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उत्तर प्रदेश

राहुल गांधी के गढ़ रायबरेली से अखिलेश की PDA रथयात्रा, सपा-कांग्रेस रिश्तों पर बढ़ी हलचल

लखनऊ
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 24 सितंबर 2026 को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से अपनी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रथयात्रा की शुरुआत की है। अखिलेश यादव ने रायबरेली का चुनाव राहुल गांधी को सीधे चुनौती देने के लिए किया है। अखिलेश ने इस यात्रा की शुरुआत अमेठी से इसलिए नहीं की क्योंकि उससे वह राहुल गांधी को सीधा संदेश नहीं दे पाते। वर्तमान में राहुल गांधी रायबरेली से लोकसभा के सांसद हैं। कांग्रेस पार्टी की स्थिति अमेठी और रायबरेली में भी अच्छी नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की अमेठी और रायबरेली लोकसभा सीट की 10 विधानसभा सीटों में से सात पर ज़मानत जब्त हो गई थी। राहुल गांधी 2024 में सिर्फ सपा के समर्थन के कारण ही रायबरेली से चुनाव लड़ने की हिम्मत कर सके थे।
 
2022 के विधानसभा चुनाव आंकड़ों के अनुसार, अमेठी लोकसभा सीट के तहत आने वाली 5 विधानसभा सीटों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा था। तिलोई में भाजपा/अपना दल को 99,472 वोट (48.54%), सपा को 71,643 वोट (35%), कांग्रेस को 21,978 वोट (10.7%) और बसपा को 6,120 वोट (2.99%) मिले। सलोन में भाजपा/अपना दल को 87,715 वोट (43.79%), सपा को 85,604 वोट (42.7%), कांग्रेस को 11,439 वोट (5.71%) और बसपा को 9,335 वोट (4.66%) मिले। जगदीशपुर में भाजपा/अपना दल को 89,315 वोट (43.94%), सपा को 27,971 वोट (13.8%), कांग्रेस को 66,491 वोट (32.7%) और बसपा को 10,198 वोट (5.02%) प्राप्त हुए। गौरीगंज में भाजपा/अपना दल को 72,077 वोट (35.53%), सपा को 79,040 वोट (39%), कांग्रेस को 28,964 वोट (14.3%) और बसपा को 9,872 वोट (4.87%) मिले। अमेठी विधानसभा में भाजपा/अपना दल को 70,121 वोट (36.93%), सपा को 88,217 वोट (46.5%), कांग्रेस को 14,080 वोट (7.42%) और बसपा को 10,202 वोट (5.37%) हासिल हुए। इस प्रकार अमेठी लोकसभा क्षेत्र में भाजपा/अपना दल को 4,18,700 वोट (41.82%), सपा को 3,52,475 वोट (35.2%), कांग्रेस को 1,42,956 वोट (14.3%) और बसपा को 45,727 वोट (4.57%) मिले।

रायबरेली लोकसभा सीट के तहत आने वाली विधानसभा सीटों पर प्रदर्शन इस प्रकार रहा था। बछरावां में भाजपा/अपना दल को 62,935 वोट (30.04%), सपा को 65,747 वोट (31.4%), कांग्रेस को 56,835 वोट (27.1%) और बसपा को 13,730 वोट (6.55%) मिले। हरचंदपुर में भाजपा/अपना दल को 78,009 वोट (38.69%), सपा को 92,498 वोट (45.9%), कांग्रेस को 16,230 वोट (8.05%) और बसपा को 7,335 वोट (3.64%) मिले। रायबरेली विधानसभा सीट पर भाजपा/अपना दल को 1,02,429 वोट (44.51%), सपा को 95,254 वोट (41.4%), कांग्रेस को 14,954 वोट (6.5%) और बसपा को 9,331 वोट (4.06%) प्राप्त हुए। सरेनी में भाजपा/अपना दल को 62,359 वोट (28.78%), सपा को 66,166 वोट (30.5%), कांग्रेस को 42,702 वोट (19.7%) और बसपा को 38,155 वोट (17.6%) हासिल हुए। ऊंचाहार में भाजपा/अपना दल को 75,893 वोट (35.79%), सपा को 82,514 वोट (38.9%), कांग्रेस को 9,985 वोट (4.71%) और बसपा को 34,692 वोट (16.4%) मिले। रायबरेली लोकसभा सीट का कुल योग देखें तो भाजपा/अपना दल को 3,81,625 वोट (35.67%), सपा को 4,02,179 वोट (37.6%), कांग्रेस को 1,40,706 वोट (13.2%) और बसपा को 1,03,243 वोट (9.65%) मिले।

