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मध्यप्रदेश

जहां गुरुर खत्म और गुण शुरू होते हैं, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2026
राष्ट्र निर्माण की पीढ़ी तैयार करते हैं शिक्षक : राज्यपाल श्री पटेल

जहां गुरुर खत्म और गुण शुरू होते हैं, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
जिन्हें ज़रूरत है, उन शिक्षकों को ऑफलाइन टीईटी परीक्षा दिलाने के किए जाएंगे प्रयास
शिक्षकों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की घोषणा
राज्यपाल श्री पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान
शिक्षक दिवस पर प्रदेश के 33 उत्कृष्ट शिक्षक हुए सम्मानित
प्रशासन अकादमी में हुआ राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह

भोपाल

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि बच्चों की पहली पाठशाला उसका घर होती है। माता-पिता उन्हें प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार देते हैं, लेकिन वास्तव में शिक्षक ही बच्चों को ज्ञान और संस्कारों से परिपूर्ण करते हैं। राष्ट्र् निर्माण की भावी पीढ़ी तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों को आत्मीय भाव से पढ़ाएं। उनकी बुद्धि, क्षमता और अपेक्षाओं को समझते हुए अपनापन और सहनशीलता का व्य्वहार करें। कठिनाईयों और जिज्ञासाओं को धैर्य के साथ सुनें। प्रेमपूर्वक व्यवहार करते हुए समाधान करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि बच्चे, विकसित भारत के कर्णधार है। शिक्षक इन कर्णधारों के शिल्प्कार है। इसलिए शिक्षक पहले स्वयं ज्ञान और नैतिक गुणों का आदर्श व्यक्ति बनें। बच्चों में ईमानदारी, सहनशीलता, जुझारूपन आदि गुणों का विकास कर, उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करें।

राज्यापाल श्री पटेल शनिवार को शिक्षक दिवस पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में हुए राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मा्न समारोह 2026 को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मा्न-2026 और गत वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्तकर्ता शिक्षकों को सम्मानित कर सभी को शिक्षक दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी। राज्यपाल श्री पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। मां सरस्वती और डॉ. सर्वपल्ली् राधाकृष्ण्न के चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया। राज्यपाल श्री पटेल का मुख्यतमंत्री डॉ. यादव ने पौधा भेंट कर स्वागत किया। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया।

राज्यापाल श्री पटेल ने कहा कि राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार- 2026 और गत वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से पुरस्कृत शिक्षकों के सम्मान का यह आयोजन, उन सभी शिक्षकों को नमन करने का प्रसंग है, जो ज्ञान और संस्कार से राष्ट्र का भविष्य गढ़ रहे हैं। माता-पिता तो केवल बच्चे को जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक बच्चे के व्यक्तित्व को दिशा देकर आदर्श नागरिक बनाने का महान कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजनरी नेतृत्व में देश ने नई सोच और नए कौशल के द्वारा शिक्षा को नये भारत की शक्ति बनाने का संकल्प, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के रूप में लिया है। शिक्षक दिवस पर सभी शिक्षक, भारत को ज्ञान की महाशक्ति बनाने का संकल्प ग्रहण करें।

शिक्षा को निरंतर अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन की जरूरत

राज्यापाल श्री पटेल ने कहा कि आज की दुनिया में शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रह सकती, उसे बदलती वैश्विक आवश्यकताओं और रोजगार के नए अवसरों के अनुरुप निरंतर अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन करते रहना होगा। समय की जरूरत है कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़कर, हमारी शिक्षा को नई पहचान और शक्ति प्रदान करें। कला, विज्ञान, खेल, कौशल और व्यावसायिक शिक्षा के बीच की दीवारे हटाते हुए, विद्यार्थियों को उनकी रुचि से विषय चुन कर पढ़ने का भरपूर अवसर दिया जाए। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि आपको अब पाठ पढ़ाने से आगे बढ़कर, विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचान कर, उन्हें प्रेरित करने और सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक के रूप में आगे आना होगा।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2026 में आज प्रदेश के 33 शिक्षकों का सम्मान हुआ है। भारत के दूसरे राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जन्म जयंती के अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई देता हूं। यह आयोजन हमारे शिक्षकों को नमन करने का अवसर है, जो ज्ञान और संस्कार का देश का भविष्य गढ़ रहे हैं। माता-पिता और शिक्षक बच्चों को संस्कार देकर बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने शिक्षा को नए भारत की शक्ति बनाने का संकल्प राष्ट्रीय शिक्षा नीति के रूप में लिया है। उन्होंने शिक्षकों से अनुरोध किया कि वे भारत को महाशक्ति बनाने का संकल्प लें। आज शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। उसे वैश्विक जरूरतों और रोजगार के अवसरों के अनुरूप अपग्रेड और इनोवेट करने की आवश्यकता है। बच्चों को उनकी रुचि के विषय चुनने का अवसर दिया जाए। शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को खोजें और उसे आगे बढ़ने में सहयोग करें। बच्चों को संस्कारित करने में माता-पिता की जिम्मेदारी अहम है। तभी हमें देश के अच्छे नागरिक मिलेंगे। माता-पिता, बड़े भाई-बहन बच्चों से पूछें कि आज स्कूल में क्या पढ़ाया। हमारे लिए सभी शिक्षक सम्मानीय हैं। शिक्षक अपने परिवार के बच्चों की तरह उन्हें पढ़ाएं। बड़े होकर विद्यार्थी अपने शिक्षक को कभी नहीं भूलते हैं। आज सिखाए हुए बच्चे विकसित भारत @2047 के संकल्प में योगदान देंगे। बच्चों को सहनशील बनाएं। कई बच्चे मानसिक परेशानी में गलत कदम उठा लेते हैं। ऐसे बच्चों को प्यार से समझाएं। हमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी है, जो अपने माता-पिता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी न भूलें।

