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मध्यप्रदेश

जल गंगा संवर्धन अभियान में वन विभाग की प्रभावी पहल

भोपाल
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में वन विभाग द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण और वन्य जीवों की जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश में अभियान 30 मार्च से क्रियान्वित है। अभियान 30 जून तक चलेगा। अभियान के तहत वन क्षेत्रों में तालाबों, झिरियों, सांसर, स्टॉप डैम और वाटर लिफ्टिंग सिस्टम जैसी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार कुल 308 तालाबों का निर्माण, 329 तालाबों का गहरीकरण, 371 सौसर निर्माण, 94 स्टॉप डैम, 1966 झिरिया निर्माण और 20 किलोमीटर वाटर लिफ्टिंग सिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। वन विभाग द्वारा जल संवर्धन अभियान में 97 तालाबों का निर्माण, 126 तालाबों का गहरीकरण, 215 सांसर, 106 स्टॉप डैम, 1035 झिरियों का निर्माण और 12 किलोमीटर वाटर लिफ्टिंग सिस्टम का कार्य पूरा किया जा चुका है। शेष जल संरचनाओं का निर्माण कार्य भी किया जा रहा है।

"अविरल निर्मल नर्मदा" योजना में किए जाएंगे पौध-रोपण एवं भू-जल संरक्षण के कार्य
"अविरल निर्मल नर्मदा" योजना में वर्ष 2025-26 में 5600 हेक्टेयर क्षेत्र में पौध-रोपण एवं भू-जल संरक्षण कार्य के लिए 70 करोड़ रुपये की परियोजना के लिये भारत सरकार से अनुमोदन प्राप्त हो चुका है और रोपण कार्य के लिये क्षेत्र की तैयारी तथा भू-जल संरक्षण कार्य प्रारंभ कर दिए गए हैं। इस क्षेत्र में वर्ष 2026 में रोपण कार्य किया जाएगा। वन विभाग की यह पहल प्रदेश में जल संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन की दिशा में एक सशक्त कदम है।

जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत वन विभाग ने जल संरक्षण, पौध-रोपण और जैव विविधता के संवर्धन के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वर्ष 2025-26 में विभिन्न योजनाओं के तहत 75 हजार 25 हेक्टेयर क्षेत्र में 5.38 करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए विभागीय रोपणियों में 6 करोड़ पौधों की तैयारी की गई है। भारत सरकार से 71 हजार 650 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए परियोजना की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। वर्ष 2026 में पौध-रोपण कार्य किया जाएगा। 702 अमृत सरोवर, 13 हजार 441 जल स्रोतों का सीमांकन, 11 हजार 588 भू-जल स्रोत चिन्हित कर 29 वनखंडों में 47 परकोलेशन टैंक का निर्माण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। विभागीय रोपणियों में 6 करोड़ पौधे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था, विभाग ने लगभग एक करोड़ अधिक 6.99 करोड़ पौधे तैयार कर लिये हैं।

वन्य-जीवों के संरक्षण के लिये किये जा रहे प्रयास
वन विभाग द्वारा अभियान में नदियों एवं अन्य जल स्रोतों में जलजीवों के संरक्षण की दिशा में भी उल्लेखनीय पहल की गई है। देवरी मुरैना में घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुआ संवर्धन केंद्र की स्थापना की गई है। वर्ष 2024-25 में 108 घड़ियाल शावकों को चंबल नदी में, और 10 कछुओं को जल स्रोतों में पुनः स्थापित किया गया। भोपाल के बड़ा तालाब में 5 कछुए छोड़े गए। वन विभाग द्वारा घड़ियाल संरक्षण केंद्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुविधाओं का विकास किया गया है। वर्तमान में 7 घड़ियाल अभयारणों का संचालन किया जा रहा है। प्रदेश में कुल 195 मगरमच्छ की गणना की गई है और 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सभी गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। इन सभी प्रयासों से प्रदेश की जलवायु, पारिस्थितिकी और जैव विविधता को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा। वन विभाग के प्रयासों से न केवल प्रदेश की पारिस्थितिकी सुदृढ़ हो रही है, बल्कि जल संरक्षण और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिल रहा है।

 

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