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धर्म/ज्योतिष

भद्रा का साया और महाशिवरात्रि: शिवजी की पूजा को लेकर शास्त्र क्या कहते हैं?

इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि पर भक्त शिवजी का अभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि मनायी जाएगी। इस बार महाशिवरात्रि पर भद्रा लग रही है। ऐसे में भद्रा में शिवजी की पूजा होती है या नहीं भक्त इसको लेकर लोग कंफ्यूज रहते हैं।यहां हम आपको बताएंगे कि भद्रा में शिवजी की पूजा का क्या नियम है और इस दिन भद्रा किस समय लग रही है। चतुर्वेदी ने कहा कि सूर्य, बुध, शुक्र, राहु चार ग्रहों की युति में महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा।

इस दिन भद्रा कब रहेगी?

इस बार महाशिवरात्रि पर भद्रा लग रही है। ऐसे में भद्रा में शिवजी की पूजा होती है या नहीं भक्त इसको लेकर लोग कंफ्यूज रहते हैं।यहां हम आपको बताएंगे कि भद्रा में शिवजी की पूजा का क्या नियम है और इस दिन भद्रा किस समय लग रही है। इस साल 15 फरवरी को सायं 05:04 बजे से प्रारंभ होकर 16 फरवरी सोमवार शाम 05 बजकर 34 मिनट तक चतुर्दशी रहेगी। इस साल 15 फरवरी को संपूर्ण रात्रि निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी तिथि रहने के कारण 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। आपको बता दें कि भद्रा में शिवपूजन पर कोई रोक नहीं है। शिवपूजा करने के लिए पाताल लोक भद्रा बाधक नहीं होता है। इस साल शिवरात्रि पर भद्रा 15 फरवरी को सायं 05.04 बजे से अगले दिन प्रातः 5.23 तक भद्रा योग रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार इस बार भद्रा पाताल लोक में होने के कारण उसका पृथ्वी पर असर नहीं पड़ेगा।

चतुर्दशी तिथि की रात्रि क्यों है खास

इसलिए सभी लोग आराम से महाशिवरात्रि पर्व पर शंकर जी का रुद्राभिषेक, पूजन अर्चन एवं रात्रि जागरण कर सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि शिव पूजा से आपको सुख समृद्धि ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। नाकोटिरुद्र संहिता एवं ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के उपरांत चतुर्दशी तिथि को रात्रि में महादेव शिवलिंग के रूप में अवतरित हुए थे, जिसमें करोड़ों सूर्य के समान तेज बताया गया है।

भोलेनाथ का इन चीजों से करें अभिषेक

भोलेनाथ के पूजन में दूध,दही, घी, शहद, शर्करा से पंचामृत अभिषेक करें और संभव हो सके तो गंगाजल से स्नान कराएं, फिर चंदन, रोली,अक्षत, बेलपत्र, धतूरा नाना प्रकार के सुगंधित पुष्प अर्पित करें। धूप-दीप कर फल व मिष्ठान का भोग लगाएं अंत में कपूर से आरती करें व पुष्पांजलि करें। ऐसा कहा जाता है कि शिवरात्रि पर्व पर व्रत रखने से मन शुद्ध होता है।

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