<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
देश

दिसंबर में बीसलपुर बांध गेट खुले, 22 साल में बना कीर्तिमान, तीन शहरों में जलभराव

टोंक

राजस्थान की राजधानी जयपुर, अजमेर और टोंक जिले की लाइफलाइन ने दिसंबर महीने की शुरूआत में वो कर दिया जो शायद अब तक प्रदेश के किसी भी बड़े बांध ने नहीं किया होगा। बीसलपुर डैम ने इस साल सोमवार को एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया हैं जो अब तक कभी नहीं बना। यह रिकॉर्ड है पहली बार दिसंबर माह में भी बांध का गेट खुला रहने का है। इसी के साथ इस साल 7 रिकॉर्ड बन गए हैं। इस साल बांध से इतना पानी छोड़ा गया है, जिससे डैम 3 बार से ज्यादा भर सकता था।

इस सीजन में 140.581 टीएमसी पानी निकासी बनास नदी में की जा चुकी है। जबकि इससे पहले 2016 में डेढ़ महीने में 134.238 टीएमसी पानी की निकासी की गई थी। बांध अभी भी लबालब भरा हुआ है। बताया जा रहा है बारिश नहीं हुई तो भी तीन साल तक टोंक, अजमेर और जयपुर की करीब एक करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए पेयजल सप्लाई हो सकेगी।

22 साल के इतिहास में पहली बार 131 दिन निकासी
करीब 22 साल पहले बना ये डैम जयपुर, टोंक, अजमेर जैसे जिलों की लाइफलाइन है। इसका भरा रहना, इन जिलों के लोगों के लिए अच्छा है। खास बात यह है कि अभी भी बांध से पानी की निकासी की जा रही है। सोमवार को पानी निकासी का 131वां दिन रहा। यह भी पहली बार है जब इतने दिन बांधी से पानी छोड़ा गया है।

लबालब है बीसलपुर बांध
बांध अपनी पूर्ण भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर भरा हुआ है। अभी भी एक गेट को 10 मीटर खोलकर प्रति सेकेंड 601 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। बीसलपुर बांध परियोजना के AEN दिनेश बैरवा ने बताया कि इस साल अब तक 22 साल के बांध के इतिहास में एक सीजन में सबसे ज्यादा पानी निकासी 140 टीएमसी से ज्यादा हो चुकी है और अभी भी पानी निकासी जारी है।

साल 2019 में 64 दिन खुले थे गेट
इस साल बीसलपुर बांध लबालब होने पर 24 जुलाई को बांध का एक गेट खोला था। फिर पानी बढ़ा तो कुछ दिन बाद अधिकतम 8 गेट इस साल खोले गए थे। इसके बाद पानी की आवक कम होने बांध का एकमात्र गेट खोलकर रखा गया, जिसे 90 दिन बाद 21 अक्तूबर को बंद किया था। इसी के साथ बीसलपुर बांध ने लगातार सबसे अधिक 90 दिन पानी निकासी का रिकॉर्ड बनाया था। वह भी टूट गया है।

तेज बारिश से बढ़ी आवक, फिर खुले गेट
अक्तूबर महीने के आखिरी सप्ताह में बारिश होने से बांध में फिर से पानी की आवक बढ़ गई थी। इसके चलते पहली बार बांध के अक्तूबर माह के लास्ट वीक में 28 अक्तूबर को दोपहर को बांध का फिर एक गेट खोला गया। जबकि आखिरी गेट को 21 अक्तूबर को बंद कर दिया था। करीब सप्ताह भर बाद ही फिर एक गेट खोल दिया गया। बीसलपुर बांध परियोजना के एक्सईएन मनीष बंसल और जेईएन दिनेश बैरवा ने बताया कि बांध की भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर तक है। पानी की आवक के अनुसार बांध के लेवल को मेंटेन करते हुए निकासी की जा रही है।

किस साल कितना पानी बनास नदी में छोड़ा
बीसलपुर बांध के गेट अब तक 8 बार खोले जा चुके हैं। पहली बार इसमें 2004 में पानी रोका गया था।उस साल 26.18 टीएमसी पानी निकासी की गई थी। इसी तरह फिर 2006 में 43.25 टीएमसी, 2014 में 11.202 टीएमसी, 2016 में 134.238 टीएमसी, 2019 में 93.605 टीएमसी, 2022 में 13.246 टीएमसी, 2024 में 31.433 टीएमसी और इस साल 135 टीएमसी से ज्यादा पानी की निकासी बनास नदी में की गई है।

बांध का कितना पानी किसके लिए आरक्षित
बीसलपुर बांध प्रोजेक्ट के एक्सईएन मनीष बंसल ने बताया कि टोंक जिले में सिंचाई के लिए 8 टीएमसी पानी, पेयजल के लिए 16.2 टीएमसी पानी आरक्षित है। इसके अलावा 8.15 टीएमसी वाष्पीकरण व अन्य खर्च माना गया है। बीसलपुर बांध के 18 गेट हैं जो 15 गुणा 14 मीटर की साइज के हैं। बांध की लंबाई 576 मीटर व समुद्रतल से ऊंचाई 322.50 मीटर है। बांध की कुल जल भराव में 68 गांव डूब चुके हैं। इसमें 25 गांव पूर्ण रूप से व 43 गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आते हैं। बांध का जलभराव क्षेत्र 25 किलोमीटर है जिसमें कुल 21 हजार 300 हेक्टेयर भूमि जलमग्न होती है। 83 हजार हेक्टेयर में होती बांध की नहरों से सिंचाई

बीसलपुर बांध के निर्माण के साथ ही इसके नहरी तंत्र का निर्माण भी 2004 में पूरा हुआ था। टोंक जिले में सिंचाई के लिए बांध की 2 मुख्य नहरें हैं। एक नहर की कुल लंबाई 51.70 किलोमीटर व दूसरी की 18.65 किलोमीटर है। जिनसे जिले की करीब 83 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। मुख्य नहर से 69 हजार 393 हेक्टेयर व दूसरी से 12 हजार 407 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई कार्य होता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button