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देश

सुप्रीम कोर्ट की ‘स्पेशल पावर’ क्या है? जानें आर्टिकल 142, जिससे छात्रों को मिली बड़ी राहत

नई दिल्ली
 नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली समेत देशभर में हुए छात्र प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश आया है। शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 142 की शक्तियों का इस्तेमाल करके प्रदर्शनकारी छात्रों के दर्ज FIR रद्द करने का आदेश दिया है। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की।

सभी एफआईआर रद्द होंगे
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने का आदेश दिया। दिल्ली पुलिस सिर्फ उन 2873 लोगों के खिलाफ FIR जारी रखेगी जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है। साथ ही चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर किसी राज्य में कोई एफआईआर है जिसकी जानकारी अभी हमें नहीं दी गई है तो उसे रद्द करने की मांग का राज्य विरोध नहीं करेंगे।

20 से 26 जुलाई की घटनाओं पर नई FIR भी नहीं

शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि 20 से 26 जुलाई के बीच हुई घटनाओं को लेकर कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाए। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की छूट दी है, जिनका उल्लेख अदालत के समक्ष दाखिल आवेदन में किया गया है. अगर जांच में इन लोगों के दो अपराधों में शामिल होने की बात सामने आती है तो उनके खिलाफ नई FIR दर्ज की जा सकेगी। 

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन 2,873 लोगों के खिलाफ दर्ज होने वाली किसी भी नई FIR से उनके कानूनी उपाय अपनाने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा. वे कानून के तहत उपलब्ध राहत के लिए अदालत का रुख कर सकेंगे। 

देशभर के लिए बनेगा मुआवजे का मैकेनिज्म
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों के साथ ही देशव्यापी मुआवजा व्यवस्था तैयार करने का भी निर्देश दिया है. केंद्र सरकार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श कर मुआवजे के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करना होगा। 

कोर्ट ने कहा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस फ्रेमवर्क को मुआवजा देने की नियमित व्यवस्था के रूप में अपनाएंगे. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को NEET 2026 से जुड़ी आत्महत्या के मामलों में तीन महीने के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दिया है। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर CJP के प्रवक्ता ने अदालत का आभार जताया. उन्होंने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आज जो किया है, वह बेहद महत्वपूर्ण है। 

छात्रों के खिलाफ अब कोई नई FIR दर्ज नहीं होगी
अदालत ने कहा कि हम अनुच्छेद 142 के तहत इन आवेदनों को स्वीकार करते हुए यह आदेश दे रहे हैं कि अगर किसी भी राज्य में इन्हीं मामलों को लेकर और एफआईआर हैं, तो उन पर जांच बंद कर दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पेपर लीक के खिलाफ धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ अब कोई नई FIR दर्ज नहीं होगी।

मुआवजे को लेकर तीन महीने में बने नीति
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जहां तक NEET परीक्षा, 2026 के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के मुआवजे का सवाल है, हमें बताया गया है कि इसके बारे में नीति 3 महीने में बना ली जाएगी। इस नीति को 3 महीने में पूरा कर मुआवजा दिया जाए।

सीजेआई ने कहा कि 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में हज़ारों छात्रों ने आंदोलन में हिस्सा लिया। पुलिस ने कुल 13 एफआईआर दर्ज की थी। दिल्ली, महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल के आवेदन हैं। इनमें एफआईआर का विवरण है। हमें बताया गया है कि दिल्ली पुलिस पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों पर नई एफआईआर करेगी। और कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं होगी।

क्या है आर्टिकल 142?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी भी लंबित मामले में "पूर्ण न्याय" (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश या डिक्री जारी करने का विशेष अधिकार देता है. इसका मतलब है कि अगर अदालत को लगता है कि सामान्य कानूनी प्रक्रिया (Standard legal procedure) से न्याय पूरा नहीं हो पाएगा, तो फिर सर्वोच्च अदालत इसका इस्तेमाल कर सकती है। 

संविधान में साफ कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ऐसा कोई भी आदेश पारित कर सकता है, जो किसी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए जरूरी हो. अदालत के ऐसे आदेश पूरे भारत में लागू होते हैं। 

सीजेपी ने 5 सितंबर का प्रोटेस्ट वापस लिया, सौरव दास ने क्या कहा?
सौरव दास ने सुनवाई के दौरान पार्टी का स्टेटमेंट पढते हुए कहा कि CJP के को-कन्वीनर के तौर पर, मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत सरकार के सकरात्मक भरोसे और आज ज्यूडिशियल सैंक्टिसिटी को देखते हुए, और इस कोर्ट के पास किए गए ऑर्डर को देखते हुए, CJP 5 सितंबर को मार्च का कॉल वापस लेना सही समझता है और आज के ऑर्डर का पालन करने की उम्मीद करता है। मैं इस फ़ैसले के लिए कोर्ट को और दोनों तरफ़ के वकील, सॉलिसिटर जनरल को उनकी कोशिशों के लिए भी धन्यवाद देता हूं।

सुनवाई के दौरान एक ऐसा भी मौका आया जब सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर दोनों पक्ष आपस में विश्वास दिखाएं, तो सभी मुद्दे एक-एक करके हल हो सकते हैं। दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जो इतना मुश्किल हो कि उस पर खुले दिमाग से चर्चा न की जा सके।

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