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मध्यप्रदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में नशामुक्त भारत अभियान को मिली नई गति

भोपाल

भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और प्रतिभा को सही दिशा देना राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति केवल व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के भविष्य से जुड़ी एक गंभीर सामाजिक चुनौती है। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में नशामुक्त भारत अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य केवल नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता पैदा करना नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक शक्ति के माध्यम से नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास उपलब्ध कराकर उन्हें मुख्यधारा में वापस लाना भी है।

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नशामुक्त भारत अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने सामाजिक सहभागिता, जनजागरूकता, उपचार, पुनर्वास और संस्थागत समन्वय को अभियान का आधार बनाया है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा नशे के विरुद्ध व्यापक स्तर पर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

नशे के खिलाफ जनजागरण से जनआंदोलन तक

नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करने के साथ ही उसके परिवार, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। युवा पीढ़ी को नशे से बचाना और नशे की चपेट में आ चुके लोगों को सम्मानपूर्वक नया जीवन देना सरकार और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

राज्य सरकार ने इस चुनौती को केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं देखा है। अभियान में शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। यही सामूहिकता नशामुक्ति अभियान की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।

राज्य में नशामुक्ति के संबंध में व्यापक जनजागरूकता के लिए 213 पंजीकृत संस्थाएं कार्यरत हैं। इन संस्थाओं की भूमिका नशे के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों तक सहायता पहुंचाने की भी है।

मध्यप्रदेश के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

नशामुक्त भारत अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश द्वारा किए गए प्रभावी प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। वर्ष 2023-24 के लिए संस्थागत पुरस्कार श्रेणी में शहीद भगत सेवा समिति, रीवा तथा व्यक्तिगत श्रेणी में  राजीव तिवारी, मुक्ति नशामुक्ति केंद्र, भोपाल को सम्मानित किया गया।

13 अगस्त 2025 को भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय नशामुक्ति शपथ ग्रहण समारोह में इन प्रयासों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों की उपलब्धि है, बल्कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए मध्यप्रदेश की सामूहिक प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है।

पुनर्वास और उपचार की सुदृढ़ व्यवस्था

नशामुक्ति अभियान का एक महत्वपूर्ण पक्ष उन लोगों को नई जिंदगी देना है, जो नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों को केवल नशे से दूर करना नहीं, बल्कि उपचार, परामर्श और पुनर्वास के माध्यम से उन्हें समाज की मुख्यधारा से पुनः जोड़ना भी है।

प्रदेश में 13 नशामुक्ति सह पुनर्वास केंद्र (IRCA) संचालित हैं। इसके साथ ही 7 आउटरीच एंड ड्रॉप इन सेंटर (ODIC) तथा 3 कम्युनिटी बेस्ड पीयर-लेड इंटरवेंशन सेंटर (CPLI) संचालित किए जा रहे हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से नशे से प्रभावित व्यक्तियों तक पहुंचकर उन्हें उपचार और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की स्थापना और संचालन के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के 11 केंद्रीय जिलों—भोपाल, सागर, इंदौर, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर, नरसिंहपुर, सतना, बड़वानी, नरसिंहपुर और उज्जैन में नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने के लिए वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान की गई हैं। साथ ही नशामुक्ति से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है।

12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स बने बदलाव के सहभागी

नशे के विरुद्ध लड़ाई को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश में 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स तैयार किए गए हैं। ये स्वयंसेवक प्रदेशभर में नशे के दुष्परिणामों के प्रति आमजन को जागरूक कर रहे हैं तथा नशामुक्त भारत अभियान से जुड़ी गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं।

स्वयंसेवकों की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नशे की समस्या का समाधान केवल कानून और प्रशासन के माध्यम से संभव नहीं है। परिवार, समाज और समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। मास्टर वॉलंटियर्स स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने, युवाओं से संवाद स्थापित करने और नशामुक्ति गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

युवाओं और विद्यार्थियों पर विशेष फोकस

मध्यप्रदेश में अभियान के दौरान युवाओं और विद्यार्थियों को विशेष रूप से जागरूक करने पर जोर दिया गया है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर नशामुक्ति से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए। 18 नवंबर 2025 को नशामुक्त भारत अभियान की पांचवीं वर्षगांठ के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं और विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ा गया।

डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए QR Code के माध्यम से लगभग 2.46 लाख ऑनलाइन ई-प्लेज भी कराए गए। यह अभियान में आधुनिक तकनीक के उपयोग और युवाओं की व्यापक भागीदारी का उदाहरण है।

राज्य में 31 मई 2025 को विश्व तंबाकू निषेध दिवस, 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस, 2 से 8 अक्टूबर तक मद्य निषेध सप्ताह तथा 30 जनवरी 2026 को मद्य निषेध संकल्प दिवस के अवसर पर विशेष जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक नुकसान के प्रति जागरूक किया गया।

“नशे से दूरी है बहुत जरूरी” : पुलिस की प्रभावी भागीदारी

नशामुक्त समाज के निर्माण में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा “नशे से दूरी है बहुत जरूरी” जैसे विशेष अभियान संचालित कर नशे के खिलाफ जनजागरूकता का व्यापक संदेश दिया गया। पुलिस की सहभागिता से अभियान को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने में मदद मिली।

इस तरह विभिन्न विभागों, पुलिस, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थाओं और नागरिक समाज के बीच समन्वय स्थापित कर नशे के विरुद्ध व्यापक वातावरण तैयार किया जा रहा है। नशे के अवैध कारोबार पर नियंत्रण और समाज में नशे के प्रति जागरूकता—दोनों स्तरों पर प्रयास किए जाने से अभियान अधिक प्रभावी बनता है।

 नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में सामाजिक भागीदारी को बल

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में नशामुक्त भारत अभियान को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका मानना है कि नशे के विरुद्ध संघर्ष में समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे आवश्यक है। केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हो सकते; जब परिवार, शिक्षक, युवा, सामाजिक संस्थाएं और जनप्रतिनिधि एक साथ खड़े होते हैं, तभी स्थायी सामाजिक परिवर्तन संभव होता है।

विभागीय प्रयासों के माध्यम से नशामुक्ति के क्षेत्र में जागरूकता के साथ-साथ उपचार एवं पुनर्वास की व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य नशे की चपेट में आए व्यक्ति को अपराधी या उपेक्षित व्यक्ति के रूप में देखने के बजाय उसे उपचार और पुनर्वास की आवश्यकता वाले व्यक्ति के रूप में सहयोग देना है।

नशामुक्त मध्यप्रदेश : सामूहिक संकल्प की दिशा

नशामुक्त समाज का निर्माण के लिए प्रत्येक परिवार और नागरिक को जिम्मेदारी निभानी होगी। युवाओं को नशे से दूर रखने, नशे की चपेट में आए लोगों को सहयोग देने और समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

मध्यप्रदेश का संदेश स्पष्ट है नशे से दूरी, स्वस्थ जीवन की मजबूरी। जनभागीदारी, जागरूकता और पुनर्वास के समन्वित प्रयासों से ही नशामुक्त, स्वस्थ और सशक्त मध्यप्रदेश का निर्माण संभव होगा।

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