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धर्म/ज्योतिष

इस दिन होगा तुलसी विवाह, शुभ समय और विधि का पूर्ण विवरण

कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी पर तुलसी विवाह किया जाता है। इस दिन तुलसी जी और शालिग्राम जी का विवाह कराया जाता है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि की शुरुआत 2 नवंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 31 मिनट पर होगी और इसका समापन 3 नवंबर को सुबह 5 बजकर 7 मिनट पर होगा। शुभ मुहूर्त के अनुसार, तुलसी विवाह 2 नवंबर (रविवार) को ही मनाया जाएगा, लेकिन सही विधि और शुभ मुहूर्त में ही पूजा करनी चाहिए।

इन मुहूर्तों में तुलसी विवाह करना सबसे शुभ माना जाता है —

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:59 से 5:49 तक
प्रातः संध्या: सुबह 5:24 से 6:39 तक
अमृत काल: सुबह 9:29 से 11:00 तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:59 से 12:45 तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:04 से 6:30 तक

तुलसी विवाह के दिन गन्ने से ही मंडप बनाना चाहिए। कहा जाता है कि तुलसी जी को गन्ना बहुत प्रिय है, इसलिए विवाह का मंडप गन्ने से सजाया जाता है।

तुलसी विवाह पूजा विधि
1. सुबह स्नान कर घर के आंगन या छत पर तुलसी के पौधे के पास स्थान को साफ करें।
2. तुलसी माता को लाल साड़ी, चुनरी, चूड़ी, सिंदूर और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें।
3. पौधे के दाहिनी ओर शालिग्राम (भगवान विष्णु) को स्थापित करें।
4. तुलसी और शालिग्राम दोनों को गंगाजल से स्नान कराएं और चंदन, रोली से तिलक करें।
5. फल, फूल, मिठाई और तुलसीदल का भोग लगाकर विवाह मंत्रों के साथ तुलसी-शालिग्राम का विवाह कराएं।
6. विवाह के बाद आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।

तुलसी विवाह का महत्व
बता दें कि तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम से किया जाता है। भगवान शालिग्राम को दूल्हे की तरह सजाया जाता है और माता तुलसी को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। भगवान शालिग्राम ईश्वर की शक्ति के प्रतीक हैं, जबकि तुलसी माता प्रकृति का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस विवाह से प्रकृति और भगवान के बीच के संतुलन का संदेश मिलता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति पूरे विधि-विधान से तुलसी विवाह करता है, उसके वैवाहिक जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। साथ ही घर में समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली का वास होता है। तुलसी विवाह करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ भी मिलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के चार महीने की योग निद्रा के बाद जागरण एकादशी (देवउठनी एकादशी) के अगले दिन तुलसी विवाह संपन्न कराया जाता है। ऐसा माना जाता है कि तुलसी विवाह कराने से —वैवाहिक जीवन में प्रेम, शांति और समृद्धि आती है। अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है और सबसे बड़ा लाभ, यह कन्यादान के समान पुण्यफल प्रदान करता है।

 

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