<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
मध्यप्रदेश

पराली बनेगी कमाई का जरिया, विदिशा में CBG प्लांट से अन्नदाता बनेंगे ‘ऊर्जादाता’

 विदिशा
 जिस पराली या नरवाई को किसान फसल कटने के बाद खेत से हटाने के लिए जला देते हैं, वही पराली अब ईधन का कच्चा माल बनेगी। मक्का, धान, गेहूं सहित दूसरी फसलों के अवशेषों से अब कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) बनाने की तैयारी है। इसके लिए इंडियन ऑयल कार्पोरेशन जिले में सीबीजी प्लांट लगाने जा रहा है। यह प्लांट शुरू हो जाने के बाद क्षेत्र का किसान केवल अन्नदाता ही नहीं ऊर्जादाता भी बन जाएगा।

उपयुक्त जमीन की तलाश
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत बरवड़े ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से कलेक्टर अंशुल गुप्ता और आईओसीएल के अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने प्लांट स्थापना से संबंधित आवश्यक कार्रवाई शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने बताया कि इसके लिए नटेरन, बासौदा और कुरवाई क्षेत्र में 15 से 20 एकड़ सरकारी जमीन की तलाश हो रही है। एसडीएम को जमीन चिन्हित करने की कार्रवाई की जा रही है। बताया गया कि यह जमीन आईओसीएल को लंबी अवधि के पट्टे पर दी जाएगी।

किसानों की समस्या होगी दूर, कमाई भी होगी
फसल कटने के बाद खेत में बचने वाले अवशेष किसानों के लिए लंबे समय से परेशानी बने हुए हैं। इन्हें खेत से हटाने में मेहनत और खर्च लगता है। इससे बचने के लिए अधिकांश किसान इन अवशेषों को खेत में ही जला देते हैं। इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है। अब सीबीजी प्लांट के लिए क्षेत्र से मक्का, धान, गेहूं सहित विभिन्न फसलों के अवशेष एकत्रित किए जाएंगे। इनका उपयोग बायोगैस और अन्य उत्पाद तैयार करने में होगा। इससे किसानों को फसल की मुख्य उपज के अलावा खेत में बचे अवशेषों से भी आर्थिक लाभ मिलने का रास्ता बनेगा।

विदिशा में जलती है सबसे अधिक पराली
इस साल देश भर में पराली जलाने की 68,259 घटनाएं रिपोर्ट हुईं। उनमें से 39,165 यानी आधे से अधिक घटनाएं मध्यप्रदेश में दर्ज हुई हैं। मध्य प्रदेश में भी विदिशा जिला पराली जलाने में सबसे आगे रहा है। यहां इस साल 4465 घटनाएं रिकॉर्ड हो चुकी हैं। पिछले वर्ष भी यहां ऐसी ही स्थिति थी।

यह है सीबीजी
कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) जैविक कचरे या बायोमास से बनाई गई ऐसी गैस है, जिसका मुख्य घटक मीथेन होता है। इसे सामान्यतः बायोगैस को शुद्ध करके और संपीड़ित यानी कम्प्रेस करके तैयार किया जाता है। गुणवत्ता और उपयोग के लिहाज से यह काफी हद तक सीएनजी की तरह है। इसका उपयोग वाहनों में, औद्योगिक भट्टियों में, खाना पकाने में और कुछ संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।

    सीबीजी प्लांट की स्थापना से किसानों के लिए पराली अब केवल अपशिष्ट नहीं रहेगी, बल्कि उसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकेगा। इससे पराली जलाने की घटनाओं को कम करने, पर्यावरण संरक्षण और किसानों को कृषि अवशेषों का उचित मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी। प्लांट की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि चयन एवं अन्य प्रक्रियाओं को प्राथमिकता से आगे बढ़ाया जा रहा है।
    – अंशुल गुप्ता, कलेक्टर, विदिशा।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button