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उत्तर प्रदेश

20 रुपये का सिक्का 5-6 रुपये में तैयार, एजेंटों को 15 रुपये तक में बेचता था गिरोह

सहारनपुर
यूपी के सहारनपुर में पीएनबी बैंक की करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपए के नकली नोटों की जांच के बीच ही नकली सिक्कों की फैक्ट्री ने खलबली मचाई हुई है। इसके सिंडिकेट की नींव दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखी गई थी। नकली सिक्कों के इस कारोबार में मुनाफे का बड़ा खेल सामने आया है। पुलिस पूछताछ के मुताबिक 20 रुपये का एक नकली सिक्का तैयार करने में करीब पांच से छह रुपये खर्च होते थे। तैयार सिक्के एजेंटों को 12 से 15 रुपये तक में बेचे जाते थे।

कम लागत और अधिक अंकित मूल्य के कारण गिरोह ने बड़े पैमाने पर उत्पादन को कारोबार का आधार बनाया। छह मशीनों से रोजाना 10 से 12 हजार सिक्के तैयार किए जाने की बात सामने आई है। गिरोह के मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह और सहारनपुर निवासी हिमांशु उर्फ गुल्लू की मुलाकात तिहाड़ जेल में ही हुई थी। पुलिस का दावा है कि इसी मुलाकात ने सहारनपुर में नकली सिक्कों की फैक्ट्री खड़ी कर दी।

सहारनपुर पुलिस के मुताबिक उपकार वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा था। उस समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। जेल में उसकी मुलाकात हिमांशु से हुई। दोनों जेल से बाहर आए तो संपर्क बना रहा। इसके बाद सहारनपुर में नकली सिक्कों के कारोबार की योजना तैयार हुई और धीरे-धीरे अन्य लोग भी इससे जुड़ते गए।

अलग-अलग हिस्सों में बंटा था काम
गिरोह ने काम को अलग-अलग हिस्सों में बांट रखा था। कोई मशीन और उत्पादन की जिम्मेदारी संभालता था तो कोई तैयार सिक्कों को एजेंटों तक पहुंचाता था। तीतरों क्षेत्र में मशीनें लगाकर बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया गया। पुलिस के अनुसार गिरोह में करीब आठ लोग सक्रिय थे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तिहाड़ में बनी इस कड़ी ने बाहर निकलने के बाद कितने लोगों को अपने साथ जोड़ा और नेटवर्क किन-किन शहरों तक पहुंचा। पुलिस को मिले सात रजिस्टर और आठ मोबाइल इस सवाल का जवाब तलाशने में अहम साबित हो सकते हैं। जांच एजेंसियां पुराने संपर्कों, एजेंटों और संभावित सहयोगियों की पहचान में जुटी हैं।

नेपाल में भी फैक्ट्री लगाने की कोशिश
पुलिस से बचने के लिए नेपाल में छिपे उपकार ने वहां भी नकली सिक्कों के निर्माण का ठिकाना खड़ा करने की कोशिश की थी। अब वर्षों बाद उसी नेटवर्क का उत्पादन केंद्र यूपी के सहारनपुर में तैयार किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक उपकार वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के धंधे में सक्रिय है। पहले सुनार का काम करने वाले उपकार ने सिक्के बनाने की तकनीकी जानकारी को बाद में नकली करेंसी के इस कारोबार में इस्तेमाल किया। वर्ष 2017 में उसे हरियाणा के कोंडली से गिरफ्तार किया गया था।

सहारनपुर में तैयार सिक्कों को खपाने के लिए भी नेटवर्क तैयार था। एजेंटों के जरिए माल शराब ठेकों, टोल प्लाजा और किराना दुकानों तक पहुंचाया जाना था। जांच में पंजाब से बिहार और पश्चिमी यूपी तक संपर्क सामने आए हैं। मधुबनी, भदोही और बदायूं के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस अब मोबाइल और रजिस्टरों के जरिए एजेंटों, मशीनों की व्यवस्था और सप्लाई चैन से जुड़े लोगों की कड़ियां जोड़ रही है।

पंजाब से बिहार तक फैला नेटवर्क
नकली सिक्कों के इस नेटवर्क की पहुंच कई राज्यों तक सामने आई है। मुख्य आरोपी उपकार लूथरा पंजाब का रहने वाला है। पुलिस जांच में पंजाब के साथ बिहार और उत्तर प्रदेश के मधुबनी, भदोही व बदायूं के नाम सामने आए हैं। पुराने संपर्कों और जेल में हुई मुलाकातों के बाद सहारनपुर में नेटवर्क खड़ा किया गया था।

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