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छत्तीसगड़

सेवा की कहानी: हुनर से आत्मनिर्भर बनीं उर्मिला, बुटीक शुरू कर अब दूसरों को भी दे रहीं रोजगार

रायपुर

हुनर को जब प्रशिक्षण और अवसर का साथ मिलता है, तो वह आत्मनिर्भरता के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार की राह खोल सकता है। सूरजपुर जिले के ग्राम राजापुर, पोस्ट साल्ही की उर्मिला सिंह ने कौशल प्रशिक्षण से मिले हुनर को अपनी आजीविका का आधार बनाकर इसे साबित किया है। छह माह का प्रशिक्षण लेने के बाद उर्मिला ने अम्बिकापुर में अपना बुटीक शुरू किया। आज वे स्वयं प्रतिमाह 12 से 15 हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं, दो लोगों को रोजगार दे रही हैं और चार-पांच लोगों को सिलाई का प्रशिक्षण भी दे रही हैं।

खेती-किसानी से जुड़े परिवार की बेटी ने हुनर को बनाया ताकत

उर्मिला बताती हैं कि उनके माता-पिता खेती-बाड़ी करते हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा गांव में ही पूरी की और इसके बाद सूरजपुर से कॉलेज की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें कौशल विकास के तहत प्रशिक्षण की जानकारी मिली। उन्होंने जन शिक्षण संस्थान के माध्यम से छह माह का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण में मिले व्यावहारिक ज्ञान और सिलाई के हुनर ने उन्हें स्वयं का काम शुरू करने का आत्मविश्वास दिया।

प्रशिक्षण के बाद अम्बिकापुर में शुरू किया अपना बुटीक

कौशल प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उर्मिला ने नौकरी की प्रतीक्षा करने के बजाय अपने हुनर को स्वरोजगार में बदलने का निर्णय लिया। करीब तीन-चार महीने पहले उन्होंने अम्बिकापुर में अपना बुटीक शुरू किया। वे महिलाओं के विभिन्न प्रकार के परिधान तैयार करती हैं। प्रशिक्षण से मिली दक्षता का उपयोग करते हुए उन्होंने कम समय में ही अपने काम को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है।

खुद के साथ दूसरों के लिए भी खोली रोजगार की राह

उर्मिला की उपलब्धि केवल स्वयं का रोजगार शुरू करने तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने बुटीक में दो लोगों को रोजगार दिया है। इसके साथ ही चार से पांच लोगों को सिलाई की बारीकियां और परिधान तैयार करने का काम भी सिखा रही हैं, ताकि वे भी हुनर सीखकर अपनी आजीविका का साधन तैयार कर सकें।

इस तरह उर्मिला को प्रशिक्षण से मिला अवसर अब दूसरे लोगों तक भी पहुंच रहा है। उनका प्रयास बताता है कि कौशल विकास के माध्यम से स्वरोजगार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार किए जा सकते हैं।

शुरुआती दौर में ही 12 से 15 हजार रुपये की मासिक आमदनी

उर्मिला बताती हैं कि बुटीक को शुरू किए अभी तीन से चार महीने ही हुए हैं और इस शुरुआती दौर में उन्हें प्रतिमाह लगभग 12 से 15 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है। वे आने वाले समय में अपने काम को और आगे बढ़ाने के साथ अधिक लोगों को हुनर सिखाना चाहती हैं।

“हुनर ने अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया”

अपनी यात्रा साझा करते हुए उर्मिला सिंह ने कहा, “मैंने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत यह हुनर सीखा। इसके जरिए मैं अपने पैरों पर खड़ी हुई हूं। अब मैं दूसरे लोगों को भी सिखा रही हूं और दो लोगों को काम भी दिया है। हमें ऐसा अवसर और योजना मिली, जिससे हम अपने पैरों पर खड़े हो पाए। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहती हूं।”

कौशल से स्वरोजगार और फिर रोजगार सृजन तक का सफर

सेवा संकल्प अभियान के तहत उर्मिला सिंह की यह ‘सेवा की कहानी’ कौशल से स्वरोजगार और फिर रोजगार सृजन तक के सफर को सामने लाती है। प्रशिक्षण से मिले हुनर ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया और अब वही हुनर दूसरे लोगों के लिए भी आजीविका की राह तैयार कर रहा है।

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