<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
टेक्नोलॉजी

रिश्वतखोरी पर नजर रखेगा ये नया प्लेटफॉर्म! गुमनाम तरीके से दर्ज करें सरकारी दफ्तर का अनुभव

भारत में सरकारी दफ्तर में किसी काम के लिए रिश्वत मांगने की शिकायत कोई नई बात नहीं है. दिक्कत यह है कि ऐसी घटनाओं की बातें अक्सर लोगों तक ही रह जाती हैं. नाम पब्लिक होने की वजह से लोग आम तौर पर शिकायत करने से भी डरते हैं. कितने पैसे मांगे गए, किस विभाग में मांगे गए और किस शहर में ऐसी शिकायतें ज्यादा हैं, इसका कोई आसान पब्लिक रिकॉर्ड आम लोगों के सामने नहीं होता.

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के एक स्टूडेंट आर्यन निषाद ने bribes.fyi नाम का एक प्लेटफॉर्म बनाया है. इसका मकसद लोगों को रिश्वत से जुड़े अपने अनुभव गुमनाम तरीके से दर्ज करने देना है. आर्यन के मुताबिक इस आइडिया के पीछे सवाल यही था कि रोजमर्रा की रिश्वतखोरी की बातें आखिर आंकड़ों में क्यों नहीं दिखतीं.

रिश्वत दी या नहीं दी, दोनों की जानकारी
bribes.fyi पर किसी सरकारी दफ्तर या सर्विस से जुड़े रिश्वत के एक्सपीरिएंस की जानकारी दी जा सकती है. वेबसाइट पर किसी खाते की अकाउंट की जरूरत नहीं है. इसमें विभाग, रकम और घटना से जुड़ी जानकारी दर्ज करने का विकल्प है.

वेबसाइट अपने होमपेज पर इसे भारत का क्राउडसोर्स्ड रिश्वत रजिस्टर बताती है. यहां दर्ज रिपोर्ट को सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने का दावा किया गया है. वेबसाइट के मुताबिक रिपोर्ट में किसी व्यक्ति का नाम बताना जरूरी नहीं है.

इसका एक दिलचस्प हिस्सा यह है कि सिर्फ रिश्वत देने की बात ही दर्ज नहीं की जा सकती. अगर किसी ने रिश्वत देने से मना किया और फिर भी उसका काम हो गया, तो ऐसी जानकारी भी दर्ज की जा सकती है. इससे यह समझने की कोशिश की जाती है कि अलग-अलग जगहों पर रिश्वत से इनकार करने के बाद लोगों के साथ क्या हुआ.

सिर्फ शिकायत नहीं, आंकड़ों से तस्वीर दिखाने की कोशिश
इस प्लेटफॉर्म का मकसद सिर्फ लोगों की शिकायतें जमा करना नहीं है. वेबसाइट पर राज्य, शहर और सरकारी विभाग के हिसाब से जानकारी देखने और अलग-अलग जगहों की तुलना करने की सुविधा बनाई गई है.

यानी अगर किसी शहर में किसी खास सरकारी सर्विस से जुड़े रिश्वत के मामले बार-बार सामने आते हैं, तो समय के साथ उसका पैटर्न दिखाई दे सकता है. वेबसाइट में विभागों और शहरों के लिए अलग हिस्से और तुलना की सर्विस भी दी गई है.

हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. इस तरह के मंच पर आने वाला आंकड़ा पूरे देश में होने वाली रिश्वत का पूरा हिसाब नहीं हो सकता. जो लोग रिपोर्ट करेंगे, आंकड़े उसी के आधार पर बनेंगे. खुद प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों ने भी ऑनलाइन चर्चाओं में माना है कि कुछ राज्यों या इलाकों से ज्यादा रिपोर्ट आने का मतलब यह जरूरी नहीं कि वहां रिश्वतखोरी सबसे ज्यादा है. वहां के लोग ज्यादा रिपोर्ट कर रहे हों, ऐसा भी हो सकता है.

वेबसाइट पर लाइव रिश्वत की रिपोर्ट्स
इस वेबसाइट पर लाइव रिपोर्ट्स का ऑप्शन है जो आपको ये बताता है कि कहां कब रिश्वत दी गई है. एक ट्रांसपेरेंसी मैप भी है जिसमें ये इंट्रैक्टिव बनाया गया है. यहां अपने राज्य के हिसाब से सॉर्ट करके भी आप रिपोर्ट देख सकते हैं. बकाया इस वेबसाइट के फ्रंट पेज पर ही स्टेट रजिस्ट्री लेजर बनाया गया है. इसमें ये दिखाया जा रहा है कि कब कहां रिश्वत की कितनी रिपोर्ट्स हैं.

दिलचस्प ये भी है कि यहां Bribe Of The Week का सेक्शन है. इसमें यूजर्स अपना एक्सपीरिएंस शेयर कर सकते हैं. रिश्वत रिपोर्ट करते समय पूरी डिटेल्स लिखने का ऑप्शन है. इस ऑप्शन से ये पता लग सकता है कि रिश्वत किस तरह से मांगी गई. दावा किया गया है कि सिर्फ 60 सेकंड्स में आप रिश्वत की रिपोर्ट फाइल कर सकते हैं.

गुमनाम रखने पर सबसे बड़ा सवाल
ऐसे प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी जरूरत भरोसा है. अगर किसी सरकारी दफ्तर में रिश्वत मांगने की शिकायत करने वाले को डर हो कि उसकी पहचान सामने आ जाएगी, तो वह शायद शिकायत ही न करे.

bribes.fyi का कहना है कि रिपोर्ट करने के लिए खाता, नाम या टेंप्रोरी आईपी अड्रेस रखने की जरूरत नहीं है. वेबसाइट के मुताबिक रिपोर्ट को लगभग एक मिनट में दर्ज किया जा सकता है. रिपोर्ट की जानकारी सार्वजनिक करने से पहले उसकी जांच करने की व्यवस्था भी बताई गई है.

लेकिन गुमनामी के साथ दूसरी चुनौती भी है, झूठी शिकायत. इंटरनेट पर कोई भी व्यक्ति गलत जानकारी डाल सकता है. प्लेटफॉर्म के मुताबिक एक ही जगह या अधिकारी से जुड़ी कई रिपोर्ट मिलने पर एक पैटर्न को पहचानने की व्यवस्था बनाई गई है. फिर भी ऐसे आंकड़ों को सरकारी जांच या अदालत के फैसले की तरह नहीं देखा जाना चाहिए.

स्टूडेंट का छोटा एक्सपेरिमेंट या बड़े बदलाव की शुरुआत?
आर्यन निषाद के मुताबिक यह काम उन्होंने इस सवाल से शुरू किया कि भारत में रोजमर्रा की रिश्वतखोरी का पब्लिक और ऑर्गनाइज्ड आंकड़ा क्यों नहीं है. वह इसे गोपनीयता को ध्यान में रखकर बनाया गया मंच बताते हैं, जहां लोग रिश्वत के अनुभव दर्ज करने के साथ अलग-अलग विभागों और राज्यों के रुझान भी देख सकते हैं.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button