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राजनीति

सिंधिया ने सार्वजनिक रूप से थामा दिग्विजय का हाथ, भोपाल कार्यक्रम में गरजी तालियां

भोपाल

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक लंबे समय बाद ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सियासी गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का हाथ पकड़कर उन्हें मंच पर ले जाते नजर आ रहे हैं। पांच साल बाद दोनों नेता इस तरह एक साथ दिखाई दिए, जिससे अटकलों का दौर तेज हो गया है। 

यह वाकया भोपाल के रातीबड़ स्थित एक निजी स्कूल के उद्घाटन समारोह का है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मंच पर बैठे थे, जबकि दिग्विजय सिंह अपनी पत्नी के साथ सामने की कुर्सियों पर बैठे थे। सिंधिया की नजर जैसे ही उन पर पड़ी, वे मंच से उतरकर उनके पास गए, हाथ जोड़कर अभिवादन किया और फिर हाथ पकड़कर उन्हें मंच पर ले आए। इस दृश्य पर मौजूद लोग खुद को तालियां बजाने से नहीं रोक सकें।  

2020 के बाद पहली बार ऐसे साथ दिखे
मार्च 2020 में सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने और 22 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल होने के बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी का दौर चला था। कमलनाथ सरकार के गिरने के समय दिग्विजय सिंह और सिंधिया के रिश्ते बेहद तल्ख थे। ऐसे में उनका यह साथ बैठना पांच साल बाद की एक सियासी ‘सॉफ्ट मोमेंट’ के रूप में देखा जा रहा है।

सियासी अटकलें तेज
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में इस समय सिंधिया के लिए माहौल पूरी तरह सहज नहीं है। हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी बिना नाम लिए उन पर टिप्पणी की थी। ऐसे में अटकलें है कि ग्वालियर-चंबल में भाजपा के दोनों दिग्गज नेताओं के बीच गुटबाजी बहुत तेज चल रही है। वहीं, अब इस मुलाकात को लेकर चर्चा है कि क्या यह किसी नई सियासी बिसात की शुरुआत है या सिर्फ एक औपचारिक सौजन्य। दिलचस्प बात यह है कि इतिहास में राघौगढ़, जो दिग्विजय सिंह का गढ़ है, कभी ग्वालियर राजघराने के अधीन था। दिग्विजय ‘राजा साहब’ कहलाते हैं, जबकि सिंधिया को ‘महाराज’ कहा जाता है। दोनों घरानों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पुरानी है, लेकिन यह पल उस अदावत से अलग एक नई तस्वीर पेश करता है।

आस्तीन के सांपों से सचेत रहें…
दोनों नेता एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर चुके है। पिछले साल ग्वालियर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में दिग्विजय सिंह ने बिना किसी का नाम लिए कहा था कि आस्तीन के सांपों से सचेत रहें। इसके अलग-अलग मायने निकाले गए थे। राजनीतिक जानकारों ने बयान के मायने निकाले थे कि यह शायद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना साधा गया। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दिग्विजय सिंह पर कहा था कि पहले वे मेरे पिता पर निशाना साधते थे और अब मुझे पर निशाना साध रहे हैं। तब दिग्विजय सिंह ने कहा था कि वे अभी बच्चे हैं।

दिग्विजिय सिंह की कसम टूटी
दरअसल, करीब तीन माह पहले ग्वालियर में हुई संविधान बचाओ रैली में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एलान किया था कि वे अब कभी मंच पर नहीं बैठेंगे। उनका कहना था कि मंच की राजनीति खत्म होनी चाहिए और वे केवल अपनी बारी आने पर ही मंच पर जाएंगे, अन्यथा आमजनों के बीच बैठेंगे।

लेकिन शुक्रवार को एक निजी कार्यक्रम में दिग्विजय सिंह मंच पर बैठे नजर आए। इसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि क्या उनकी यह “कसम” टूट गई? हालांकि दिग्विजय सिंह का कहना है कि मंच पर न बैठने की बात उन्होंने कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रमों के संदर्भ में कही थी, जबकि यह कार्यक्रम निजी था। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वयं उन्हें मंच पर ले जाते दिखाई दिए।

पहले झुककर प्रणाम फिर हाथ पकड़कर ले चले सकारात्मक राजनीति का यह उदाहरण तब देखने को मिला जब भोपाल में स्कूल के लोकार्पण के कार्यक्रम में मंच पर आते ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सामने बैठे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पास जाकर स्नेह पूर्वक अभिवादन किया। इसके बाद उनका हाथ थामा और उन्हें मंच पर साथ लेकर आए। इस दौरान पूरे सभागार में तालियां गूंज उठीं।

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष खंडेलवाल से मिले सिंधिया केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भोपाल में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भेंट की। खंडेलवाल की नियुक्ति के पश्चात यह उनकी सिंधिया से दूसरी महत्वपूर्ण मुलाकात है। इससे पहले, दोनों नेताओं के बीच दिल्ली में सिंधिया के आवास पर एक लंबी और रणनीतिक बैठक हो चुकी है। इसके साथ सिंधिया ने प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा से भी भेंट की।

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