गाजियाबाद में स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी और टीकाकरण पर सवाल, सूचना आयुक्त ने निगम से मांगे दस्तावेज

गाजियाबाद
राज्य सूचना आयोग ने गाजियाबाद नगर निगम को आवारा कुत्तों (स्ट्रीट डॉग्स) के नसबंदी और टीकाकरण अभियान को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की पीठ ने निगम के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें एनजीओ को किए गए भुगतान की जानकारी को 'थर्ड पार्टी की आर्थिक हित से जुड़ी सूचना' बताकर देने से इनकार किया गया था।
सूचना आयोग ने नगर निगम से स्पष्ट कहा, 'अगर स्ट्रीट डॉग्स को वैक्सीन दी जा रही है तो वे कहीं से खरीदी भी जा रही होंगी, दिखाइए उसके कागज।'
क्या है पूरा मामला?
एक आरटीआई आवेदन के जवाब में गाजियाबाद नगर निगम ने बताया था कि नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का काम एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के माध्यम से कराया जा रहा है। इसमें निगम ने दावा किया था कि 1 अक्टूबर 2023 से 15 अप्रैल 2026 के बीच गाजियाबाद नगर निगम सीमा क्षेत्र में 22,494 स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी व टीकाकरण किया गया है।
GDA के दावों पर क्यों खड़े हुए सवाल?
हालांकि, इस दावे के बाद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण को लेकर सवाल उठने लगे क्योंकि 2020 में हुए पशु सर्वे में शहर में करीब 48 हजार कुत्ते होने का अनुमान लगाया गया था। इसके मुकाबले नगर निगम अब तक 53,447 से अधिक कुत्तों का स्टरलाइजेशन कराने का दावा सवाल खड़े कर रहा था। इसके बाद ही आरटीआई के जरिये मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
भुगतान की जानकारी छिपाने का आरोप
आरटीआई कार्यकर्ता की ओर से जब इस कार्य के बदले एनजीओ को दिए गए भुगतान का ब्योरा मांगा गया, तो नगर निगम ने यह कहते हुए जानकारी देने से मना कर दिया कि यह तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के वित्तीय हितों से जुड़ी निजी जानकारी है।
सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम के मुख्य आदेश
निगम के इसी जवाब से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने नगर निगम के रवैये पर सवाल खड़े किए और निम्नलिखित निर्देश दिए…
सरकारी कोष के इस्तेमाल का हिसाब दें: यह थर्ड पार्टी का मामला नहीं है, क्योंकि आवेदक ने एनजीओ की बैलेंस शीट या बैंक स्टेटमेंट नहीं मांगा है। सरकारी खजाने से जो पैसा एनजीओ को दिया गया है, उसका ब्योरा जनता के सामने आना चाहिए।
सत्यापन की प्रणाली की जानकारी दें: एनजीओ ने 22,494 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का दावा किया है, लेकिन इस दावे को सत्यापित (Verify) करने के लिए नगर निगम के पास क्या सिस्टम है, इसका ब्योरा उपलब्ध कराना होगा।
वैक्सीन खरीद का हिसाब दें: एनजीओ ने इतनी बड़ी संख्या में टीके (वैक्सीन) कहां से खरीदे, इसके बिल और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।