अध्यक्षीय संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुरु शिष्य परम्परा भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर हैं। गुरुजन नि:संदेह विशेष भी है और हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परम्पराओं का विशेषण भी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में देश का मान निरंतर बढ़ रहा है। इसके पीछे गुरु की महिमा है, क्योंकि जहां गुरूर खत्म होता है, और गुण शुरू होता है, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है। गुरु की दृष्टि से ही शिक्षित समाज की सृष्टि होती है। उन्होंने कहा कि हमारे गुरुजन एक दीपक की तरह स्वयं अंधेरे में रहकर अपने विद्यार्थियों को शिक्षित कर उनका पूरा जीवन-चरित्र आलोकित करते हैं। इस दुनिया में माता-पिता के बाद वो शिक्षक ही हैं, जो यह कामना करते हैं कि आप वह बनें, जो आप वास्तव में बनना चाहते हैं। आपको वह सब मिले, जो आप पाना चाहते हैं। इसीलिए गुरुजन सदैव वंदनीय हैं, पूजनीय हैं। इनका सदैव आदर-सम्मान और सत्कार करना हम सबका कर्तव्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षकों के इस सम्मान समारोह में घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश के जिन वरिष्ठ शिक्षकों को टीईटी की परीक्षा देनी है और जिन्हें ऐसी ज़रूरत है, उन्हें ऑफलाइन टीईटी परीक्षा दिलाने के प्रयास और प्रबंध किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की गौरवशाली गुरुकुल और गुरु-शिष्य परंपरा दुनिया में सबसे प्राचीन है। भारत की मंशा कभी किसी देश को अधीन करने की नहीं रही। हम वसुधैब कुटुम्बकम की भावना से मानवता को बढ़ाने के लिए कार्य करते आए हैं। प्राचीन काल में भारत ने तक्षशिला, नालंदा और विक्रमजीत शिला विश्वविद्यालयों के माध्यम से दुनियाभर के विद्यार्थियों को शिक्षित किया। वर्तमान समय ऐसा है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत शांति और स्थिरता के साथ सुदृढ़ अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और दुनिया भारत की ओर बड़ी आशा के साथ देख रही है। आजादी के बाद भारत ने गुट निरपेक्ष नीति अपनाई थी और वह समय आया है, जब प्रधानमंत्री श्री मोदी दुनिया के अलग-अलग शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों से पूरे सम्मान के साथ मुलाकात और चर्चा करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का नक्शा कागजों पर बनता है, लेकिन देश की किस्मत हमारे गुरुजन कक्षाओं में बनाते हैं। हमारे शिक्षक और गुरुजन इन कक्षाओं के अधिपति हैं। शिक्षक कई पीढ़ियों तक अपने शिष्य की प्रगति से आनंदित होता है। उसे जीवन में सबसे अधिक गर्व तब महसूस होता है, जब वो शिष्य को स्वयं से आगे बढ़ते हुए देखता है। मध्यप्रदेश सरकार सभी शिक्षकों की मेहनत का सम्मान करती है। जब बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम सामने आते हैं तो इनकी मेरिट लिस्ट में 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे हमारे शासकीय स्कूलों के होते हैं, जो शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिश्रम के कारण वहां तक पहुंच पाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार शिक्षकों के लिए जो बेहतर हो सकता है, ऐसे सभी जरूरी निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रही टीईटी की परीक्षा ऑफलाइन मोड पर होगी। शिक्षा विभाग के आधार पर शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए हम प्रयास कर रहे हैं। हमारे शासकीय स्कूल, प्राइवेट स्कूलों से बेहतर होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती ऐसी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण स्वयं शिक्षा ग्रहण करने के लिए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम आए थे। जहां उन्होंने 64 कलाएं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया। श्रीकृष्ण के गुरु महर्षि सांदीपनि ने अपने शिष्य को जगद्गुरु की उपाधि दी। उन्होंने अपने शिष्य में भविष्य का पुरुषार्थ और पराक्रम देख लिया था। इसी प्रकार महर्षि विश्वामित्र ने बाल्यकाल में प्रभु श्रीराम और उनके भाइयों में पराक्रम देखा था। वे राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ ले गए और श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बनाया।

