाने की तैयारी है। इस योजना में उद्योग विभाग शहर व जिले के नमकीन निर्माताओं का रिकार्ड तैयार करवा रहा है।

इससे किसी भी समय मांग आने पर जानकारी दी जा सकेगी। इसके साथ ही देश विदेश में होने वाले सेमिनार आदि की जानकारी भी निर्माताओं को दी जा सकेगी। 15 तक सभी निर्माताओं को जानकारी देने के लिए कहा गया है।

वैश्विक स्तर पर ब्रांड बनने का रास्ता भी खुल गया

मालूम हो कि नमकीन निर्माण में रतलामी सेंव नमकीन मंडल ने भौगोलिक संकेतक (जियोग्राफिकल इंडक्शन) साल 2012-13 में ही हासिल कर लिया था। इससे रतलाम नमकीन की पहचान को कानूनी सुरक्षा मिलने के साथ ही वैश्विक स्तर पर ब्रांड बनने का रास्ता भी खुल गया, लेकिन 12 साल बीतने के बाद भी इसका व्यावसायिक और रणनीतिक लाभ रतलाम जिले व नमकीन कारोबारियों तक नहीं पहुंच पाया है।

जीआई टैग लेने वाले रतलामी सेंव नमकीन मंडल के अनुसार भौगोलिक आधार पर रतलामी सेंव का निर्माण मालवा अंचल में ही किया जा सकता है। यदि अन्य स्थानों पर बनाई भी जाती है तो स्वाद व गुणवत्ता में बेहद कमजोर रहती है। रतलामी सेंव के नाम से उत्पाद अब अधिकृत जीआइ रजिस्ट्री में पंजीकृत व्यक्ति, फर्म ही बेच सकती है। रतलामी सेंव को यह टैग उसकी विशेष मसालेदार रेसिपी, मोटी बनावट, देशी सामग्री और पारंपरिक प्रक्रिया के कारण मिला है।

रतलामी सेव निर्माण इकाईयों की जानकारी संकलित की जा रही

महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र अतुल वाजपेयी ने बताया कि एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) अंतर्गत रतलाम जिले के लिए चयनित रतलामी सेंव के निर्माण को बढ़ावा देने व उप्ताद की गुणवत्ता में सुधार एवं उक्त उत्पाद की बिक्री को बढ़ावा देने, निर्यात की संभावना के लिए जिले में कार्यरत रतलामी सेव निर्माण इकाईयों की जानकारी संकलित की जा रही है।

शहर में सेंव-नमकीन निर्माताओं की संख्या करीब 1000 से अधिक है, लेकिन नमकीन मंडल में अभी आठ से दस व्यापारी ही रजिस्टर्ड हैं। रतलाम में व बाहर धड़ल्ले से तय मानक से हटकर बनाई जा रही सेंव को रतलामी सेंव के नाम से बेचा जा रहा है। व्यावसायिक रणनीति, ब्रांडिंग और योजनागत समर्थन के अभाव में यह टैग एक कागजी तमगा बनकर रह गया है।

इन कारणों से पिछड़ गए

  •     जीआई टैग मिलने के बाद भी व्यापक स्तर पर इसकी जानकारी न तो व्यापारियों को है ना उपभोक्ताओं को।
  •     स्टैंडर्ड पैकेजिंग, ब्रांड लेबल, गुणवत्ता प्रमाणन जैसे पहलुओं पर काम नहीं हो पाया। अधिकांश निर्माण असंगठित तौर पर हो रहा है।
  •     ऑनलाइन नेटवर्क में प्रमोशन को लेकर भी ठीक से पहल नहीं हो पाई।

अब यह होगा

विभागीय स्तर पर सभी नमकीन निर्माताओं को जीआई टैग अनुसार गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। शासन की योजनाओं के मान से जानकारी देकर जहां जरूरी होगा वहां प्रदर्शनी आदि के लिए भी भेजा जाएगा।

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