अखिलेश यादव के इस कदम के जवाब में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने बयान दिया है कि यदि अखिलेश यादव रायबरेली और अमेठी जा सकते हैं, तो कांग्रेस भी समाजवादी पार्टी के गढ़ जैसे कन्नौज, इटावा और सैफई का रुख कर सकती है। अजय राय के इस बयान के जवाब में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और जसवंतनगर से विधायक शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि जसवंतनगर और इटावा में कांग्रेस को एक भी वोट नहीं मिलेगा। अजय राय और शिवपाल यादव की जुबानी जंग से पूर्व कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन के बीच भी बयानबाजी हो रही है।

कन्नौज और इटावा जिलों की छह में से चार विधानसभा सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने 2022 में चुनाव लड़ा था, जहां उसका प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा। छिबरामऊ से कांग्रेस प्रत्याशी विजय कुमार को 1,194 वोट (0.42%) मिले और वह 7वें स्थान पर रहे। कन्नौज से विनीता देवी को 1,786 वोट (0.66%) मिले और वह 5वें स्थान पर रहीं। इटावा से मोहम्मद राशिद को 1,476 वोट (0.6%) मिले तथा वह 5वें स्थान पर रहे। भरथना से स्नेह लता दोहरे को 1,854 वोट (0.75%) मिले और वह 5वें स्थान पर रहीं।

अखिलेश यादव का यह कदम कांग्रेस पार्टी के साथ सीटों के तालमेल से पूर्व ही अपनी ताकत का अहसास करवाने का प्रयास है। कांग्रेस और सपा गठबंधन के बीच भविष्य के सीट-बंटवारे की चर्चाओं के बीच राहुल गांधी के गढ़ से इस यात्रा को शुरू करने को लेकर राजनीतिक गलियारों में विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं कि सपा राज्य में खुद को मजबूत स्थिति में दिखाना चाहती है। कांग्रेस पार्टी की स्थिति उत्तर प्रदेश में काफी कमजोर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी केवल दो सीट जीत सकी थी। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी चार सीटों पर दूसरे पायदान पर रही। कांग्रेस पार्टी ने राज्य में 399 सीटों पर चुनाव लड़कर 387 सीटों पर ज़मानत जब्त करवाई थी।

कांग्रेस पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ी थी और छह सीटें जीतने में सफल हुई थी, जिसमें अमेठी और रायबरेली की लोकसभा सीटें भी शामिल हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अमेठी लोकसभा सीट से भाजपा की स्मृति ईरानी से चुनाव हार गई थी। 2019 में चुनाव हारने के डर से राहुल गांधी ने पहले ही केरल के वायनाड से नामांकन दाखिल कर दिया था। सपा को डर है कि अगर कांग्रेस पार्टी मजबूत हो गई तो उसका मुस्लिम जनाधार खिसक जाएगा और पार्टी कमजोर हो जाएगी, इसलिए सपा कांग्रेस को उसकी औकात में रखना चाहती है। दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी का प्रयास है कि वह सपा को कमजोर करे जिससे कि कांग्रेस पार्टी मजबूत हो सके। दोनों पार्टियों में मुस्लिम वोट बैंक के लिए आपस में प्रतिद्वंदिता है, जिसके तहत सहयोग के साथ ही अंदर ही अंदर आपसी प्रतिस्पर्धा भी देखी जाती है।

कांग्रेस पार्टी का एक प्रयास यह भी है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तरह ही उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव को कमजोर किया जाए। ममता बनर्जी को कमजोर करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने उनके साथ कोई गठबंधन नहीं किया था और कम से कम छह सीटों पर ममता बनर्जी को हराने का काम किया था। कांग्रेस पार्टी का प्रयास है कि 2029 के लोकसभा चुनाव के पूर्व सभी क्षेत्रीय क्षत्रपों को हराकर नेस्तनाबूत किया जाए, जिससे कि भाजपा और मोदी के खिलाफ राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का सीधा मुकाबला हो सके।

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