स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षक दिवस को पूरा देश गुरुजनों के सम्मान के रूप में देखता है। भविष्य में हमारी युवा पीढ़ी अगर देश को आगे बढ़ाएगी तो इसमें हमारे अभिभावकों और गुरुजनों का विशेष योगदान होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल में देश की शिक्षण पद्धति की चुनौतियां खत्म हो रही हैं। देश में शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है। मध्यप्रदेश में यह सबसे पहले उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लागू करवाई थी। आज का दिन शिक्षकों के प्रति हमारी कृतज्ञता प्रकट करने का है। राज्य सरकार अच्छा कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान कर रही है। प्रदेश का हर शिक्षक हमारी शिक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी है। नक्सल प्रभावित रहे बालाघाट जिले में शिक्षकों ने स्कूलों के माध्यम से बच्चों को अच्छे संस्कार दिए। कई शिक्षक ऐसे हैं, जो अपने वेतन की हिस्सेदारी भी स्कूल को आदर्श विद्यालय बनाने में लगा देते हैं। बच्चों को स्वयं साइकिल की घंटी बजाकर स्कूल आने के लिए प्रेरित करते हैं। हमारी सरकार कानूनी बाधाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए शिक्षकों की बेहतरी के लिए कार्य कर रही है। विकसित भारत @2047 के संकल्प की पूर्ति में सभी शिक्षकगणों का अहम योगदान होगा।

कार्यक्रम में जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुर्नवास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग, विधायक श्री भगवानदास सबनानी, नगर निगम अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी, आयुक्त लोक शिक्षण श्री अभिषेक सिंह, स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, सम्मानित शिक्षकगण एवं उनके परिजन भी उपस्थित थे।

इन उत्कृष्ट शिक्षकों का हुआ सम्मान

समारोह में श्री शिवलाल दांगी (सुसनेर), श्री धन्नालाल बिसेन (बालाघाट), श्री रीतेश कुमार पथाड़े (बैतूल), श्री सुखनंदन साहू (दमोह), श्री नरेंद्र कुमार भारद्वाज (गुना), श्री ओम प्रकाश विश्वकर्मा (नर्मदापुरम), श्री महेंद्र सिंह ठाकुर (कटनी), श्री राकेश कुमार गुप्ता (मंदसौर), सुश्री शिखा शर्मा (नरसिंहपुर), श्री लोकेंद्र सिंह पंवार (नीमच), सुश्री ज्योति पाठक (निवाड़ी), श्री राकेश कुमार वर्मा (रायसेन), श्री सुरेश चंद्र सोनी (राजगढ़), सुश्री शर्मिला उपाध्याय (रतलाम), सुश्री रीनादेवी कटरे (सिवनी), श्री हेमंत कुमार वैद्य (शाजापुर), श्री राकेश द्विवेदी (सीधी), सुश्री सीमा परमार (उज्जैन), सुश्री पूनम मिश्रा (बालाघाट), श्री बिहारीलाल प्रजापति (छतरपुर), श्री अरुण कुमार भादे (छिंदवाड़ा), श्री बलराम अहिरवार (दमोह), श्री मुकेश कुमार शर्मा (गुना), श्री अरुण कुमार मित्तल (इंदौर), श्री मुकेश प्रजापति (मंदसौर), श्री मनीष तिवारी (नरसिंहपुर), श्री अजय कुमार मिश्रा, श्री मुकेश नागर (राजगढ़), श्री राजेश महेश्वरी (रतलाम), श्री मोहित कुमार गर्ग (सतना), सुश्री पूजा पांडे (सिवनी), श्री सतीश पांडे (सीधी), सुश्री श्वेता तिवारी (उज्जैन), सुश्री अजिता, श्रीमती शीला पटेल (राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त) तथा श्री भैरूलाल ओसारा (राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त) ने सम्मान पाया। इन शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र एवं 25 हजार रुपए नगद सम्मान राशि देकर सम्मानित किया गया। 

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