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छत्तीसगड़

फूलों की खेती से रत्ना ने लिखी सफलता की कहानी, बिहान योजना से मिला सहारा

रायपुर

बिहान योजना से खिला रत्ना का भविष्य- फूलों की खेती से बनीं सफल उद्यमी

छत्तीसगढ़ शासन की ‘बिहान’ (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी योजना से जुड़कर सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत डिगमा की निवासी  रत्ना मजुमदार आज सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। अपनी मेहनत और सरकारी सहयोग से उन्होंने न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचान भी बनाई है।

पारंपरिक खेती को दिया व्यावसायिक रूप    

रत्ना मजुमदार बताती हैं कि उनके ससुर पहले से ही छोटे स्तर पर फूलों की खेती करते थे। ‘माँ महामाया स्व-सहायता समूह’ से जुड़ने के बाद उन्होंने इस पारंपरिक कार्य को व्यवसाय का रूप देने का निर्णय लिया। समूह के माध्यम से उन्होंने पहली बार एक लाख रुपये का ऋण लिया और एक एकड़ भूमि में आधुनिक तकनीक से फूलों की खेती शुरू की। मेहनत और लगन के चलते आज वे दो एकड़ भूमि में सफलतापूर्वक फूलों का उत्पादन कर रही हैं।

आधुनिक तकनीक से बढ़ी उत्पादन क्षमता

रत्ना ने खेती में आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया है। वे उन्नत किस्म के पौधे कोलकाता से मंगवाती हैं, जो मात्र 24 दिनों में फूल देना शुरू कर देते हैं और लगभग तीन महीनों तक लगातार उत्पादन देते हैं। खेतों में ‘ड्रिप इरिगेशन’ (टपक सिंचाई) प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जिससे जल संरक्षण के साथ पौधों को पर्याप्त पोषण भी मिलता है। वर्तमान में वे गेंदा फूल की तीन प्रमुख किस्में-लाल, नारंगी और पीला उगा रही हैं। इसके अलावा सर्दियों के मौसम में ‘चेरी’ की खेती भी करती हैं।

त्योहारों में बढ़ती मांग से बढ़ता मुनाफा

रत्ना के अनुसार नवरात्रि, शिवरात्रि, रामनवमी और दीपावली जैसे पर्वों के दौरान बाजार में फूलों की मांग काफी बढ़ जाती है, जिससे अच्छी कीमत मिलती है। सामान्य दिनों में दरें कम होने के बावजूद वैज्ञानिक खेती के कारण उन्हें सालभर लाभ मिलता रहता है। उन्होंने समूह से लिया गया ऋण समय पर चुका दिया है और अब अपनी आय का निवेश खेती के विस्तार में कर रही हैं।

सरकारी योजनाओं ने दिया आत्मनिर्भरता का मार्ग      

अपनी सफलता का श्रेय रत्ना मजुमदार ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं को दिया है। उनका कहना है कि ‘बिहान’ योजना से जुड़कर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर मिला है। सरकार से मिले ऋण और मार्गदर्शन ने उन्हें नई पहचान दिलाई है। बिहान योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक परिवर्तन की नई कहानी लिखी जा रही है। रत्ना मजुमदार जैसी स्वावलंबी महिलाएँ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं

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