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घंटों या एक-दो दिन के लिए किराये पर फ्लैट, रांची की गेटेड सोसाइटियों में बढ़ी चिंता

 रांची
 राजधानी में महंगे अपार्टमेंट और गेटेड सोसाइटियों में फ्लैट खरीदकर परिवार के साथ रहने वाले लोगों की सुरक्षा अब एक नए चलन से प्रभावित हो रही है। कुछ फ्लैटों को स्थायी किराये पर देने के बजाय कुछ घंटे या एक-दो दिन के शॉर्ट स्टे के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा रहा है।

बुकिंग के बाद कौन व्यक्ति फ्लैट में पहुंच रहा है, उसका स्थानीय स्तर पर सत्यापन हुआ है या नहीं और वहां ठहरने के दौरान वह क्या गतिविधियां कर रहा है, इसकी जानकारी कई बार सोसायटी के स्थायी निवासियों तक नहीं पहुंचती।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसे फ्लैटों में लगातार बदलते लोगों के आने-जाने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ रही है। उनका सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शार्ट स्टे के लिए दिए गए फ्लैट में कोई अपराध, मारपीट या दूसरी आपराधिक घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी- फ्लैट मालिक की, बिल्डर की, बुकिंग कराने वाले की या सोसायटी प्रबंधन की।

छह से आठ हजार रुपये तक में कुछ घंटों का ठहराव
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, कुछ फ्लैटों को प्रतिदिन करीब छह से आठ हजार रुपये तक की दर पर शॉर्ट स्टे अथवा कुछ घंटे के लिए उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। ऑनलाइन मंचों पर रांची में कम अवधि के लिए अपार्टमेंट और सर्विस्ड अपार्टमेंट की उपलब्धता जरूर दिखाई देती है।

एयरबीएनबी पर भी रांची में निजी वन बीएचके और अन्य आवासीय इकाइयां कम अवधि के ठहराव के लिए सूचीबद्ध हैं। एक सूची में संपत्ति को गेटेड आवासीय परिसर में स्थित बताते हुए छोटे और लंबे दोनों तरह के ठहराव की सुविधा दी गई है।

इससे साफ है कि कम अवधि के लिए आवासीय संपत्ति उपलब्ध कराने का आनलाइन बाजार राजधानी में मौजूद है, लेकिन इन संपत्तियों की कुल संख्या और उनमें से कितने सामान्य आवासीय फ्लैट हैं तथा कितने विधिवत लाइसेंस प्राप्त आवास/सर्विस्ड अपार्टमेंट हैं, इसका कोई समेकित सरकारी आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

रांची में ऑनलाइन रियल एस्टेट बाजार का आकार भी काफी बड़ा है। मैजिकब्रिक्स पर हाल में रांची में बिक्री के लिए 1,162 फ्लैट/अपार्टमेंट सूचीबद्ध दिखाई दिए। इसी मंच पर किराये के लिए 971 फ्लैट/अपार्टमेंट उपलब्ध बताए गए हैं।

स्थायी परिवारों को सबसे ज्यादा चिंता सत्यापन की
सोसायटी में रहने वाले लोगों की चिंता सिर्फ इस बात को लेकर नहीं है कि बाहर से लोग क्यों आ रहे हैं। सवाल यह है कि कौन आ रहा है और उसकी पहचान क्या है?

स्थायी निवासी चाहते हैं कि शार्ट स्टे के नाम पर किसी भी व्यक्ति को फ्लैट देने से पहले उसकी पहचान, मोबाइल नंबर, पता और ठहरने की अवधि का रिकार्ड रखा जाए। साथ ही सोसाइटी के सुरक्षा कर्मियों को भी इसकी जानकारी हो। कई मामलों में फ्लैट मालिक या बुकिंग संचालक केवल आनलाइन बुकिंग और भुगतान पर ध्यान देते हैं।

सोसाइटी प्रबंधन अथवा स्थानीय पुलिस को अतिथि की जानकारी देने की व्यवस्था स्पष्ट नहीं होती। इससे किसी घटना के बाद संबंधित व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

नशे और मारपीट की शिकायतें भी
कुछ सोसाइटियों के निवासियों ने ऐसे शार्ट स्टे फ्लैटों में नशे के सेवन, देर रात तक शोर-शराबे और आपसी विवाद की शिकायतें होने का दावा किया है। उनका कहना है कि कुछ मामलों में नशे के बाद मारपीट तक की स्थिति उत्पन्न हुई।

