<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
खेल-जगत

8:21.67 का सीजन बेस्ट भी नहीं दिला सका मेडल, अविनाश साबले चौथे स्थान पर

नई दिल्ली
 एशियन गेम्स में भारत के स्टार एथलीट अविनाश साबले के फैंस को इस बार निराशा का सामना करना पड़ा है। पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज के फाइनल मुकाबले में अविनाश साबले पदक हासिल करने से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। साबले ने इस रेस में 8:21.67 का अपना इस सीजन का सर्वश्रेष्ठ समय निकाला लेकिन यह उन्हें पोडियम तक पहुंचाने के लिए काफी नहीं था।

जापान के खिलाड़ियों का कमाल
इस स्पर्धा में जापानी एथलीटों का पूरी तरह से दबदबा देखने को मिला। जापान के रयुजी मियुरा ने 8:17.36 का नया गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं उनके ही देश के रयोमा आओकी ने 8:17.60 का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय निकालकर सिल्वर मेडल जीता। कतर के जकारिया एलाहलामी ने 8:18.13 के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया।

पिछली बार जीता था गोल्ड
पिछली बार एशियन गेम्स में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने वाले अविनाश साबले इस बार अपने खिताब का बचाव नहीं कर सके। अविनाश भारतीय एथलेटिक्स के सबसे बड़े नामों में से एक हैं और पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में नेशनल रिकॉर्ड उनके ही नाम दर्ज है। उन्होंने 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी जहां उन्होंने केन्याई एथलीटों के वर्चस्व को तोड़ा था।

भारतीय सेना में शामिल
महाराष्ट्र के बीड़ जिले के एक छोटे से गांव मांडवा से ताल्लुक रखने वाले अविनाश साबले का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे साबले बचपन में स्कूल जाने के लिए रोजाना कई किलोमीटर पैदल या दौड़कर जाया करते थे, जिसने अनजाने में ही उनकी रनिंग की नींव रखी। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारतीय सेना में शामिल हो गए और महार रेजीमेंट का हिस्सा बने। सेना में रहते हुए ही उनकी प्रतिभा को पहचाना गया और उन्होंने प्रोफेशनल रनिंग की शुरुआत की, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button