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उत्तर प्रदेश

20 हजार से अधिक सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों पर ईसीसीई किट का वितरण

लखनऊ

योगी सरकार प्रदेश में शिक्षा की मजबूत नींव आंगनबाड़ी केंद्रों से रख रही है। इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20,000 से अधिक सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) किट का वितरण किया गया। प्रदेश सरकार का मानना है कि तीन से छह वर्ष की आयु बच्चों के बौद्धिक विकास की सबसे संवेदनशील अवस्था होती है। ऐसे में यदि इसी चरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री और वैज्ञानिक पद्धति उपलब्ध करा दी जाए, तो आगे की शिक्षा यात्रा सशक्त बनती है। 

प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को 39000 रुपये दे रही योगी सरकार 

प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) किट के लिए प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को 39000 रुपये योगी सरकार दे रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 में भी 03 से 06 वर्ष तक के बच्चों के लिए ईसीसीई को महत्व देते हुए स्कूली शिक्षा के बुनियादी स्तर में इसे सम्मिलित किया गया है। ईसीसीई के अन्तर्गत संसाधनों के रूप में प्री–स्कूल किट तथा ईसीसीई मैनुअल (पहल), वार्षिक गतिविधि कैलेंडर, बाल गतिविधि पुस्तिका उपलब्ध कराई जाती है। इसके अतिरिक्त नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) से प्रकाशित 06 कहानियों की किताबों के सेट के साथ ही टीचिंग लर्निंग मैटेरियल (टीएलएम) पर आधारित पुस्तिकाएं भी उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। 

खेल-खेल में सीख रहे हैं बच्चे

ईसीसीई किटों के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर मिलता है जिससे उनकी बौद्धिक, शारीरिक और मानसिक क्षमताओं का विकास होता है। ईसीसीई किट के माध्यम से बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षा दी जाती है। रंगीन चार्ट, शैक्षिक खिलौने, पहेलियां और संज्ञानात्मक विकास से जुड़ी सामग्री बच्चों को सहज तरीके से सीखने का अवसर देती है। सरकार का जोर इस बात पर है कि शिक्षा बोझ न बने, बल्कि आनंद के साथ हो। खेल-खेल में अक्षर ज्ञान, संख्या पहचान और सामाजिक व्यवहार की समझ विकसित होगी। इससे बच्चों की जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति और अभिव्यक्ति क्षमता को नया आयाम मिलेगा।

सक्षम बन रहे आंगनबाड़ी केंद्र

प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण तक सीमित नहीं रखना चाहती। इन्हें चरणबद्ध तरीके से आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग, बेहतर फर्नीचर, सुरक्षित वातावरण और प्रशिक्षण प्राप्त कार्यकर्त्रियों की उपलब्धता से इन केंद्रों का स्वरूप बदल रहा है। यह बदलाव दर्शाता है कि सरकार प्रारंभिक शिक्षा को मुख्यधारा की नीति के केंद्र में ला रही है। आंगनबाड़ी अब गांव और मोहल्लों में छोटे-छोटे लर्निंग हब के रूप में विकसित हो रहे हैं।

सर्वांगीण विकास के लिए ठोस कदम

योगी सरकार बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और मानसिक विकास को समान महत्व दे रही है। पोषण, स्वास्थ्य जांच और शिक्षा को एकीकृत कर समग्र विकास का मॉडल तैयार किया गया है। प्रारंभिक अवस्था में सही मार्गदर्शन मिलने से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित होती है। सरकार की यह पहल दर्शाती है कि आने वाली पीढ़ी को सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए वह दीर्घकालिक और ठोस कदम उठा रही है।

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