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मध्यप्रदेश

विश्व रंग भोपाल का आठवां संस्करण 3 से 8 अक्टूबर तक नालंदा में

विश्वरंग, भोपाल का आठवां संस्करण नालंदा, बिहार में 3 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक

नालंदा में होगा भारतीय भाषाओं, संस्कृति और ज्ञान-परम्परा पर राष्ट्रीय संवाद

देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि और अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार होंगे सहभागी
भोपाल

भारत की भाषाई, साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को समकालीन संदर्भों से जोड़ते हुए नालंदा में एक राष्ट्रीय स्तर के बहुआयामी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। विश्वरंग, भोपाल द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षाविदों, साहित्यकारों, कलाकारों, अनुवादकों, शोधकर्ताओं और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता होगी।

इस आयोजन में रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल तथा नालंदा विश्वविद्यालय के साथ-साथ सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी, वैशाली, आइसेक्ट यूनिवर्सिटी हजारीबाग, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी, भोपाल, सी वी रमन यूनिवर्सिटी, बिलासपुर, सी वी रमन यूनिवर्सिटी, खण्डवा, गुवाहाटी विश्वविद्यालय, आईआईटी खड़गपुर, त्रिपुरा विश्वविद्यालय, मिजोरम विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), कलकत्ता विश्वविद्यालय, फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तथा एमिटी यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रहेगी। साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र से नन्द किशोर आचार्य, अरुण कमल, अलका सरावगी, ए. अरविन्दाक्षन, देवेन्द्र राज अंकुर, जितेंद्र श्रीवास्तव, जयंत परमार, प्रफुल्ल शिलेदार, यतीन्द्र मिश्र, सोमा बंद्योपाध्याय और अनंत विजय सहित अनेक प्रतिष्ठित रचनाकार एवं विचारक कार्यक्रम में सहभागी होंगे।

कार्यक्रम के लिए नालंदा का चयन केवल उसके ऐतिहासिक महत्व के कारण नहीं किया गया है। नालंदा भारतीय उपमहाद्वीप और एशिया के बीच ज्ञान, विचार और संस्कृति के ऐतिहासिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को आधार बनाकर कार्यक्रम में यह विचार किया जाएगा कि भारत की बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक विरासत आज के समय में किस प्रकार नए सांस्कृतिक संवाद और बौद्धिक सहयोग का आधार बन सकती है।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आयाम भारतीय ज्ञान-परम्परा और शिक्षा होगा। नालंदा की शिक्षा-दृष्टि, अनुसंधान, बहुविषयक अध्ययन तथा भारत की बौद्धिक परम्परा पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से प्राचीन भारतीय शिक्षा-अनुभव और समकालीन उच्च शिक्षा के बीच संभावित संवाद पर विचार किया जाएगा।

भारतीय भाषाओं को कार्यक्रम में विशेष महत्व दिया गया है। दक्षिण एशियाई भाषाओं की साझा सांस्कृतिक जमीन, भारतीय भाषाओं के पारस्परिक संबंध और भाषाई विविधता में निहित सांस्कृतिक एकात्मता पर विमर्श होगा। पूर्वोत्तर भारत की भाषाओं और साहित्य को भी कार्यक्रम में विशेष स्थान दिया गया है।

कार्यक्रम में भारतीय भाषाओं में साहित्यिक अनुवाद, भाषा और परम्परा के संबंध तथा अनुवाद के माध्यम से विभिन्न भारतीय समाजों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संवाद पर चर्चा होगी। भारतीय भाषाओं के साहित्य के अनुवाद-पाठ का आयोजन भी किया जाएगा।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष भारत के दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ ऐतिहासिक एवं समकालीन संबंधों से जुड़ा होगा। नालंदा से लेकर व्यापार, यात्राओं, सांस्कृतिक संपर्कों और विचारों के आदान-प्रदान तक भारत और एशिया के बीच बने संबंधों को वर्तमान संदर्भ में देखने का प्रयास किया जाएगा। इसी क्रम में व्यापार, संस्कृति और सतत विकास के अंतर्संबंधों पर भी चर्चा होगी, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरणीय संतुलन, उत्तरदायी उद्यम और विकास की नई अवधारणाओं को सांस्कृतिक दृष्टि से देखने का प्रयास किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंतर्गत पटना में रवीन्द्रनाथ टैगोर की सांस्कृतिक चेतना और उनके सांस्कृतिक अवदान पर विशेष विमर्श, चित्रकला प्रदर्शनी, चित्रकला कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी।

विश्वरंग के महानिदेशक संतोष चौबे के अनुसार, कार्यक्रम का मूल उद्देश्य अतीत के गौरव का केवल स्मरण करना नहीं, बल्कि भारत की ऐतिहासिक सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से जोड़कर देखना है। नालंदा इस संवाद के लिए एक ऐसी ऐतिहासिक भूमि उपलब्ध कराता है जहाँ भारत और एशिया के बीच ज्ञान, भाषा और संस्कृति के दीर्घकालिक संबंधों को एक साथ देखा जा सकता है।

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