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उत्तर प्रदेश

पैसे नहीं, समय से करें लेन-देन! कानपुर का नया टाइम बैंक और इसके फायदे

कानपुर 
जब भी बैंक का नाम आता है, हमारे मन में पैसों के लेन-देन की तस्वीर उभरती है. लेकिन कानपुर शहर में पहली बार ऐसा बैंक खुला है, जहां रुपये-पैसे का कोई काम नहीं होगा. यहां हर सदस्य अपने खाते में समय जमा करेगा और जरूरत पड़ने पर समय ही निकाल सकेगा. इस अनोखे प्रयोग का नाम है- टाइम बैंक. इस बैंक की खासियत यह है कि इसमें सदस्य अपनी सेवाओं के बदले घंटे जमा करते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर कोई सदस्य किसी बुजुर्ग की सेवा में दो घंटे लगाता है, तो उसके खाते में उतने घंटे दर्ज हो जाते हैं. बाद में जब उसे खुद किसी काम में मदद चाहिए होगी, तो वह उन्हीं घंटों को अपने खाते से निकाल सकता है.

जानकारी के अनुसार, टाइम बैंक की शुरुआत सबसे पहले जापान में हुई थी. वहां बुजुर्गों की देखभाल के लिए परिवारजन समय नहीं निकाल पाते थे, तो समाज के लोगों ने मिलकर यह व्यवस्था बनाई. धीरे-धीरे यह मॉडल कई देशों में फैल गया. आज भारत में भी सात हजार से अधिक लोग टाइम बैंक से जुड़े हुए हैं और अब कानपुर भी इस पहल का हिस्सा बन गया है. कानपुर के महेश कुमार, जो इस प्रयोग के सक्रिय सदस्य हैं, बताते हैं कि यह बिल्कुल सेविंग अकाउंट की तरह है. फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें रुपये की जगह घंटे जमा होते हैं. विदेशों में तो सरकारें टाइम बैंक को समर्थन भी देती हैं और सदस्यों को सेवा कार्यों के लिए निर्देशित करती हैं. कानपुर में फिलहाल इसे समाजिक पहल के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है.

करवानी पड़ेगी रजिस्ट्रेशन
महेश कुमार बताते है कि इस सेवा की प्रक्रिया वेबसाइट और ऐप से शुरू होती है. सबसे पहले अपने रजिस्ट्रेशन कराना होता है और ई-केवाईसी होती है. इसके बाद आप एक दूसरे की सेवा या समय ले सकते है. उदाहरण के तौर पर अगर कोई अस्पताल में भर्ती है और उसको दो घंटे या इससे ज्यादा भी सेवा करने के लिए किसी की आवश्यकता है तो वह अपनी डिमांड भेज सकता है. जो इस सेवा के लिए राजी हो जाएगा उसको सेवा करनी होगी. सेवा खत्म होने के बाद जितने घंटे सेवा की उतने उसके खाते में जुड़ जाएंगे जिसका इस्तेमाल वो अपनी सेवा के लिए कभी भी कर सकता है. यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है. कानपुर में करीब 25 लोगों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है. अब जैसे ही एडमिन की नियुक्ति होगी वैसे ही यहां भी सेवा शुरू हो जाएगी.

बैंककर्मी और डॉक्टर भी जुड़े
कई रिटायर्ड बैंककर्मी और डॉक्टर भी इस बैंक से जुड़ चुके हैं. उनका कहना है कि यह पहल सेवानिवृत्त लोगों और अकेलेपन से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है. इससे न केवल मदद मिलती है, बल्कि समाज में आपसी जुड़ाव और सेवा की भावना भी मजबूत होती है. सदस्य बनने के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है, जिसमें आधार, पैन या अन्य पहचान पत्र देना होता है. इसके बाद सदस्य का खाता खोला जाता है और उसमें समय दर्ज होने लगता है. खास बात यह है कि यहां हर व्यक्ति के समय की बराबर कीमत है. कानपुर का टाइम बैंक अब धीरे-धीरे और लोगों को जोड़ने की तैयारी में है. इसका उद्देश्य सिर्फ सेवा देना ही नहीं, बल्कि समाज में यह संदेश फैलाना है कि असली दौलत समय है और हर व्यक्ति का समय समान रूप से मूल्यवान है.

 

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