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देश

मोदी सरकार का नया बिल, पीएम और सीएम को हटाने की योजना और केजरीवाल का असर

नई दिल्ली
मोदी सरकार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गंभीर आरोप के मद्देनजर 30 दिनों से ज्यादा की जेल के बाद पद से हटाने वाला बिल लेकर आई है, जिसपर हंगामा मच गया है। अमित शाह के बुधवार को बिल लोकसभा में पेश करते हुए कांग्रेस, सपा, एआईएमआईएम समेत पूरे विपक्ष ने इसका जमकर विरोध किया। विपक्ष का आरोप है कि इस बिल के कानून बनने के बाद केंद्र सरकार उन राज्यों को टारगेट करेगी, जहां विपक्षी दलों की सरकार है, जबकि कानून के हिसाब से जब तक कोई आरोपी दोषी न साबित हो जाए, तब तक उसे निर्दोष ही माना जाता है। फिलहाल, इस बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) को भेज दिया गया है, जहां पक्ष-विपक्ष, दोनों के सांसद बिल के प्रावधानों पर विचार करेंगे, और फिर इसे अगले संसद सत्र में पास करवाने की कोशिश की जा सकती है। इस बिल के लाए जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकार ने इसे लाने का फैसला क्यों किया। इसके पीछे वजह दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तमिलनाडु के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी बताए जा रहे हैं।

केजरीवाल और बालाजी से कैसा कनेक्शन?
जहां अरविंद केजरीवाल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री हैं तो वहीं, सेंथिल बालाजी तमिलनाडु सरकार के पूर्व मंत्री हैं। हालांकि, दोनों में एक खास कनेक्शन यह है कि दोनों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और फिर जेल हुई, लेकिन काफी समय तक पद से इस्तीफा नहीं दिया। पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली के कथित शराब घोटाले में केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई और लंबे समय तक उन्होंने जेल से ही सरकार चलाई। एनडीटीवी ने सरकार के सूत्रों के हवाले से बताया, ''केजरीवाल के गिरफ्तारी के बाद भी इस्तीफा न देने की वहज से केंद्र सरकार ने एक महीने से ज्यादा जेल में बंद सीएम, मंत्रियों को हटाने के लिए कानून बनाने का फैसला किया।''

दिल्ली के कथित शराब घोटाले में आम आदमी पार्टी के कई मंत्रियों की गिरफ्तारी हुई थी। इसमें मार्च में केजरीवाल को अरेस्ट किया गया। माना जा रहा था कि वह गिरफ्तारी होने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने जेल से ही सरकार चलाई और जब वे जेल से बाहर आ गए, तब सितंबर में उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा देते हुए आतिशी को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी। सरकार के सूत्रों ने बताया कि जब केजरीवाल ने जेल से ही सरकार चलाने का फैसला किया था और इस्तीफा देने से मना कर दिया था, तभी सरकार यह कानून लेकर आना चाहती थी, लेकिन उस समय इसे प्रतिशोध की राजनीति की तरह विपक्ष इसे पेश करता। इसी वजह से सरकार ने इंतजार किया और अब मॉनसून सत्र में यह बिल लेकर आई।

बालाजी के मामले से भी ऐक्शन में आई सरकार
वहीं, तमिलनाडु के पू्र्व मंत्री सेंथिल बालाजी को भी 2023 में भ्रष्टाचार के एक मामले में अरेस्ट किया गया था, लेकिन उसके बाद भी वह बिना विभाग के मंत्री बने रहै। इस पर मद्रास हाई कोर्ट तक को आपत्ति जतानी पड़ी, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। हालांकि, जमानत मिलते ही उन्हें फिर से मंत्री पद दे दिया गया। लेकिन एक सुनवाई के दौरान जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस्तीफा देने या जमानत रद्द करने की धमकी दी, तब उन्होंने अपना पद छोड़ा। सरकारी सूत्र ने बताया कि इस मजाक को खत्म करने की जरूरत है। इसी के चलते सरकार अब पीएम-सीएम और मंत्रियों को हटाने वाला बिल लेकर आई है। हालांकि, चूंकि संविधान संशोधन के तहत दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, जिसकी वजह से बिल के संसद में पारित होना मुश्किल लगता है। अगर सरकार को बिल पास करवाना है तो उसे विपक्ष को भी साथ लेना पड़ेगा। हालांकि, विपक्षी सांसदों के विरोध के स्तर को देखते हुए यह कहना कठिन है कि वे बिल के वर्तमान प्रावधानों पर सहमत होंगे।

 

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