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मध्यप्रदेश

डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को 19वाँ राष्ट्रीय पुरस्कार, पद्मश्री श्री मठपाल करेंगे सम्मानित

19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री श्री मठपाल होंगे सम्मानित

"पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में हालिया प्रगति" पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, 09 से 11 जनवरी, 2026 तक भोपाल में
राष्ट्रीय संगोष्ठी में संक्षेप (Abstract) जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर 2025 तक

भोपाल 

19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री श्री यशोधर मठपाल को सम्मानित किया जाएगा। संस्कृति विभाग के संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय द्वारा दिये जाने वाले राष्ट्रीय सम्मान में श्री मठपाल को प्रशस्ति पत्र, सम्मान पट्टिका और 2 लाख रुपये प्रदान किए जायेगे। यह पुरस्कार किसी सक्रिय भारतीय नागरिक या संस्था को पुरातत्व के क्षेत्र में उनकी सृजनात्मक, रचनात्मक और विशिष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। आयुक्त पुरातत्व श्रीमती उर्मिला शुक्ला ने बताया कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के योगदान को स्मरण करने के लिए, पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय, भोपाल 09 से 11 जनवरी, 2026 तक कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में "पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में हालिया प्रगति" पर एक राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है। इसी दौरान 19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में, पूरे भारत से प्रशासकों, नीति निर्माताओं, क्षेत्रीय पदाधिकारियों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों की भागीदारी होगी, जो पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालयों के क्षेत्रों में विभिन्न उभरते मुद्दों पर चर्चा करेंगे और पुरातात्विक खजानों के प्रभावी संरक्षण, प्रबंधन और विकास के लिए साक्ष्य-आधारित रणनीतियों की सिफारिश करेंगे। 

आयुक्त पुरातत्व श्रीमती शुक्ला ने बताया कि राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्देश्य को 3 विषयों पर प्रस्तुति और चर्चा के माध्यम से संबोधित किया जाएगा। इन विषयों में पुरातत्व, नृवंश-पुरातत्व (ethnoarchaeology), पुरातत्वमिति (archaeometry), कलाकृति विश्लेषण, सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन आदि में नई सफलताएँ,  हाइब्रिड सिस्टम सहित अभिलेखागार और रिकॉर्ड प्रबंधन में उभरती प्रौद्योगिकियाँ और मूर्त और अमूर्त विरासतों (tangible and intangible heritages) के संग्रह, भंडारण, पहुँच और संरक्षण में नवीनतम विकास और डिजिटल क्यूरेशन के रुझान शमिल है। 

सार-संक्षेप जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर तक बढ़ाई गई

राष्ट्रीय संगोष्ठी के विषयों या संबंधित क्षेत्रों में से किसी पर भी सार-संक्षेप (Abstracts) आमंत्रित हैं। सार-संक्षेप जमा करने की अंतिम तिथि 10 नवंबर 2025 थी, जिसे अब 20 नवंबर 2025 तक बढ़ा दिया गया है। स्वीकृत सार-संक्षेप के पूर्ण पर्चों (full papers) का मूल्यांकन, संपादन किया जाएगा और उन्हें संगोष्ठी की कार्यवाही पुस्तक (seminar proceeding book) में प्रकाशित किया जाएगा। प्रत्येक विषय क्षेत्र पर सर्वश्रेष्ठ पर्चा प्रस्तुति (best paper presentation) के लिए पुरस्कार भी दिए जाएंगे। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट www.archaeology.mp.gov.in को देखा जा सकता है। 

उल्लेखनीय है कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर (1919-1988), जिन्हें 'हरिभाऊ' के नाम से जाना जाता है और भारतीय शैल कला (rock art) अध्ययन के "पितामह" के रूप में संदर्भित किया जाता है, एक प्रख्यात भारतीय पुरातत्वविद्, कला इतिहासकार, मुद्राशास्त्री, पुरालेखविद् और सांस्कृतिक शोधकर्ता थे। उनका जीवन और कार्य भारत के समृद्ध प्राचीन इतिहास और प्रागैतिहासिक कला को उजागर करने और संरक्षित करने के लिए समर्पित था। उन्हें जनवरी 1975 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म श्री से सम्मानित किया गया। डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार, जिसे वाकणकर सम्मान भी कहा जाता है, मध्यप्रदेश के भोपाल में पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय द्वारा (वर्ष के आधार पर) वार्षिक या द्विवार्षिक रूप से प्रस्तुत किया जाने वाला एक राष्ट्रीय पुरस्कार है।

 

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