देह व्यापार का भी आरोप, लेकिन पुलिस जांच जरूरी
स्थानीय निवासियों की ओर से कुछ शॉर्ट स्टे फ्लैटों के इस्तेमाल को लेकर देह व्यापार की आशंका और आरोप भी लगाए जा रहे हैं। यही वजह है कि सुरक्षा के साथ-साथ प्रशासन के सामने यह चुनौती भी है कि आवासीय सोसायटियों में कम अवधि के ठहराव की गतिविधियों पर स्पष्ट निगरानी व्यवस्था कैसे बनाई जाए, ताकि सामान्य वैध अतिथि और आपराधिक गतिविधि के बीच अंतर किया जा सके।

कौन है जिम्मेदार, क्या कहता है कानून:
हाई कोर्ट के वरीय अधिवक्ता अनूप अग्रवाल ने बताया कि कानून में यह महत्वपूर्ण अंतर है कि किसी संपत्ति में अपराध हो जाना अपने आप में मालिक को उस अपराध का आरोपी नहीं बना देता। लेकिन यदि किसी मकान मालिक को यह जानकारी हो कि उसकी संपत्ति का इस्तेमाल वेश्यावृत्ति/वेश्यालय के लिए किया जा रहा है और वह जानबूझकर उसे इसकी अनुमति देता है, तो अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 के तहत मालिक, पट्टेदार या परिसर के प्रभारी व्यक्ति पर कार्रवाई का प्रावधान है

अधिनियम की धारा 3 में ऐसी स्थिति के लिए दंड का प्रावधान है। इसी तरह धारा 7 में सार्वजनिक स्थानों या उनके आसपास वेश्यावृत्ति से जुड़ी गतिविधियों के संबंध में अलग प्रावधान हैं।

आवासीय फ्लैट को लाजिंग की तरह चलाने पर भी सवाल
झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 317 में नगरपालिका क्षेत्र में किसी परिसर को होटल या लॉजिंग हाउस के रूप में इस्तेमाल करने के लिए लाइसेंस की व्यवस्था है। कानून नगर आयुक्त को ऐसे परिसर का निरीक्षण करने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में उपयोग बंद कराने की शक्ति भी देता है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि सिर्फ आवासीय उपयोग के लिए खरीदे गए फ्लैटों को नियमित रूप से व्यावसायिक शॉर्ट स्टे के रूप में संचालित किया जा रहा है या नहीं और संबंधित परिसर के पास आवश्यक लाइसेंस है या नहीं।

पुलिस सत्यापन की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत
झारखंड पुलिस की वेबसाइट पर नागरिक सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश उपलब्ध हैं और पुलिस स्थानीय स्तर पर व्यक्तियों के पूर्ववृत्त की जांच जैसी सेवाओं का उल्लेख करती है। पुलिस पोर्टल पर अपराध संबंधी शिकायत के लिए संबंधित थाने में सूचना देने की व्यवस्था भी स्पष्ट की गई है।

रांची में पहले भी किरायेदार सत्यापन को लेकर पुलिस की ओर से मकान मालिकों को जागरूक करने की बात सामने आई है। 2025 की एक रिपोर्ट में रांची पुलिस ने किरायेदारों का सत्यापन नहीं कराने को सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का विषय बताते हुए मकान मालिकों से इसका पालन करने की अपील की थी।

बीट रिपोर्टिंग नहीं होने से अपार्टमेंट-सोसाइटी के लोगों की पुलिस के पास
जानकारी नहीं
राजधानी में बीट रिपोर्टिंग व्यवस्था प्रभावी नहीं होने से पुलिस के पास अपने क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। वरीय अधिकारियों ने सभी थानेदारों को अपने-अपने थाना क्षेत्र में बीट पेट्रोलिंग कराने और संबंधित क्षेत्र में रहने वाले लोगों का विवरण रजिस्टर में दर्ज कराने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद अपार्टमेंट और सोसाइटी स्तर पर पुलिस की ओर से कोई रिपोर्ट तैयार नहीं की गई है

पुलिस को निर्देश दिया गया है कि बीट क्षेत्र में नियमित भ्रमण कर वहां रहने वाले लोगों, किरायेदारों और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाए। खासकर अपार्टमेंट और सोसाइटी में रहने वाले लोगों का सत्यापन कर रिकॉर्ड तैयार किया जाना है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की नियमित बीट रिपोर्टिंग नहीं होने से किसी घटना के बाद पुलिस को संबंधित क्षेत्र की जानकारी जुटाने में परेशानी होती है। अधिकारियों के निर्देश के बावजूद व्यवस्था अब तक जमीन पर प्रभावी नहीं दिख रही है।

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